ICAR DG डॉ. एम.एल. जाट का शिमला दौरा: आलू अनुसंधान, जीनोम एडिटिंग और किसान-केंद्रित तकनीकों पर जोर
विज्ञान से खेत तक: आलू अनुसंधान में नई दिशा
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शिमला –Indian Council of Agricultural Research के शीर्ष नेतृत्व ने हिमाचल की पहाड़ियों से एक स्पष्ट संदेश दिया है—“विज्ञान तभी सार्थक है जब वह बड़े पैमाने पर, किसान-केंद्रित समाधान बनकर खेत तक पहुँचे, और उसके केंद्र में मज़बूत डेटा सिस्टम व नैतिकता हो।” यह बात Dr. M. L. Jat ने ICAR–Central Potato Research Institute, शिमला के दौरे के दौरान कही।
नई सुविधाओं का उद्घाटन, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की समीक्षा
01 मई 2026 को हुए इस दौरे में महानिदेशक ने संस्थान के इंस्टीट्यूट म्यूज़ियम और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर जीनोम एडिटिंग का उद्घाटन किया। इसके बाद एरोपोनिक्स सिस्टम, पौध संरक्षण प्रयोगशालाएँ, पोस्ट-हार्वेस्ट व सीड टेक्नोलॉजी यूनिट्स और आलू जर्मप्लाज़्म भंडार जैसी उन्नत सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया।
इस समीक्षा ने साफ किया कि संस्थान अब लैब-टू-लैंड कनेक्शन को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है—जहाँ अत्याधुनिक विज्ञान सीधे किसानों के काम आए।
“डेटा, नैतिकता और व्यवहार विज्ञान—तीनों होंगे गेमचेंजर”
वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और छात्रों को संबोधित करते हुए डॉ. जाट ने आलू अनुसंधान और बीज उत्पादन में संस्थान की उपलब्धियों की सराहना की। साथ ही उन्होंने चार प्रमुख स्तंभों पर जोर दिया—
- रिसर्च एथिक्स (अनुसंधान नैतिकता)
- मजबूत डेटा प्रबंधन
- प्रशासनिक व वित्तीय दक्षता
- व्यवहार विज्ञान के जरिए तकनीक अपनाने की गति बढ़ाना
उन्होंने रिसर्च डेटा मैनेजमेंट पॉलिसी, कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी, जेंडर स्ट्रैटेजी और MELIA फ्रेमवर्क (Monitoring, Evaluation, Learning and Impact Assessment) जैसे ढाँचों को प्रभावी क्रियान्वयन का आधार बताया।
आलू वैल्यू चेन पर मंथन, किसानों के लिए ठोस रोडमैप
दौरे के दौरान आयोजित स्टेकहोल्डर्स कॉन्क्लेव में ICAR संस्थानों, उद्योग, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और राज्य विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
चर्चा के मुख्य बिंदु रहे—
- गुणवत्ता बीज प्रणाली और क्लीन प्लांटिंग मटेरियल
- निर्यात संभावनाएँ
- पोषक तत्व-कुशल किस्में
- रियल-टाइम सीड सूचना प्रणाली
- शोध और किसानों के बीच बेहतर समन्वय
इस मंथन से वैल्यू चेन की बाधाओं को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई ठोस सुझाव सामने आए।
कुफरी–फागू यूनिट्स का दौरा, भविष्य की रिसर्च दिशा तय
डॉ. जाट ने कुफरी और फागू इकाइयों का भी निरीक्षण किया, जहाँ बीज उत्पादन और प्रोसेसिंग सुविधाओं की समीक्षा की गई। वैज्ञानिकों के साथ भविष्य की रिसर्च प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई और वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी भाग लिया।
खेतों तक पहुँचेगा ‘डेटा-ड्रिवन’ विज्ञान
यह दौरा सिर्फ निरीक्षण नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संकेत है—अब कृषि अनुसंधान का फोकस डेटा-आधारित, नैतिक और किसान-केंद्रित मॉडल पर होगा।
ICAR का यह रुख बताता है कि आने वाले समय में आलू जैसी फसलों में न सिर्फ उत्पादकता, बल्कि गुणवत्ता, निर्यात और किसानों की आय—तीनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
चित्र सौजन्य सोशल मीडिया ICAR

