इंटीग्रेटेड फार्मिंग, एग्री क्लीनिक, मशीन बैंक, वैल्यू एडिशन और दलहन-तिलहन मिशन पर जोर; किसानों से कहा—“यह सभा नहीं, खेती की क्लास है”
विदिशा (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के बेरखेड़ी जट्टू गांव में रविवार को कृषि विकास और किसान सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां प्रस्तावित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) का भूमिपूजन करते हुए इसे देश का मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र बनाने की घोषणा की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को उन्होंने राजनीतिक मंच के बजाय किसानों की “पाठशाला” का स्वरूप दिया, जहां वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों और किसानों के बीच सीधे संवाद के माध्यम से आधुनिक खेती का रोडमैप प्रस्तुत किया गया।
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कार्यक्रम में चौहान ने कहा कि खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए अब केवल परंपरागत तरीकों पर निर्भर रहने की बजाय विज्ञान, तकनीक और नवाचार को खेत तक पहुंचाना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केंद्र केवल भवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला, प्रशिक्षण केंद्र और कृषि नवाचारों का हब बनेगा।
49 एकड़ में विकसित होगा आधुनिक कृषि ज्ञान केंद्र
बेरखेड़ी जट्टू में बनने वाला कृषि विज्ञान केंद्र लगभग 49 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भवन निर्माण पूरा होने का इंतजार नहीं किया जाएगा, बल्कि इसी खरीफ सीजन से खेतों में प्रदर्शन प्लॉट विकसित कर किसानों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यहां उन्नत किस्मों, जल संरक्षण तकनीकों, संतुलित पोषण प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया जाएगा। किसान केवल पुस्तकीय जानकारी नहीं, बल्कि खेत में प्रत्यक्ष रूप से तकनीकों को देखकर सीख सकेंगे।
‘सभा नहीं, खेती की क्लास है’
कार्यक्रम के दौरान चौहान का अंदाज एक शिक्षक जैसा दिखाई दिया। उन्होंने मंच से कहा कि यहां आए किसान दर्शक नहीं, बल्कि विद्यार्थी हैं। इसलिए औपचारिक भाषणों और स्वागत कार्यक्रमों के बजाय कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को सीमित समय में उपयोगी जानकारी देने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि किसानों को बसों में भरकर नहीं लाया गया है, बल्कि जो सीखने और खेती में बदलाव लाने की इच्छा रखता है, वही यहां पहुंचा है। ऐसे में कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि किसानों को नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
छोटी जोत में भी बढ़ सकती है आय
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में कृषि भूमि का लगातार विभाजन हो रहा है और अधिकांश किसान छोटे एवं सीमांत वर्ग में आते हैं। ऐसे में कम भूमि पर अधिक आय प्राप्त करने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम को अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र में ऐसे मॉडल विकसित किए जाएंगे, जिनमें एक ही खेत में अनाज, दलहन, तिलहन, फल-सब्जियां, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियों को जोड़ा जाएगा। इससे किसानों की आय के अनेक स्रोत विकसित होंगे और जोखिम भी कम होगा।
चौहान ने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से यदि एक हेक्टेयर या ढाई एकड़ भूमि का उपयोग किया जाए तो किसान परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास के लिए बनेगा कृषि रोडमैप
कृषि मंत्री ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र केवल विदिशा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा। इन क्षेत्रों की मिट्टी, जल उपलब्धता और जलवायु परिस्थितियों के आधार पर वैज्ञानिक खेती का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा।
इसके तहत यह निर्धारित किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल अधिक लाभकारी होगी, किस प्रकार की खेती से लागत कम और उत्पादन अधिक होगा तथा किस तरह किसान बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन कर बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं।
‘खेत बचाओ अभियान’ से मिट्टी संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम में चौहान ने किसानों से धरती की उर्वरता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग मिट्टी की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को मिट्टी परीक्षण, सॉइल हेल्थ कार्ड और संतुलित पोषण प्रबंधन के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही प्राकृतिक खेती और जैविक विकल्पों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
उनका कहना था कि खेती की वास्तविक ताकत मिट्टी है और यदि मिट्टी स्वस्थ नहीं रहेगी तो उत्पादन क्षमता भी प्रभावित होगी। इसलिए वैज्ञानिक खेती का पहला कदम मिट्टी की सेहत सुधारना होना चाहिए।
किसानों के लिए बनेगा ‘फसल अस्पताल’
नए कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने के लिए एग्री क्लीनिक स्थापित किया जाएगा। इसे फसलों का अस्पताल कहा जा रहा है।
यहां किसान अपनी फसल, मिट्टी या पौधों के नमूने लेकर आएंगे और वैज्ञानिक रोग, कीट या पोषक तत्वों की कमी की पहचान कर उपचार बताएंगे। इससे किसानों को समय पर समाधान मिलेगा और फसल नुकसान कम होगा।
इसके अलावा किसानों को 155261 किसान हेल्पलाइन तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराई जाएगी। मोबाइल एप आधारित सेवाओं से खेत में मौजूद रहते हुए भी किसान अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगे।
नकली खाद और बीज बेचने वालों पर सख्ती
केंद्रीय मंत्री ने नकली खाद, बीज और कीटनाशकों की समस्या को किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से खरीदारी करें, पक्का बिल लें और उत्पादों की प्रामाणिकता की जांच करें। कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को बीज चयन, बीज उपचार और गुणवत्तापूर्ण नर्सरी प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
मशीन बैंक से छोटे किसानों को मिलेगा लाभ
खेती में बढ़ती लागत और महंगे कृषि यंत्रों की समस्या को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र में मशीन बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
इन केंद्रों से किसान लेजर लैंड लेवलर, डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) मशीन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम सहित अन्य आधुनिक उपकरण किराए पर ले सकेंगे। इससे छोटे किसानों को भी उन्नत तकनीक का लाभ मिलेगा और उत्पादन लागत में कमी आएगी।
कार्यक्रम के बाद किसानों को इन तकनीकों का खेत में लाइव प्रदर्शन भी दिखाया गया।
प्रोसेसिंग और स्टार्टअप पर विशेष ध्यान
चौहान ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाने से किसानों की आय नहीं बढ़ेगी, बल्कि कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन भी आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से टमाटर, फल, सब्जियों, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण की तकनीक सिखाई जाएगी। किसानों और ग्रामीण युवाओं को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन की जानकारी भी दी जाएगी।
इसके साथ ही मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, डेयरी और पोल्ट्री आधारित कृषि स्टार्टअप को भी प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें।
दलहन-तिलहन मिशन को मिलेगी गति
कार्यक्रम में दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। चौहान ने कहा कि देश को खाद्य तेलों और दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे और प्रदर्शन प्लॉटों के माध्यम से नई तकनीकों का प्रसार किया जाएगा। साथ ही अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद सुनिश्चित करने का भरोसा भी दिया गया।
जहां उत्पादन अधिक होगा, वहां प्रसंस्करण इकाइयों और दाल मिलों की स्थापना के लिए प्रोत्साहन और सब्सिडी उपलब्ध कराने की भी बात कही गई।
विकसित भारत 2047 के लिए ‘नॉलेज हब’ बनेंगे KVK
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र भविष्य में केवल विस्तार संस्थान नहीं, बल्कि किसानों के लिए ज्ञान और नवाचार के केंद्र बनेंगे।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, निजी क्षेत्र और किसानों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है।
डॉ. जाट ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम, प्राकृतिक खेती, जल बजट आधारित फसल प्रणाली, कार्बन न्यूट्रैलिटी और मांग आधारित कृषि अनुसंधान को भविष्य की कृषि विकास रणनीति का आधार बताया।
सारांश
विदिशा में प्रस्तावित कृषि विज्ञान केंद्र केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में बदलाव का व्यापक मॉडल बन सकता है। यदि यहां प्रस्तावित एग्री क्लीनिक, मशीन बैंक, इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल, वैल्यू एडिशन प्रशिक्षण और डिजिटल सलाह सेवाएं प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो यह केंद्र मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकता है। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने और खेती को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में यह पहल दूरगामी प्रभाव छोड़ सकती है।

