बिहार में जीविका दीदियों के लिए नई पहल: बकरी पालन और ग्रामीण उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार!
पटना। बिहार सरकार ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा देने की तैयारी में है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि राज्य की जीविका दीदियां आज स्वरोजगार, उद्यमिता और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में मिसाल बन चुकी हैं। अब सरकार उन्हें बड़े पैमाने पर बकरी पालन से जोड़कर आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
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पहाड़ी और ग्रामीण जिलों में बकरी पालन को मिलेगा बढ़ावा
मंत्री ने बताया कि राज्य के पश्चिम चंपारण, बांका, जमुई, शेखपुरा, नवादा, नालंदा, गया, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर जैसे जिलों में इस अभियान को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा। इन क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों और चरागाहों की उपलब्धता को देखते हुए महिलाओं को वैज्ञानिक बकरी पालन से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीमांत और भूमिहीन किसानों के लिए बकरी पालन कम लागत वाला और नियमित आय देने वाला व्यवसाय माना जाता है। इससे ग्रामीण परिवारों को दूध, मांस और प्रजनन आधारित आय के अतिरिक्त स्रोत प्राप्त होते हैं।
जीविका समूहों के उत्पादों को मिलेगा संगठित बाजार

सरकार ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए जाने वाले खाद्य उत्पादों, हस्तशिल्प वस्तुओं और स्थानीय कारीगरों के सामान को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी काम कर रही है। इसके लिए ग्राम पंचायत, प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर विशेष हाट एवं ग्रामीण बाजार विकसित किए जाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य जीविका समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना और बिचौलियों पर निर्भरता कम करना है, जिससे महिलाओं को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके।
पर्यटन स्थलों पर खुलेंगे बिक्री केंद्र
राज्य सरकार “वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ODOP)” अवधारणा के तहत तैयार उत्पादों को प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचाने की योजना पर कार्य कर रही है। इसके तहत नालंदा, बोधगया, राजगीर, पावापुरी, वैशाली, बक्सर और भागलपुर जैसे प्रमुख पर्यटन केंद्रों पर जीविका समूहों के उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष काउंटर और बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इस व्यवस्था से स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक खाद्य उत्पादों और ग्रामीण उद्यमों को नया बाजार मिलने की संभावना है। साथ ही पर्यटन से जुड़े उपभोक्ताओं तक सीधे पहुंच बनने से ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि होगी।
पशुपालन विभाग और नाबार्ड का मिलेगा सहयोग
इस अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पशुपालन विभाग, बैंकिंग संस्थानों तथा NABARD सहित विभिन्न एजेंसियों का सहयोग लिया जा रहा है। महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार संपर्क और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जीविका समूहों को बकरी पालन, मूल्य संवर्धन और बाजार से जोड़ने की यह पहल सफल रहती है, तो इससे बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को नया बल मिलेगा। साथ ही रोजगार सृजन, परिवारों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार विश्वास जताया है कि आने वाले समय में यह अभियान ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखेगा।
