CBDC आधारित DBT से PDS में पारदर्शिता की नई शुरुआत, चंडीगढ़ से शुरू हुआ देश का पहला बड़ा प्रयोग
चंडीगढ़, 14 अगस्त। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और लाभार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने की। इस अवसर पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभाणिया भी मौजूद रहीं।
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केंद्र सरकार की यह पहल राशन वितरण प्रणाली में तकनीक के उपयोग को बढ़ाते हुए लाभार्थियों तक सरकारी सहायता को अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की दिशा में एक नए मॉडल के रूप में देखी जा रही है।
PDS में डिजिटल क्रांति का नया अध्याय
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि CBDC आधारित DBT व्यवस्था के माध्यम से लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता सीधे और सुरक्षित रूप से खाद्यान्न एवं आवश्यक खाद्य वस्तुओं की खरीद में उपयोग होगी। इस प्रणाली में ऐसी तकनीकी व्यवस्था की गई है जिससे राशि का उपयोग केवल निर्धारित खाद्य सामग्री की खरीद के लिए ही किया जा सकेगा। इससे सरकारी सहायता के दुरुपयोग की संभावना कम होगी और लाभार्थियों को बेहतर विकल्प भी मिलेंगे।
उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में शुरू किया गया यह पायलट मॉडल सफल होने पर देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है। उनके अनुसार यह व्यवस्था पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है।
लाभार्थियों को मिलेगा अधिक विकल्प
नई प्रणाली के तहत लाभार्थी केवल गेहूं और चावल तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी आवश्यकता के अनुसार दाल और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं का चयन भी कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य केवल खाद्यान्न उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करना है।
चौहान ने इस नवाचार के लिए विभागीय अधिकारियों और तकनीकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक का उपयोग जनकल्याण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
किसानों के हित सर्वोपरि
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कृषि और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि किसानों के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और कृषि नीतियों में हमेशा राष्ट्रहित, किसानहित और जनहित को प्राथमिकता दी गई है।
उन्होंने कहा कि भारत आज खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है और आवश्यकता पड़ने पर निर्यात भी कर रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को मिलने वाले लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाए जा रहे हैं और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
गरीब कल्याण अन्न योजना पर जताया भरोसा
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि 80 करोड़ से अधिक लोगों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराना दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा पहलों में से एक है। उन्होंने कहा कि इस योजना से गरीब परिवारों को आर्थिक राहत मिली है, जिससे वे शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक जरूरतों पर अधिक खर्च कर पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे और हर परिवार को खाद्य सुरक्षा का लाभ मिले।
DBT से घटी बिचौलियों की भूमिका
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि DBT व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और बिचौलियों की भूमिका कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि नकद राशि के गलत उपयोग की संभावना को देखते हुए CBDC आधारित प्रणाली विकसित की गई है, जिससे सहायता राशि केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही उपयोग हो सके।
उनके अनुसार यह मॉडल भविष्य में अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
चंडीगढ़ को बताया आदर्श मॉडल
केंद्रीय मंत्री ने चंडीगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था, स्वच्छता और नागरिक जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि यह शहर नवाचारों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों को समय रहते दूर किया जाए ताकि अधिक से अधिक लाभार्थी इसका लाभ उठा सकें।
स्वतंत्रता दिवस से पहले नागरिकों को संदेश
स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देते हुए चौहान ने नागरिकों से “हर घर तिरंगा” अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के रूप में भी दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प लेना चाहिए।
“सरकार जनता की जिंदगी में दिखनी चाहिए”
अपने संबोधन में चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का उल्लेख किया जिसमें शासन को केवल फाइलों तक सीमित न रखकर आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि CBDC आधारित DBT जैसी पहलें इसी सोच का परिणाम हैं, जिनका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से आम लोगों के जीवन को आसान बनाना है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में सरकार ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और डिजिटल शासन के क्षेत्र में और बड़े कदम उठाएगी। “लखपति दीदी” अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 तक 6 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
यह पहल डिजिटल इंडिया, वित्तीय समावेशन और खाद्य सुरक्षा को एक साथ जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण व्यवस्था के रूप में उभर सकती है, जिससे करोड़ों लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।
