September 12, 2026 6:32 AM

Krishi Times

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डेयरी और प्राकृतिक खेती में साथ आए भारत-नीदरलैंड!

भारत-नीदरलैंड के बीच डेयरी और टिकाऊ कृषि सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा

आनंद। भारत के डेयरी क्षेत्र में सहकारिता, पशु उत्पादकता और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए भारत और नीदरलैंड के बीच सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा हुई। नीदरलैंड दूतावास की कृषि सलाहकार Marion van Schaik के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आनंद स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) का दौरा किया।

प्रतिनिधिमंडल में Netherlands Business Support Office की मुख्य प्रतिनिधि Kruti Urs और मुंबई स्थित नीदरलैंड के महावाणिज्य दूतावास के वरिष्ठ नीति सलाहकार Prasad G. Parte शामिल रहे। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने NDDB के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत में डेयरी क्षेत्र के विकास, सहकारी मॉडल और भविष्य में संभावित सहयोग के क्षेत्रों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

सहकारिता से लेकर पशु स्वास्थ्य तक NDDB की पहल

बैठक के दौरान भारत में डेयरी क्षेत्र में आए बदलाव और NDDB की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्रतिनिधिमंडल को दी गई। इसमें डेयरी सहकारिता का विकास, पशु उत्पादकता बढ़ाना, पशु स्वास्थ्य एवं पोषण, प्रजनन तकनीक, जीनोमिक्स, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे।

NDDB के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने बैठक में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। अधिकारियों ने बताया कि भारत में डेयरी विकास का अगला चरण केवल दूध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय, संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरणीय स्थिरता से भी जुड़ा है।

टिकाऊ और पुनर्योजी कृषि पर फोकस

भारत-नीदरलैंड सहयोग के संभावित क्षेत्रों में सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन को विशेष महत्व दिया गया। चर्चा में पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture), मिट्टी का स्वास्थ्य, प्राकृतिक खेती और गोबर एवं अन्य जैविक अपशिष्ट का बेहतर प्रबंधन जैसे विषय प्रमुख रहे।

इन क्षेत्रों में सहयोग से डेयरी आधारित खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के साथ-साथ पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। विशेष रूप से गोबर प्रबंधन को जैविक खाद और कृषि संसाधनों से जोड़ने से खेती की लागत घटाने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है।

अमूल डेयरी और गांव में जमीनी पहल का अवलोकन

प्रतिनिधिमंडल ने आनंद स्थित Amul Dairy का भी दौरा किया। इसके अलावा NDDB की Sustainable Farm Management Demonstration Unit का अवलोकन कर टिकाऊ कृषि से जुड़ी व्यावहारिक पहलों की जानकारी ली।

प्रतिनिधिमंडल ने मुजकुवा गांव में चल रही विभिन्न पहलों को भी देखा। यहां डेयरी, कृषि और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन से जुड़े प्रयासों का प्रत्यक्ष अनुभव लिया गया।

भारत और नीदरलैंड दोनों ही कृषि एवं डेयरी क्षेत्र में तकनीक, नवाचार और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में यह संवाद भविष्य में डेयरी किसानों की उत्पादकता, संसाधन दक्षता, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण अनुकूल खेती से जुड़े संयुक्त कार्यक्रमों का आधार बन सकता है।

स्रोत: NDDB