डिजिटल क्रांति से बदलती खेती: दक्षिण-पूर्व एशिया के छोटे किसानों के लिए नई उम्मीद!
Farming is no longer traditional! 🌾📱
From real-time weather updates to direct market access, digital tools are transforming farmers’ income across Southeast Asia.
Is this the future of agriculture?
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दक्षिण-पूर्व एशिया के लगभग 10 करोड़ छोटे किसान, जो क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं, लंबे समय से बाजार, वित्तीय सेवाओं, मौसम की जानकारी और तकनीकी सलाह तक सीमित पहुंच जैसी चुनौतियों से जूझते रहे हैं। लेकिन अब डिजिटल तकनीकों ने इस परिदृश्य को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है।
क्षेत्र में 75% से अधिक आबादी के पास स्मार्टफोन होने के कारण खेती के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़ रहे हैं, उन्हें समय पर मौसम संबंधी जानकारी दे रहे हैं और आधुनिक कृषि सलाह तक उनकी पहुंच आसान बना रहे हैं।
डिजिटल समाधान से सशक्त हो रहे किसान
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, डिजिटल फाइनेंस और क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर जैसी तकनीकें कृषि मूल्य श्रृंखला को अधिक कुशल और समावेशी बना रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये तकनीकें किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर नहीं बनाई जातीं, तो उनका प्रभाव सीमित रह सकता है।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए International Fund for Agricultural Development (IFAD) ने 2023 में ‘SEEDS’ (Smallholder Economic Empowerment through Digital Solutions) परियोजना शुरू की। इस पहल को Ministry of Agriculture, Food and Rural Affairs का सहयोग मिला।
तीन देशों में दिखा असर

कंबोडिया, फिलीपींस और वियतनाम में लागू इस परियोजना ने छोटे किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़कर उनकी आय और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद की। स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए समाधानों ने किसानों को आधुनिक खेती और बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रशिक्षण और नवाचार पर जोर
2025 के मध्य तक इस परियोजना ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। ‘डिजिटल एग्रीकल्चर एरोहेड्स’—जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा शामिल थे—को 28 स्थानों पर तैनात किया गया। ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स मॉडल के जरिए करीब 12,000 किसानों तक डिजिटल ज्ञान पहुंचाया गया।
इस दौरान 14 डिजिटल ऐप भी लॉन्च किए गए। कंबोडिया में Chamka ऐप किसानों को उत्पादन प्रबंधन और बाजार से जोड़ रहा है, जबकि फिलीपींस में GoEden और Mayani जैसे प्लेटफॉर्म सहकारी समितियों को सीधे खरीदारों और शहरी उपभोक्ताओं से जोड़ रहे हैं।
पुराने संकटों का आधुनिक समाधान
डिजिटल एग्रीकल्चर अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बनती जा रही है। यह किसानों को रियल-टाइम मौसम अपडेट, कीट प्रबंधन अलर्ट, डिजिटल वित्तीय सेवाएं और ट्रेसबिलिटी जैसी सुविधाएं देता है, जिससे उन्हें बेहतर कीमत और बाजार मिल पाता है।
परियोजना का समापन, लेकिन असर जारी
अप्रैल 2026 में Grow Asia और एशिया पार्टनरशिप फॉर डेवलपमेंट ऑफ ह्यूमन रिसोर्सेज इन रूरल एशिया द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी के साथ SEEDS परियोजना का औपचारिक समापन हुआ।
हालांकि परियोजना खत्म हो चुकी है, लेकिन इसका प्रभाव 12,000 किसानों, 12 किसान संगठनों और तीन देशों में लगातार बढ़ता रहेगा। यह पहल एशिया-प्रशांत क्षेत्र को समावेशी कृषि तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने की IFAD की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
आगे की राह
अब फोकस इस पहल के दायरे को और बढ़ाने पर है, ताकि हजारों और किसान डिजिटल क्रांति का लाभ उठा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि सही रणनीति और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तकनीक अपनाने से डिजिटल खेती भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
Source: IFAD, Photo graphics
