डेयरी सेक्टर से लद्दाख को नई पहचान, बाजार तक पहुंचेगा दूध!

सहकारिता मॉडल से लद्दाख में डेयरी क्रांति की शुरुआत, महिलाओं को मिलेगा आत्मनिर्भरता का नया रास्ता!

लेह/करगिल  –लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में डेयरी सेक्टर को नई दिशा देने की कवायद तेज हो गई है। लेह में डेयरी विकास से जुड़ी कई अहम पहलों का शुभारंभ किया गया, जिसने लद्दाख के कृषि और पशुपालन आधारित अर्थतंत्र को नई दिशा देने का संकेत दिया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। उनके साथ केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh, राज्य मंत्री S. P. Singh Baghel, George Kurian और लद्दाख के उपराज्यपाल Vinay Kumar Saxena सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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करगिल में 10,000 लीटर क्षमता वाला डेयरी प्लांट

करगिल में करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 लीटर प्रतिदिन दूध प्रोसेसिंग क्षमता वाले प्लांट का शिलान्यास किया गया। ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद इस परियोजना को स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है।
सरकार का फोकस खासतौर पर महिलाओं पर है—यह प्लांट ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का स्थायी स्रोत बन सकता है, जिससे वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगी।

डिजिटल पारदर्शिता: EMCS ऐप लॉन्च

डेयरी सेक्टर को टेक्नोलॉजी से जोड़ते हुए EMCS ऐप भी लॉन्च किया गया। इस ऐप के जरिए दुग्ध उत्पादक अब अपने दूध की मात्रा, भुगतान और हिसाब-किताब को एक ही प्लेटफॉर्म पर पारदर्शी तरीके से देख सकेंगे। इससे भरोसा और दक्षता दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

बाजार तक पहुंच: मदर डेयरी से समझौता

लद्दाख मिल्क फेडरेशन और Mother Dairy के बीच हुए समझौते से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार मिलने का रास्ता खुल गया है। इससे ऑर्गेनिक दूध, घी और अन्य उत्पाद सीधे बड़े शहरों तक पहुंच सकेंगे।

सेना और ITBP होंगे बड़े उपभोक्ता

लद्दाख में तैनात सेना और आईटीबीपी जैसे बल डेयरी उत्पादों के बड़े खरीदार बन सकते हैं। सीमा पर तैनात हजारों जवानों की जरूरतें स्थानीय स्तर पर पूरी होने से लॉजिस्टिक्स आसान होगा और स्थानीय उत्पादन को स्थायी मांग मिलेगी।

भविष्य की बड़ी योजना: 50,000 लीटर प्लांट

लेह में 70 करोड़ रुपये की लागत से 50,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला नया प्लांट स्थापित करने की योजना है। इसके साथ ही हर साल बेहतर नस्ल के लगभग 500 पशु उपलब्ध कराने की तैयारी है, ताकि उत्पादन तेजी से बढ़ सके।

दूध उत्पादन में देश की बड़ी छलांग

सरकार के अनुसार, भारत का दूध उत्पादन 2014-15 के 146 मिलियन टन से बढ़कर अब 248 मिलियन टन हो गया है—करीब 70% की वृद्धि। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता भी 307 ग्राम से बढ़कर 485 ग्राम तक पहुंच गई है।

सहकारिता का विस्तार: गांव-गांव तक नेटवर्क

लद्दाख में डेयरी नेटवर्क अब 28 गांवों और लगभग 1700 दुग्ध उत्पादकों तक पहुंच चुका है। लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इसे और व्यापक बनाया जाए, ताकि हर संभावित गांव को इससे जोड़ा जा सके।

पश्मीना, ऑर्गेनिक और शहद पर भी फोकस

डेयरी के साथ-साथ पश्मीना, ऑर्गेनिक उत्पादों और शहद के लिए भी सहकारी संस्थाएं बनाने की योजना है। इससे लद्दाख की पारंपरिक अर्थव्यवस्था को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाएगा।

प्रदर्शनी में दिखा ‘व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0’ का विजन

कार्यक्रम में विभिन्न प्रदर्शनी स्टॉल्स का अवलोकन किया गया। National Dairy Development Board (NDDB) के स्टॉल में ‘White Revolution 2.0’, सहकारी ढांचे को मजबूत करने और डिजिटल तकनीकों जैसे AMCS ऐप को प्रस्तुत किया गया।
लद्दाख मिल्क फेडरेशन के स्टॉल में पारदर्शी दुग्ध संकलन, बेहतर मूल्य निर्धारण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के जरिए हुए विस्तार को दर्शाया गया।

NDDB की सहायक कंपनी IDMC Limited ने सोलर मिल्क कूलिंग यूनिट और आधुनिक डेयरी उपकरणों का प्रदर्शन किया, जबकि Mother Dairy ने अपने फार्म-टू-कंज्यूमर मॉडल और लद्दाख विस्तार योजना को सामने रखा।
इसके अलावा ‘पश्मीना: लद्दाख की विरासत’ और कृषि-बागवानी स्टॉल्स में ऑर्गेनिक उत्पाद और जलवायु अनुकूल खेती की झलक दिखी।

UT बनने के बाद तेज हुआ विकास

2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख में इंफ्रास्ट्रक्चर और बजट में बड़ा उछाल देखा गया है। पहले जहां करीब 1,000 करोड़ रुपये खर्च होते थे, अब यह बढ़कर लगभग 6,000 करोड़ रुपये हो गया है।
सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार हुआ है।

सारांश

लद्दाख में डेयरी और सहकारिता मॉडल का यह नया प्रयोग सिर्फ एक आर्थिक पहल नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की शुरुआत है। पहाड़ों में रहने वाले समुदायों, खासकर महिलाओं के लिए यह आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि योजनाएं तय समय पर लागू होती हैं, तो लद्दाख आने वाले वर्षों में देश के डेयरी मानचित्र पर एक उभरता हुआ केंद्र बन सकता है।