कृषि छात्रों के लिए बड़ी सौगात: NSP-DBT से 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिली ₹21.35 करोड़ की छात्रवृत्ति!
नई दिल्ली, 10 अगस्त। कृषि शिक्षा को आधुनिक, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा परिसर में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के माध्यम से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की छात्रवृत्ति एवं फेलोशिप राशि के केंद्रीकृत वितरण के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली का शुभारंभ किया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
इस अवसर पर देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों और संस्थानों में अध्ययनरत 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को ₹21.35 करोड़ की छात्रवृत्ति एवं फेलोशिप राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की गई। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनेगी तथा विद्यार्थियों को हर महीने बिना किसी प्रशासनिक देरी के आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
कृषि शिक्षा को मजबूत करने का माध्यम है छात्रवृत्ति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता का साधन नहीं है, बल्कि कृषि शिक्षा को अधिक प्रभावी और अवसरों से जोड़ने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि कई बार विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की राशि समय पर नहीं मिलने के कारण पढ़ाई और शोध कार्य प्रभावित होते हैं। नई DBT व्यवस्था इस समस्या का स्थायी समाधान प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक व्यवस्था की सफलता इस बात से तय होती है कि परीक्षाएं समय पर हों, प्रवेश प्रक्रिया समयबद्ध हो और विद्यार्थियों को मिलने वाली सहायता बिना विलंब के उपलब्ध हो। सरकार कृषि शिक्षा व्यवस्था को इसी दिशा में आगे बढ़ा रही है।
केवल कक्षा नहीं, खेत भी बनें प्रयोगशाला
कृषि मंत्री ने कृषि शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल कक्षा में बैठकर कृषि की पढ़ाई करने से सक्षम कृषि वैज्ञानिक, उद्यमी या प्रगतिशील किसान तैयार नहीं किए जा सकते। कृषि विद्यार्थियों को खेतों में जाकर वास्तविक परिस्थितियों को समझना होगा और किसानों के साथ मिलकर समस्याओं के समाधान खोजने होंगे।
उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जो जलवायु परिवर्तन, घटती भूमि जोत, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और बढ़ती खाद्य मांग जैसी चुनौतियों का समाधान विकसित कर सकें।
कृषि स्टार्टअप और नवाचार में युवाओं की भूमिका अहम
शिवराज सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को पारंपरिक रोजगार के विकल्पों तक सीमित न रहने की सलाह देते हुए कृषि स्टार्टअप, एग्री-टेक, कृषि प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और डिजिटल कृषि के क्षेत्रों में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र में नवाचार की अपार संभावनाएं हैं और देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो विज्ञान और तकनीक के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में योगदान दे सकें।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने सुझाव और अनुभव सरकार तथा कृषि संस्थानों के साथ साझा करें ताकि कृषि शिक्षा को और अधिक उपयोगी एवं रोजगारोन्मुख बनाया जा सके।
खाद्य सुरक्षा में वैज्ञानिकों और किसानों का बड़ा योगदान
कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत आज कृषि उत्पादन के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है, जिसमें किसानों की मेहनत और कृषि वैज्ञानिकों के शोध का महत्वपूर्ण योगदान है।
उन्होंने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा केवल खेतों में उत्पादन बढ़ाने से नहीं, बल्कि अनुसंधान, नवाचार और कृषि शिक्षा को मजबूत बनाने से सुनिश्चित होगी। कृषि विश्वविद्यालयों और ICAR संस्थानों को इस दिशा में और अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने हरियाली अमावस्या के अवसर पर देशभर के ICAR संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि महाविद्यालयों के विद्यार्थियों से पौधारोपण अभियान में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि कृषि और पर्यावरण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं तथा टिकाऊ कृषि व्यवस्था के लिए वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
विद्यार्थियों को समय पर मिलेगी सहायता, शिक्षा और शोध को मिलेगा बल
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि विद्यार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना उन्हें बिना किसी बाधा के शिक्षा और अनुसंधान कार्य जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग देगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीकृत DBT प्रणाली के माध्यम से छात्रवृत्ति और फेलोशिप की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंचने से भुगतान में देरी की समस्या समाप्त होगी और छात्र अपनी पढ़ाई एवं शोध गतिविधियों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन तैयार करने के लिए यह जरूरी है कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आर्थिक कारणों से अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़नी पड़े। नई व्यवस्था इसी उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कृषि शिक्षा को नई दिशा देगा NSP-DBT प्लेटफॉर्म: डॉ. एम.एल. जाट
आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद देश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कृषि एवं संबद्ध विज्ञानों में उच्च शिक्षा के लिए प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आकर्षित करने तथा उन्हें अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए आईसीएआर विभिन्न स्तरों पर छात्रवृत्तियां और फेलोशिप प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को आर्थिक चिंताओं से मुक्त कर उनकी शैक्षणिक और अनुसंधान क्षमताओं को विकसित करना है।
2025-26 सत्र के 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के अतिरिक्त सचिव एवं आईसीएआर के वित्त सलाहकार संदीप सरकार ने बताया कि शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में आईसीएआर के माध्यम से विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर के करीब 6,000 विद्यार्थियों को इस नई व्यवस्था का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में ₹21.35 करोड़ की छात्रवृत्ति और फेलोशिप राशि विद्यार्थियों के खातों में भेजी जा रही है। भविष्य में इस प्रणाली का विस्तार कर आईसीएआर की छात्रवृत्ति या फेलोशिप प्राप्त करने वाले सभी पात्र विद्यार्थियों को इससे जोड़ा जाएगा।
कृषि शिक्षा में डिजिटल गवर्नेंस की मजबूत नींव
विशेषज्ञों का मानना है कि NSP-DBT आधारित यह पहल केवल छात्रवृत्ति वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि शिक्षा में डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। इससे कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे कृषि अनुसंधान, नवाचार और उच्च शिक्षा को नई गति मिलने की उम्मीद है।
बड़ी तस्वीर
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों के बीच कृषि शिक्षा का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में NSP-DBT के माध्यम से छात्रवृत्ति वितरण की नई व्यवस्था न केवल विद्यार्थियों को आर्थिक संबल देगी, बल्कि कृषि अनुसंधान, नवाचार और मानव संसाधन विकास को भी नई गति प्रदान करेगी। सरकार का मानना है कि मजबूत कृषि शिक्षा प्रणाली ही भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादकता सुधारने और देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने की आधारशिला बनेगी।

