यूपी में शुरू हुआ हाईटेक गन्ना सर्वेक्षण अभियान!

सर्वेक्षण में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल, अब सह फसली और एग्रोफॉरेस्ट्री का भी होगा रिकॉर्ड!

लखनऊ, 13 मई 2026। उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण कार्य शुरू हो चुका है। गन्ना एवं चीनी आयुक्त द्वारा जारी नई सर्वेक्षण नीति के तहत इस बार सर्वे प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। यह सर्वेक्षण अभियान 30 जून 2026 तक चलेगा।

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नई व्यवस्था के तहत अब केवल गन्ने के रकबे का ही नहीं, बल्कि खेत में मौजूद वास्तविक गन्ना किस्म, सह फसली खेती (इंटरक्रॉपिंग), एग्रोफॉरेस्ट्री तथा फार्म फॉरेस्ट्री से जुड़ी जानकारी भी अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएगी। इससे गन्ना उत्पादन का सटीक आकलन करने के साथ किसानों की आय बढ़ाने वाली खेती प्रणालियों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

वास्तविक गन्ना किस्म दर्ज करने के निर्देश

गन्ना विभाग ने सभी जिला एवं परिक्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सर्वेक्षण के दौरान खेत में मौके पर मौजूद वास्तविक गन्ना किस्म का ही अंकन किया जाए। विभाग का मानना है कि कई बार अभिलेखों और खेतों में बोई गई किस्मों में अंतर पाया जाता है, जिससे उत्पादन अनुमान और नीति निर्माण प्रभावित होता है।

इसलिए इस बार सर्वेक्षण में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विभागीय रिकॉर्ड पूरी तरह वास्तविक खेती के अनुरूप तैयार हो सके।

सह फसली खेती और एग्रोफॉरेस्ट्री पर विशेष फोकस

प्रदेश सरकार अब गन्ना खेती को केवल एकल फसल प्रणाली तक सीमित नहीं रखना चाहती। इसी दिशा में सर्वेक्षण में गन्ने के साथ की जा रही दलहन, तिलहन, सब्जी या अन्य सह फसलों की जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

इसके अलावा एग्रोफॉरेस्ट्री एवं फार्म फॉरेस्ट्री मॉडल के तहत की गई गन्ना बुवाई का भी अलग से रिकॉर्ड तैयार होगा। विशेषज्ञों के अनुसार इससे किसानों की अतिरिक्त आय, भूमि की उर्वरता और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा।

यांत्रिक गन्ना कटाई को मिलेगा बढ़ावा

गन्ना विभाग ने ट्रेंच और जोड़ीदार पंक्ति (Paired Row) विधि से की गई बुवाई के आंकड़े भी जुटाने का निर्णय लिया है। विभाग का मानना है कि विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर भविष्य में यांत्रिक गन्ना कटाई को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, आधुनिक तकनीक आधारित सर्वेक्षण से गन्ना मिलों को भी क्षेत्रवार उत्पादन अनुमान लगाने में सुविधा होगी, जिससे पेराई व्यवस्था बेहतर हो सकेगी।

किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने में मिलेगी मदद

सटीक सर्वेक्षण आंकड़ों के आधार पर सरकार किसानों को योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से उपलब्ध करा सकेगी। इससे गन्ना भुगतान, बीज वितरण, उत्पादन प्रोत्साहन और अन्य विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुधार आने की उम्मीद है।

24×7 किसान कॉल सेंटर की सुविधा

गन्ना किसानों की समस्याओं और सर्वेक्षण संबंधी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए विभाग ने मुख्यालय स्तर पर टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 संचालित किया है। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी, जहां किसान अपनी समस्याओं, सर्वे त्रुटियों और तकनीकी जानकारी से जुड़ी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

गन्ना विकास विभाग का कहना है कि सरकार का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ एवं विविधीकृत खेती की ओर प्रेरित करना है, ताकि उनकी आय में स्थायी बढ़ोतरी सुनिश्चित की जा सके।