प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आधुनिक मत्स्य अवसंरचना का विस्तार, पूर्वी भारत के लिए बनेगा ज्ञान और तकनीकी सहायता का नया केंद्र
पटना/भोजपुर, – बिहार के मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भोजपुर स्थित वनसौर मत्स्य बीज फार्म में 31.21 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाले इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क की आधारशिला रखी। साथ ही पटना में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के क्षेत्रीय केंद्र का उद्घाटन किया गया।
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इन दोनों परियोजनाओं को देश की ब्लू इकोनॉमी (नीली अर्थव्यवस्था) को मजबूत करने और बिहार में अंतर्देशीय मत्स्य पालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
आधुनिक तकनीक से लैस होगा इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत स्वीकृत यह इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क राज्य का अत्याधुनिक मत्स्य उत्पादन एवं प्रशिक्षण केंद्र होगा। इसमें कार्प और स्ट्राइप्ड कैटफिश हैचरी, ब्रूडर इन्क्यूबेशन इकाई, बायोफ्लॉक टैंक, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), मछली आहार निर्माण इकाई, जल गुणवत्ता एवं रोग निदान प्रयोगशाला, क्वारंटाइन सुविधा तथा 50 बिस्तरों वाला आवासीय प्रशिक्षण छात्रावास विकसित किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार इस परियोजना से गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता बढ़ेगी, आधुनिक तकनीकों का प्रसार होगा और किसानों की पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता कम होगी। इससे उत्पादन लागत घटेगी तथा मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि होगी।
पूर्वी भारत के मत्स्य विकास का नोडल केंद्र बनेगा पटना
पटना में स्थापित एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र बिहार सहित पूर्वी भारत के राज्यों के लिए तकनीकी मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण, परियोजना निर्माण, डिजिटल विस्तार सेवाओं और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमुख केंद्र बनेगा।
यह केंद्र बायोफ्लॉक, आरएएस, केज कल्चर और प्रिसिजन एक्वाकल्चर जैसी आधुनिक प्रणालियों को बढ़ावा देगा। साथ ही मत्स्य सहकारी समितियों, उद्यमियों और मछुआरों को निरंतर तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगा।
बिहार की मत्स्य क्रांति को मिलेगा नया बल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि दोनों परियोजनाएं बिहार के मत्स्य क्षेत्र के भविष्य में प्रत्यक्ष निवेश हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में जहां बिहार का मत्स्य उत्पादन 3.18 लाख टन था, वहीं वर्ष 2025 तक यह बढ़कर 10.2 लाख टन से अधिक हो गया है। यह वृद्धि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए गए निरंतर निवेश तथा नीतिगत समर्थन का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि नए क्षेत्रीय केंद्र के माध्यम से प्रशिक्षण, मूल्य संवर्धन, निर्यातोन्मुख मत्स्य पालन और उद्यमिता विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
झारखंड और नेपाल के बाजारों पर भी नजर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में अंतर्देशीय मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। राज्य सरकार आधुनिक अवसंरचना, तकनीकी नवाचार और संस्थागत सशक्तीकरण के माध्यम से इस क्षेत्र को नई पहचान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि झारखंड और नेपाल जैसे बड़े बाजार बिहार के मत्स्य उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उपभोक्ताओं की बदलती मांग के अनुरूप बोनलेस और उच्च मूल्य वाली मछलियों के उत्पादन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि भोजपुर का इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क भविष्य में इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित किया जाएगा।
900 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश, चौथे स्थान पर पहुंचा बिहार
भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलाक्ष लिक्खी ने बताया कि पिछले एक दशक में बिहार को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और ब्लू रिवोल्यूशन कार्यक्रमों के तहत लगभग 900 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ है। इनमें से करीब 600 करोड़ रुपये केवल पीएमएमएसवाई के अंतर्गत स्वीकृत किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पटना में क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना से प्रशिक्षण, डीपीआर निर्माण और परियोजना सहायता जैसी सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी, जिससे बिहार देश का अग्रणी अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
बिहार के पास है विशाल जलीय संसाधन आधार
बिहार के पास 1.22 लाख हेक्टेयर से अधिक तालाब और पोखर, 9.5 लाख हेक्टेयर बाढ़ प्रभावित जल क्षेत्र एवं वेटलैंड, 64 हजार हेक्टेयर जलाशय तथा 21 हजार किलोमीटर से अधिक नदियां और नहरें हैं। यही कारण है कि राज्य को देश के सबसे संभावनाशील अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन क्षेत्रों में गिना जाता है।
वर्ष 2014-15 में बिहार का मत्स्य उत्पादन 4.79 लाख मीट्रिक टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 10.28 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। इसके साथ ही बिहार देश का चौथा सबसे बड़ा अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादक राज्य बन चुका है और प्रतिवर्ष लगभग 89,600 मीट्रिक टन मछली पड़ोसी राज्यों को आपूर्ति कर रहा है।
मत्स्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क और एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र मिलकर उत्पादन से लेकर प्रशिक्षण, तकनीक, मूल्य संवर्धन और बाजार तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करेंगे। इससे बिहार में रोजगार सृजन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति और मत्स्य पालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। राज्य का मत्स्य क्षेत्र अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक तकनीक और निर्यात आधारित विकास मॉडल की ओर तेजी से बढ़ेगा।

