विकसित भारत 2047 के लिए तैयार होंगे भविष्य के वैज्ञानिक, IARI की नई पहल!

IARI में ‘ऑरेंज ब्रिज’ कार्यक्रम का आयोजन, विकसित भारत 2047 के लिए वैज्ञानिकों में नवाचार और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर!

नई दिल्ली, –भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली में युवा एवं मध्य-कैरियर वैज्ञानिकों की रचनात्मक क्षमता, नवाचार कौशल और बहु-विषयक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “ऑरेंज ब्रिज” (Orange Bridge) नामक एक विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन आईसीएआर-आईएआरआई के जैव रसायन (बायोकेमिस्ट्री) प्रभाग द्वारा सोसाइटी फॉर प्लांट बायोकैमिस्ट्री एंड बायोटेक्नोलॉजी (SPBB) तथा बिल्डिंग अपॉर्च्युनिटीज एंड ड्राइविंग होप (BODH) टीम के सहयोग से किया गया।

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इस अभिनव प्रशिक्षण कार्यक्रम में देशभर से आए 25 युवा एवं मध्य-कैरियर वैज्ञानिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे समाज और अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी परियोजनाओं में बदलने की क्षमता विकसित करना था।

रचनात्मक अर्थव्यवस्था से वैज्ञानिकों को जोड़ने की पहल

ऑरेंज ब्रिज’ कार्यक्रम को रचनात्मक अर्थव्यवस्था (Creative Economy) की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया। रचनात्मक अर्थव्यवस्था वह मॉडल है जिसमें ज्ञान, नवाचार, बौद्धिक संपदा और रचनात्मकता को आर्थिक एवं सामाजिक मूल्य में परिवर्तित किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ नेतृत्व, संवाद कौशल और नवाचार प्रबंधन जैसी क्षमताओं का विकास भी आवश्यक है।

वैज्ञानिक नेतृत्व और नेटवर्किंग पर विशेष जोर

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में आईसीएआर के पूर्व उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) एवं SPBB के अध्यक्ष डॉ. टी.आर. शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भविष्य के वैज्ञानिक नेतृत्व के लिए सहयोग, नेटवर्किंग और प्रभावी संचार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

वहीं, आईसीएआर-आईएआरआई के जैव रसायन प्रभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल वैज्ञानिकों को नई सोच और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए समन्वयकों और प्रतिभागियों को बधाई दी।

विचार से परियोजना तक का पूरा प्रशिक्षण

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को परियोजना की परिकल्पना (Project Ideation), परियोजना प्रस्ताव तैयार करना, प्रभावी टीम निर्माण, अनुदान (Grant) प्राप्त करने के लिए प्रस्तुतीकरण (Pitching) और परियोजना क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

आईआईटी, सीएसआईआर और आईसीएआर संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने गतिविधि-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण पद्धति के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर भी काम करने का अवसर मिला, जिससे वे किसी वैज्ञानिक विचार को फंडिंग योग्य और क्रियान्वित परियोजना में बदलने की पूरी प्रक्रिया को समझ सके।

विकसित भारत 2047 के लिए भविष्य के वैज्ञानिक तैयार करने की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में वैज्ञानिकों के लिए केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्हें रचनात्मक सोच, परियोजना प्रबंधन, नेतृत्व, संवाद कौशल और नवाचार क्षमता जैसी दक्षताओं से भी लैस होना होगा। ‘ऑरेंज ब्रिज’ कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

कार्यक्रम के समापन सत्र में अमेरिकन केमिकल सोसाइटी की ग्लोबल स्ट्रेटजी प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. दीक्षा गुप्ता मुख्य अतिथि रहीं। उन्होंने वैज्ञानिक करियर में वैश्विक दृष्टिकोण, रणनीतिक सोच और प्रभावी वैज्ञानिक संचार के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी 25 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. वेदा कृष्णन ने किया, जबकि डॉ. सुनील वरवटे प्रशिक्षण सह-समन्वयक रहे।

विज्ञान, नवाचार और समाज के बीच बनेगा मजबूत सेतु

आईसीएआर-आईएआरआई के अनुसार, ‘ऑरेंज ब्रिज’ कार्यक्रम का उद्देश्य विज्ञान, नवाचार और सामाजिक प्रभाव के बीच एक मजबूत सेतु तैयार करना है। यह पहल न केवल वैज्ञानिकों की पेशेवर क्षमताओं को मजबूत करेगी, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों का समाधान विकसित करने के लिए भी तैयार करेगी। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में ऐसे कार्यक्रमों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।