एआई से बदलेगा मौसम पूर्वानुमान का भविष्य: किसानों को अब 4 हफ्ते पहले मिलेगा मानसून का संकेत
नई दिल्ली -देश में मौसम पूर्वानुमान सेवाओं को अधिक सटीक, अत्यंत-स्थानीय और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत विकसित दो अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों का शुभारंभ किया। इन नई सेवाओं का उद्देश्य किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, जल संसाधन विभागों और आम नागरिकों को समय रहते सटीक मौसम जानकारी उपलब्ध कराना है।
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शुभारंभ किए गए दो प्रमुख उत्पादों में पहला है — एआई आधारित “मानसून अग्रिम पूर्वानुमान प्रणाली”, जबकि दूसरा है — “उत्तर प्रदेश के लिए उच्च स्थानिक रिज़ॉल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान सेवा”। इन दोनों प्रणालियों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान तथा राष्ट्रीय मीडियम रेंज मौसम पूर्वानुमान केंद्र ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
किसानों को मिलेगा बुवाई और सिंचाई का सटीक समय
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नई एआई आधारित मानसून पूर्वानुमान प्रणाली हर बुधवार को अगले चार सप्ताह तक मानसून की प्रगति का संभावित पूर्वानुमान जारी करेगी। यह सेवा विशेष रूप से कृषि क्षेत्र को ध्यान में रखकर तैयार की गई है और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नेटवर्क के माध्यम से 16 राज्यों और 3,000 से अधिक उप-जिलों तक पहुंचाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि किसान अब बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, फसल सुरक्षा और कटाई जैसे महत्वपूर्ण फैसले अधिक वैज्ञानिक और स्थानीय स्तर की जानकारी के आधार पर ले सकेंगे। इससे खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
भारत की लगभग 55 प्रतिशत खेती अब भी मानसून पर निर्भर है। ऐसे में यदि किसानों को पहले से वर्षा और मानसून की स्थिति की सटीक जानकारी मिल जाए तो वे फसल चयन, बीज तैयारी और जल प्रबंधन बेहतर तरीके से कर सकते हैं। इससे सूखा, अतिवृष्टि और बेमौसम बारिश से होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा।
उत्तर प्रदेश के लिए 1 किलोमीटर रिज़ॉल्यूशन वाला वर्षा पूर्वानुमान
दूसरे उत्पाद के रूप में लॉन्च की गई “उच्च स्थानिक रिज़ॉल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान सेवा” फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उत्तर प्रदेश में शुरू की गई है। यह प्रणाली 1 किलोमीटर के स्थानिक रिज़ॉल्यूशन पर अगले 10 दिनों तक वर्षा का पूर्वानुमान देने में सक्षम होगी।
यह सेवा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डाउनस्केलिंग तकनीकों पर आधारित है, जिसमें स्वचालित वर्षामापी (ARG), स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS), डॉप्लर मौसम रडार और उपग्रह डेटा का उपयोग किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी सूक्ष्म स्तर की वर्षा जानकारी शहरी बाढ़ प्रबंधन, सिंचाई योजना, जलाशय संचालन, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रामीण अवसंरचना विकास के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
पिछले दशक में मौसम पूर्वानुमान क्षमता में बड़ा सुधार
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में पिछले 10 वर्षों में अभूतपूर्व बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि एक दशक पहले देश में केवल 16-17 डॉप्लर मौसम रडार थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर लगभग 50 हो चुकी है और “मिशन मौसम” के तहत 50 अतिरिक्त रडार स्थापित किए जाने की योजना है।
उन्होंने कहा कि हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, स्वचालित मौसम स्टेशन, डिजिटल डेटा नेटवर्क और उपग्रह आधारित निगरानी प्रणाली के विस्तार से मौसम चेतावनियों की सटीकता में तेजी से सुधार हुआ है।
40% तक बढ़ी पूर्वानुमान की सटीकता
मंत्री ने जानकारी दी कि पिछले दशक की तुलना में अब भीषण मौसम घटनाओं के पूर्वानुमान की सटीकता में लगभग 40 प्रतिशत सुधार हुआ है। वहीं चक्रवातों के मार्ग, तीव्रता और लैंडफॉल के 72 घंटे पूर्व अनुमान में 30 से 35 प्रतिशत तक सुधार दर्ज किया गया है।
जलवायु परिवर्तन के दौर में बढ़ी सटीक पूर्वानुमान की जरूरत
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। बेमौसम बारिश, हीटवेव, अत्यधिक वर्षा और चक्रवात जैसी घटनाएं अब अधिक सामान्य होती जा रही हैं। ऐसे समय में वैज्ञानिक और वास्तविक समय आधारित मौसम पूर्वानुमान प्रणाली देश की आवश्यकता बन गई है।
उन्होंने कहा कि नई प्रणालियां केवल मौसम की जानकारी नहीं देंगी, बल्कि प्रशासनिक निर्णयों, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा में भी मददगार साबित होंगी।
मोबाइल, व्हाट्सएप और किसान पोर्टल से पहुंचेगी जानकारी
सरकार अब मौसम संबंधी चेतावनियों और सलाह को मोबाइल ऐप, एसएमएस, व्हाट्सएप, किसान पोर्टल, टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। मंत्री ने कहा कि मौसम संबंधी सलाह का समय पर पालन करने से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया “भविष्य की मौसम सेवा”
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने कहा कि ये नई प्रणालियां हितधारक-आधारित मौसम सेवाओं की दिशा में बड़ा कदम हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की उच्च-रिज़ॉल्यूशन सेवाओं का विस्तार देश के अन्य राज्यों तक भी किया जाएगा।
वहीं डॉ. मृत्युंजय मोहपात्रा और वैज्ञानिकों ने कहा कि एआई आधारित मौसम मॉडलिंग भारत को विश्वस्तरीय मौसम पूर्वानुमान देशों की श्रेणी में और मजबूत बनाएगी।
किसानों और आम जनता को क्या होगा लाभ?
- समय पर बुवाई और सिंचाई योजना, फसल नुकसान में कमी, बाढ़ और सूखा प्रबंधन में मदद
- आपदा पूर्व चेतावनी में सुधार, शहरी जलभराव और ट्रैफिक प्रबंधन में सहायता
- बिजली और सौर ऊर्जा उत्पादन योजना में मदद,प्रशासनिक निर्णय लेने में तेजी
सारांश
भारत तेजी से “डिजिटल मौसम सेवा” मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उपग्रह तकनीक और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग मिलकर मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक और जन-केंद्रित बना रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इन सेवाओं का प्रभावी उपयोग हुआ तो यह कृषि उत्पादन, आपदा प्रबंधन और आर्थिक योजना के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
