September 12, 2026 6:32 AM

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लंपी ने बढ़ाई चिंता, 16 पशुओं की मौत!

राजस्थान में लंपी का बढ़ता खतरा: 10 जिलों में संक्रमण, 16 पशुओं की मौत; रोकथाम के लिए घर-घर सर्वे और निगरानी तेज

जयपुर, 11 सितंबर। राजस्थान में लंपी स्किन डिजीज (LSD) के बढ़ते मामलों को देखते हुए पशुपालन विभाग ने निगरानी, टीकाकरण, उपचार और रोकथाम की तैयारियों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुक्रवार को पशुधन भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश में बीमारी की स्थिति और नियंत्रण उपायों की विस्तृत समीक्षा की गई।

10 जिलों में लंपी की स्थिति, रोकथाम पर जोर

राजस्थान राज्य पशुधन विकास बोर्ड के सभागार में हुई बैठक की अध्यक्षता पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले ने की। बैठक में प्रभावित जिलों में सर्वेक्षण, संक्रमित पशुओं की पहचान, टीकाकरण और उपचार व्यवस्था की प्रगति की जानकारी ली गई।

पशुपालन निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीना ने बताया कि फिलहाल प्रदेश के 10 जिले लंपी रोग से प्रभावित हैं। इनमें अधिकतर जिले पूर्वी राजस्थान के हैं। विभाग के अनुसार सक्रिय संक्रमित गौवंश की संख्या में लगातार कमी आ रही है, हालांकि अब तक 16 पशुओं की मौत की सूचना है।

घर-घर सर्वेक्षण और सतत निगरानी के निर्देश

बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि चिकित्साकर्मी प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर बीमार पशुओं का सर्वेक्षण करें और संदिग्ध मामलों की तत्काल पहचान कर उपचार उपलब्ध कराएं। पशु चिकित्सा संस्थानों के माध्यम से जरूरी चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ पशुपालकों को बीमारी के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी देने पर भी जोर दिया गया।

विभाग ने उन जिलों को भी विशेष निगरानी में रखने के निर्देश दिए हैं, जहां अभी तक लंपी के मामले सामने नहीं आए हैं। इसका उद्देश्य बीमारी को नए क्षेत्रों में फैलने से रोकना है।

पशु मेलों और हाट पर रोक

लंपी संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए पशुओं के आवागमन पर निगरानी बढ़ाई गई है। विभाग ने पशु मेले और पशु हाट पर प्रतिबंध लगा दिया है, ताकि संक्रमित पशुओं के संपर्क से दूसरे क्षेत्रों में बीमारी फैलने की आशंका कम की जा सके।

इसके अलावा जिला और राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष तथा त्वरित प्रतिक्रिया दल (Rapid Response Teams) गठित किए गए हैं। इन टीमों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था की गई है।

पशुपालकों की जागरूकता को बनाया अहम हथियार

प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बीमारी की रोकथाम के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि पशुपालकों तक लंपी के लक्षण, संक्रमण से बचाव, पशुओं को अलग रखने और समय पर उपचार कराने से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार लंपी स्किन डिजीज मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और अन्य रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से फैल सकती है। ऐसे में संक्रमित या संदिग्ध पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना, पशुशाला की स्वच्छता बनाए रखना और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करना संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।

बैठक में अधिकारियों ने अब तक किए गए नियंत्रणात्मक उपायों की जानकारी दी और जिलों में निगरानी एवं विभागीय समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जमीनी स्तर पर स्थिति की लगातार समीक्षा करते हुए आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित की जाए।