खजूर के मूल्य संवर्धन से बढ़ेगी किसानों की आय, जैसलमेर में उद्यमिता विकास पर विशेष प्रशिक्षण
जैसलमेर। राजस्थान के जैसलमेर जिले में खजूर उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण स्तर पर कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), पोकरण द्वारा “खजूर में मूल्य संवर्धन एवं उद्यमिता विकास” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन लाठी ग्राम पंचायत के लोहटा गांव में किया गया। कार्यक्रम में किसानों, ग्रामीण युवाओं और महिला प्रतिभागियों को खजूर प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, पोकरण के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने कहा कि जैसलमेर की शुष्क एवं गर्म जलवायु, कम वर्षा, रेतीली भूमि और भरपूर धूप खजूर की खेती के लिए बेहद उपयुक्त है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में जिले में खजूर का क्षेत्रफल और उत्पादन तेजी से बढ़ा है, जिससे यह किसानों के लिए एक लाभकारी नकदी फसल के रूप में उभर रही है।
डॉ. प्रसाद ने कहा कि किसान यदि केवल ताजा खजूर बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण कर मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करें, तो उन्हें बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त होगा और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने किसानों को कृषि आधारित लघु उद्योगों से जुड़ने और स्थानीय स्तर पर ब्रांड विकसित करने की भी सलाह दी।
खजूर से बन सकते हैं कई लाभकारी उत्पाद
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि खजूर से जैम, सिरप, पेस्ट, चटनी, स्क्वैश, कैंडी, लड्डू, कुकीज़, एनर्जी बार, खजूर पाउडर सहित कई पौष्टिक एवं मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इन उत्पादों की बाजार में वर्षभर मांग बनी रहती है और इनका भंडारण व परिवहन भी अपेक्षाकृत आसान होता है।
उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
‘जैसलमेर डेट्स’ को मिल सकती है नई पहचान
कार्यक्रम में डॉ. रामनिवास ने किसानों से खजूर उत्पादन की बढ़ती संभावनाओं का लाभ उठाने और मूल्य संवर्धन को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि “जैसलमेर डेट्स” को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक विशिष्ट पहचान दिलाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योगों के विकास को नई दिशा मिलेगी।
प्रसंस्करण से लेकर ऑनलाइन मार्केटिंग तक की दी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को खजूर के चयन, सफाई, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा मानकों, आकर्षक पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग और विपणन की व्यावहारिक जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों का प्रदर्शन कर उनके निर्माण की तकनीकों से भी अवगत कराया।
इसके अलावा किसानों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ई-कॉमर्स और ऑनलाइन बिक्री के अवसरों, उद्यमिता विकास, वित्तीय सहायता योजनाओं तथा कृषि आधारित स्टार्टअप की संभावनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई।
कृषि विशेषज्ञों का मानना
विशेषज्ञों के अनुसार, खजूर के मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर जैसलमेर जैसे शुष्क क्षेत्रों में किसानों की आय दोगुनी करने, ग्रामीण रोजगार सृजित करने और कृषि निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं। खजूर आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग भविष्य में इस क्षेत्र को कृषि-उद्योग का नया केंद्र बना सकती है।


























