“कृषक कल्याण वर्ष: अब हर समस्या का तुरंत समाधान”
भोपाल -मध्यप्रदेश में किसानों को केंद्र में रखकर सरकार ने “कृषक कल्याण वर्ष 2026” के तहत व्यापक और बहुआयामी पहल की शुरुआत की है। राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला में मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश का हर अधिकारी और कर्मचारी “कृषि कर्मयोगी” बनकर किसानों के हित में समर्पित भाव से कार्य करे। उन्होंने कहा कि अब खेती को पारंपरिक दायरे से निकालकर तकनीक, नवाचार और समन्वित प्रयासों के जरिए लाभकारी व्यवसाय बनाया जा रहा है।
डिजिटल और संस्थागत सुधारों की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों के सशक्तिकरण के लिए तीन महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की—मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड, पैक्स समितियों में सदस्यता वृद्धि महाअभियान और टोल फ्री सीएम किसान हेल्पलाइन (155253)।
यह हेल्पलाइन किसानों को फसल, बाजार, मौसम और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी तुरंत उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने स्वयं हेल्पलाइन से जुड़कर इसकी कार्यप्रणाली का परीक्षण किया और कहा कि यह किसानों और शासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करेगी।
16 विभागों का समन्वित मॉडल
मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य पालन सहित कुल 16 विभाग मिलकर किसानों की आय बढ़ाने और समस्याओं के समाधान के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे केवल योजनाओं का क्रियान्वयन न करें, बल्कि नई तकनीकों और प्रयोगों को अपनाकर किसानों को वास्तविक लाभ पहुंचाएं।
डेयरी और पशुपालन में बढ़ी आय
प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि National Dairy Development Board के सहयोग से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई है।
इसका सीधा फायदा किसानों को मिला है और अब उन्हें प्रति लीटर दूध पर पहले की तुलना में 7 से 8 रुपये अधिक मूल्य मिल रहा है। उन्होंने इसे “प्रदेश में उभरती दुग्ध क्रांति” बताया।
सिंचाई विस्तार से खेती में बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले रबी फसलें वर्षा पर निर्भर थीं, लेकिन अब नहरों और बिजली सुविधाओं के विस्तार से खेत-खेत तक सिंचाई पहुंच रही है।
इस बदलाव का असर यह है कि किसान अब एक वर्ष में दो के बजाय तीन फसलें ले पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
एमएसपी और खरीदी व्यवस्था पर जोर
सरकार किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में इस वर्ष गेहूं की खरीदी 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है।
इसके साथ ही उड़द जैसी फसलों पर भी समर्थन मूल्य के साथ खरीदी की शुरुआत की गई है, जिससे दलहन उत्पादक किसानों को राहत मिली है।
एग्री वेस्ट मैनेजमेंट से अतिरिक्त आमदनी
कृषि अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अब नरवाई, मक्के के डंठल और भूसे का उपयोग कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
यह पहल न केवल किसानों की कमाई बढ़ा रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
नदी जोड़ो परियोजनाओं से सिंचाई को बल
मुख्यमंत्री ने कहा कि Narendra Modi के मार्गदर्शन में केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) जैसी नदी जोड़ो परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
इन परियोजनाओं से मध्यप्रदेश और राजस्थान के कई जिलों में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और जल संकट से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं में केंद्र सरकार द्वारा 90 प्रतिशत वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है।
युवाओं को खेती से जोड़ने की पहल
मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीकों के साथ खेती को अपनाएं और इसे लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखें।
उन्होंने Israel का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों और कम वर्षा के बावजूद वहां तकनीक आधारित खेती से उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा रहे हैं।
जमीनी स्तर तक पहुंचाने की रणनीति
कार्यशाला में प्रदेश के 55 जिलों से 1600 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि हर जिले में कृषि मेले आयोजित किए जा रहे हैं, जहां किसानों को नई तकनीकों और योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।
वहीं, कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
नीतियों से लेकर जमीन तक असर की चुनौती
मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल दर्शाती है कि अब कृषि क्षेत्र में केवल योजनाएं बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म और समन्वित प्रयासों के जरिए जमीनी स्तर तक पहुंचाना प्राथमिकता है।
हालांकि, असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये योजनाएं कितनी तेजी से किसानों तक पहुंचती हैं और उनकी आय में वास्तविक वृद्धि कितनी होती है।


























