स्वस्थ मिट्टी से सुरक्षित होगा कृषि का भविष्य, गो-आधारित प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर!
वाराणसी। कृषि क्षेत्र को टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाने के उद्देश्य से ICAR-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी में “खेत बचाओ अभियान, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं प्राकृतिक खेती” विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम में वाराणसी मंडल के आयुक्त एस. राजलिंगम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मिट्टी की सेहत बचाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग तथा प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का स्वरूप देना समय की आवश्यकता है।
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मिट्टी की सेहत सुधरेगी तो विकसित भारत का सपना होगा साकार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए IIVR के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला स्वस्थ मिट्टी है। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा संचालित संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसके तहत किसानों ने नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश उर्वरकों की बड़ी मात्रा में बचत की है। यह बचत लगभग 18.7 टन यूरिया के बराबर आंकी गई है।
उन्होंने किसानों से उर्वरक प्रबंधन के वैज्ञानिक 4R सिद्धांत—सही स्रोत (Right Source), सही मात्रा (Right Dose), सही समय (Right Time) और सही विधि (Right Method)—को अपनाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि इससे उत्पादन लागत घटेगी, मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और पर्यावरणीय प्रदूषण में भी कमी आएगी।
गो-आधारित प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी उत्पादकता और किसानों की आय
बंसी गीर गोशाला के संस्थापक गोपाल भाई सुतारिया ने कहा कि भारत की पारंपरिक गो-संस्कृति केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को सफल बनाने के लिए गो-आधारित कृषि मॉडल को बढ़ावा देना आवश्यक है।
उन्होंने खेतों की मेढ़ पर नीम और नैपियर घास लगाने की सलाह देते हुए बताया कि इससे पशुओं के लिए चारा उपलब्ध होता है, मिट्टी संरक्षण होता है और प्राकृतिक खेती की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उनके अनुसार कृषि, आयुर्वेद और शिक्षा के केंद्र में गो-संवर्धन को स्थापित करके ही टिकाऊ विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
FPO और उद्यमिता से मिलेगा प्राकृतिक खेती को बाजार
बैठक में डॉ. योगेश गोंकर तथा मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह ने प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया।
विशेषज्ञों ने कहा कि सब्जी आधारित उद्यमिता, मूल्य संवर्धन और संगठित विपणन के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। FPO किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक एक मजबूत मंच उपलब्ध करा सकते हैं।
650 से अधिक किसान और वैज्ञानिक हुए शामिल
कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित प्रगतिशील किसान चंद्रशेखर सिंह, कृषि विशेषज्ञ वैज्ञानिक, उप निदेशक कृषि अमित कुमार जायसवाल, जिला कृषि अधिकारी संगम मौर्या, जिला उद्यान अधिकारी सुभाष कुमार सहित 20 से अधिक किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में 650 से अधिक प्रगतिशील किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक प्रबंधन पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीरज सिंह ने किया।
खेत बचाओ अभियान को मिलेगा नया विस्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसे में संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक विकल्पों को बढ़ावा और गो-आधारित प्राकृतिक खेती कृषि को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। “खेत बचाओ अभियान” किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ कृषि लागत कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रहा है।
संकल्प
“स्वस्थ मिट्टी – स्वस्थ फसल – स्वस्थ किसान – समृद्ध भारत”

