नंदीयाल में ‘कैच द रेन’ अभियान बना जल संरक्षण का मॉडल, 2,103 कार्यों से बढ़ेगी जल भंडारण क्षमता
नंदीयाल (आंध्र प्रदेश), 25 जुलाई। आंध्र प्रदेश के नंदीयाल जिले में 4 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक चल रहा ‘कैच द रेन अभियान’ जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में उभर रहा है। “बारिश को वहीं इकट्ठा करें जहां वह गिरती है, जब वह गिरती है” की थीम पर आधारित इस अभियान के तहत जिले में पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, नहरों की गाद सफाई, तालाबों के जीर्णोद्धार और नई जल संचयन संरचनाओं के निर्माण पर व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है।
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जिला प्रशासन, सिंचाई, ग्रामीण विकास, जल संसाधन और अन्य विभागों के समन्वित प्रयासों से वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को संरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य मानसूनी जल के अधिकतम संग्रहण के साथ-साथ भूजल स्तर में सुधार और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
वैज्ञानिक योजना और ग्राम स्तर की भागीदारी
अभियान के तहत जिले की सभी 489 ग्राम पंचायतों में विस्तृत क्षेत्रीय सर्वेक्षण कर प्राथमिकता वाले जल निकायों, सहायक नहरों और जलग्रहण क्षेत्रों का मानचित्रण किया गया। तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा किए गए आकलन और स्थानीय समुदायों तथा ग्राम बुजुर्गों के सुझावों के आधार पर कार्ययोजना तैयार की गई।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रस्तावित कार्य ग्राम सभाओं में प्रस्तुत किए गए। इसी सहभागी और वैज्ञानिक प्रक्रिया के आधार पर जिले में 2,103 जल संरक्षण कार्यों की पहचान कर उन्हें स्वीकृत किया गया तथा सभी कार्यों की शुरुआत सुनिश्चित की गई।
नहरों और तालाबों का व्यापक पुनरुद्धार
अभियान के अंतर्गत अब तक 2,691 किलोमीटर लंबी सहायक एवं आपूर्ति नहरों की गाद सफाई और पुनर्स्थापना का कार्य किया गया है। इससे वर्षा जल का प्रवाह जलाशयों और टैंकों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
इसके अलावा 251 लघु सिंचाई टैंकों के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया, जिनमें से 225 कार्य पूर्ण हो चुके हैं जबकि शेष कार्य तेजी से जारी हैं। इससे कृषि क्षेत्र को सिंचाई जल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है।
हजारों जल संचयन संरचनाओं को मिली मजबूती
जिले में मौजूद 22,221 खेत तालाबों, 2,221 चेक डैमों और 202 परकोलेशन टैंकों को भी मजबूत किया गया है। इन संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण से वर्षा जल संचयन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ भूजल पुनर्भरण को भी गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में दीर्घकालिक समाधान प्रदान कर सकते हैं।
3.30 टीएमसी अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता का लक्ष्य
तकनीकी आकलनों के अनुसार फीडर चैनलों और जल संरक्षण संरचनाओं के पुनरुद्धार से लगभग 3.27 टीएमसी जल भंडारण क्षमता पुनः स्थापित होगी। वहीं नई जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से अतिरिक्त 0.03 टीएमसी क्षमता विकसित होगी।
कुल मिलाकर जिले में लगभग 3.30 टीएमसी अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता उपलब्ध होने का अनुमान है, जिससे मानसून के दौरान बहने वाले पानी का अधिकतम उपयोग किया जा सकेगा और कृषि, पेयजल तथा ग्रामीण आजीविकाओं को लाभ मिलेगा।
जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की दिशा में कदम
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ते जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा के दौर में ऐसी पहलें ग्रामीण क्षेत्रों की जल सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं। नंदीयाल जिले का यह मॉडल दर्शाता है कि वैज्ञानिक योजना, तकनीकी मूल्यांकन और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।
जिला प्रशासन का मानना है कि अभियान के तहत किए जा रहे कार्य न केवल वर्तमान जल आवश्यकताओं को पूरा करेंगे, बल्कि भविष्य में जल संकट और सूखे जैसी चुनौतियों से निपटने की क्षमता भी बढ़ाएंगे।
