September 21, 2026 11:02 PM

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भारत-न्यूजीलैंड FTA: किसानों के लिए अवसर और सुरक्षा दोनों!

भारत-न्यूजीलैंड FTA से कृषि और डेयरी क्षेत्र पर क्या होगा असर? 20 अक्टूबर से लागू होगा समझौता!

नई दिल्ली | 21 सितंबर 2026 –भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों के इस नए चरण में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, बागवानी, डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष नजर रहेगी। हालांकि, समझौते में भारत के संवेदनशील कृषि उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा गया है, जिससे घरेलू किसानों के हितों की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है

भारत-न्यूजीलैंड FTA पर 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए थे। न्यूजीलैंड की संसद द्वारा संबंधित कानून पारित किए जाने के बाद अब दोनों देशों ने समझौते को 20 अक्टूबर से लागू करने की घोषणा की है

कृषि उत्पादों के व्यापार में संतुलित व्यवस्था

FTA की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ने डेयरी, अधिकांश पशु मांस, प्रमुख कृषि उत्पाद, चीनी और खाद्य तेल जैसे संवेदनशील उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य विदेशी उत्पादों से घरेलू कृषि बाजार पर पड़ने वाले संभावित दबाव को सीमित करना है।

विशेष रूप से भारतीय डेयरी किसानों के लिए यह प्रावधान महत्वपूर्ण है, क्योंकि न्यूजीलैंड वैश्विक स्तर पर दुग्ध एवं डेयरी उत्पादों का बड़ा निर्यातक है। डेयरी क्षेत्र को समझौते में संवेदनशील श्रेणी में बनाए रखने से भारतीय दूध उत्पादकों और छोटे पशुपालकों को सुरक्षा मिलती है।

सेब, कीवी और शहद के लिए नियंत्रित बाजार पहुंच

न्यूजीलैंड से भारत आने वाले सेब, कीवी और मनुका शहद के लिए भी पूरी तरह खुली बाजार व्यवस्था नहीं बनाई गई है। इनके लिए न्यूनतम आयात मूल्य, मौसमी आयात अवधि और टैरिफ रेट कोटा जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया है।

इससे एक ओर उपभोक्ताओं को इन उत्पादों की नियंत्रित उपलब्धता मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर घरेलू बागवानों और मधुमक्खी पालकों के हितों को ध्यान में रखने की कोशिश की गई है।

किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सहयोग

FTA में केवल बाजार पहुंच की बात नहीं है, बल्कि कृषि उत्पादकता साझेदारी स्थापित करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत कीवी, सेब और शहद क्षेत्र में विशेष कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी।

इन योजनाओं का फोकस भारत में:

  • कृषि उत्पादकता बढ़ाने, उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने, किसानों की आय बढ़ाने, बागान प्रबंधन की तकनीक
  • कटाई के बाद प्रबंधन, आपूर्ति श्रृंखला, खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ मधुमक्खी पालन

जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर रहेगा।

भारतीय कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार खुलेगा

समझौते के लागू होने के बाद न्यूजीलैंड को भारत के 100 प्रतिशत निर्यात की प्रत्येक टैरिफ लाइन शुल्क-मुक्त हो जाएगी। इससे कृषि और खाद्य-प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए नए निर्यात के अवसर बन सकते हैं।

प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के अलावा कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग उत्पाद तथा अन्य भारतीय उत्पादों को भी न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा।

कृषि क्षेत्र के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि कच्चे कृषि उत्पादों के साथ-साथ वैल्यू-एडेड और प्रोसेस्ड फूड का निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं बन सकती हैं। इससे किसानों को स्थानीय बाजार के अलावा अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने के अवसर मिल सकते हैं।

कृषि उद्योग को सस्ते कच्चे माल का लाभ

FTA के तहत लकड़ी के लट्ठों, कोकिंग कोल और मेटल स्क्रैप जैसे कुछ महत्वपूर्ण औद्योगिक इनपुट पर शुल्क-मुक्त पहुंच भी मिलेगी। इससे कृषि मशीनरी, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और अन्य संबंधित उद्योगों की लागत एवं प्रतिस्पर्धात्मकता पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।

न्यूजीलैंड से 20 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता

समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की सुविधा की प्रतिबद्धता जताई है। निवेश का लाभ कृषि, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप क्षेत्र तक पहुंचने की संभावना है।

कृषि के नजरिए से निवेश का महत्व केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। कोल्ड चेन, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, लॉजिस्टिक्स, कृषि तकनीक और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में पूंजी आने से किसानों के लिए बाजार से जुड़ाव के नए रास्ते बन सकते हैं।

किसानों के लिए असली फायदा वैल्यू एडिशन और बाजार से जुड़ाव में

भारत-न्यूजीलैंड FTA का कृषि क्षेत्र पर असर केवल आयात-निर्यात के आंकड़ों से नहीं आंका जाएगा। इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भारतीय किसान और कृषि उद्यमी उत्पादन से आगे बढ़कर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, गुणवत्ता मानकों और निर्यात बाजार से कितनी मजबूती से जुड़ पाते हैं।

फल, सब्जियां, शहद, डेयरी से जुड़े वैल्यू-एडेड उत्पाद और अन्य कृषि-प्रसंस्कृत वस्तुओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बढ़ाना किसानों की आय में विविधता लाने का एक रास्ता बन सकता है।

डेयरी किसानों के लिए महत्वपूर्ण संकेत

भारत दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में है, जबकि न्यूजीलैंड का डेयरी क्षेत्र निर्यात-उन्मुख है। ऐसे में FTA में डेयरी को संवेदनशील क्षेत्र के रूप में बनाए रखना भारतीय पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान है।

आने वाले समय में भारत-न्यूजीलैंड सहयोग का फोकस यदि डेयरी तकनीक, पशु पोषण, उत्पादकता, प्रसंस्करण, गुणवत्ता और कोल्ड चेन जैसे क्षेत्रों पर बढ़ता है, तो इसका लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित रखने के बजाय छोटे पशुपालकों और किसान उत्पादक संगठनों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा।

व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य

वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार लगभग 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देशों ने 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर लगभग 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

भारत-न्यूजीलैंड FTA इसी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए इसकी दिशा स्पष्ट है—घरेलू किसानों के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ निर्यात, कृषि-प्रसंस्करण, तकनीक और उत्पादकता सहयोग के अवसर बढ़ाना।

सारांश

किसानों के लिए किसी भी व्यापार समझौते की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना यह होगा कि उससे खेत स्तर पर बेहतर कीमत, नए बाजार, तकनीक, प्रसंस्करण और रोजगार के अवसर कितने बढ़ते हैं। इसलिए भारत-न्यूजीलैंड FTA में बाजार पहुंच के साथ कृषि उत्पादकता साझेदारी और किसान-केंद्रित तकनीकी सहयोग विशेष महत्व रखता है।