September 21, 2026 10:09 PM

Krishi Times

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भविष्य की खेती में बढ़ेगी पोषणयुक्त सब्जियों की भूमिका!

अल्प-प्रचलित सब्जियों को मुख्यधारा में लाने की पहल, IIVR में 10 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शुरू

वाराणसी, 21 सितंबर। देश में पोषण सुरक्षा, कृषि विविधीकरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच अल्प-प्रचलित एवं संभावनाशील सब्जियों को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी में “अल्प-प्रचलित एवं संभावनाशील सब्जियों का मुख्यधारा में समावेशन” विषय पर 10 दिवसीय राष्ट्रीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश के आठ राज्यों के वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों के संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं की भागीदारी हो रही है। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसी सब्जियों को बढ़ावा देना है जो पोषण से भरपूर होने के बावजूद अभी तक बड़े पैमाने पर खेती और बाजार व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन सकी हैं।

पोषण सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

विशेषज्ञों का मानना है कि कई पारंपरिक और स्थानीय सब्जियां सूखा, गर्मी तथा अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता रखती हैं। इनमें पोषक तत्वों की मात्रा भी अधिक होती है। ऐसे में इन फसलों को बढ़ावा देकर न केवल लोगों के भोजन में पोषण की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है, बल्कि किसानों के लिए आय के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।

चित्र सौजन्य:IIVR

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उत्पादन तकनीक, आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन, बीज प्रणाली, फसल सुधार, संरक्षण, पोषण मूल्य, मूल्य संवर्धन, उद्यमिता विकास तथा बाजार संपर्क जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा और ज्ञान-विनिमय होगा। प्रतिभागियों को प्रयोगशाला और खेत स्तर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

वैज्ञानिक शोध से किसानों तक पहुंचेगी तकनीक

संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि अल्प-प्रचलित सब्जियों के वैज्ञानिक मूल्यांकन, उन्नत किस्मों के विकास, सतत उत्पादन तकनीकों और प्रभावी बीज प्रणाली पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और विस्तार तंत्र के समन्वय से इन फसलों की तकनीक किसानों तक पहुंचाई जा सकती है।

उन्होंने बताया कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में कृषि क्षेत्र को अधिक लचीला बनाने के लिए फसल विविधीकरण जरूरी है और अल्प-प्रचलित सब्जियां इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

भविष्य की खेती में बढ़ेगी भूमिका

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में ऐसी सब्जियों की मांग बढ़ सकती है जो कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन दें और उच्च पोषण मूल्य प्रदान करें। मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण के माध्यम से इन फसलों को बाजार से जोड़कर ग्रामीण उद्यमिता को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से वैज्ञानिकों और शिक्षकों को नई तकनीकी जानकारी मिलेगी, जिसका लाभ आगे चलकर किसानों तक पहुंचेगा। इससे देश में पोषण सुरक्षा को मजबूत करने, कृषि जैव विविधता को संरक्षित रखने और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

“भविष्य की सब्जियां—पोषण, विविधता और समृद्धि की नई दिशा” इसी संदेश के साथ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अल्प-प्रचलित सब्जियों को राष्ट्रीय कृषि विकास की मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रहा है।