भण्डारण व्यवस्था से कृषि को मिलेगा बढ़ावा
जयपुर। किसानों और व्यापारियों को कृषि उपज के सुरक्षित भण्डारण के लिए राजस्थान सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित राजस्थान राज्य भण्डार व्यवस्था निगम (आरडब्ल्यूसीएस) के 97 भण्डारगृहों में 16 लाख 53 हजार मीट्रिक टन की भण्डारण क्षमता खाद्यान्न के सुरक्षित संग्रहण के लिए उपलब्ध है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!निगम के संयुक्त निदेशक मदन लाल तेली ने जानकारी दी कि कोई भी किसान या व्यापारी स्थानीय भण्डारगृह प्रशासन से संपर्क कर इन सुविधाओं का लाभ ले सकता है। उन्होंने बताया कि भण्डारण क्षमता की अधिकतम उपयोगिता सुनिश्चित करने तथा निगम की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए भण्डारगृहों का व्यावसायिक उपयोग भी किया जा रहा है।
भण्डारगृहों को किराये पर देने की पहल

राज्य सरकार द्वारा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन एक्ट, 1962 के तहत भण्डारगृहों को व्यावसायिक इकाइयों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी क्रम में वर्ष 2023 के फरवरी माह में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जिसके अंतर्गत 16 भण्डारगृहों की आंशिक भण्डारण क्षमता को राजस्थान स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (RSBCL) और राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स (RSGSM) को दस वर्षों के लिए किराये पर देने हेतु एमओयू किया गया।
96.10% भण्डारण क्षमता खाद्यान्न के लिए आरक्षित
तेली ने बताया कि निगम की कुल भण्डारण क्षमता वर्तमान में 17.20 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें से 96.10% खाद्यान्न भण्डारण के लिए उपलब्ध है। केवल 3.86% क्षमता RSBCL और RSGSM को दी गई है—जिसमें क्रमशः 44,747 मीट्रिक टन (2.60%) और 21,753 मीट्रिक टन (1.26%) शामिल हैं।
एमओयू वाले भण्डारगृहों में 70% स्थान किसानों-व्यापारियों के लिए खुला
एमओयू के तहत जिन 14 भण्डारगृहों में आंशिक रूप से स्थान आरक्षित किया गया है, उनमें से 70% भण्डारण क्षमता अब भी किसानों और व्यापारियों के उपयोग हेतु खुली है। मदन लाल ने बताया कि बालोतरा स्थित भण्डारगृह में अब तक एजेंसियों को कोई आवंटन नहीं किया गया है। यहां कुल 3,600 मीट्रिक टन की क्षमता में से 2,400 मीट्रिक टन में किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंगफली व तिलहन संग्रहित है, जबकि शेष 1,200 मीट्रिक टन की क्षमता अन्य जमाकर्ताओं को उपलब्ध कराई गई है।
ब्यावर और सवाई माधोपुर में भी भण्डारण व्यवस्था सक्रिय
राज्य भण्डारगृह, ब्यावर में नैफेड द्वारा समर्थन मूल्य पर क्रय की गई तिलहन एवं मूंगफली को 1,800 मीट्रिक टन क्षमता में संग्रहित किया गया है। वहीं, सवाई माधोपुर में कुल 14,590 मीट्रिक टन में से 11,420 मीट्रिक टन क्षमता खाद्यान्न भण्डारण के लिए खुली है और 470 मीट्रिक टन में पहले ही किसान एवं व्यापारी संग्रहण कर रहे हैं। इस भण्डारगृह की 19% क्षमता RSBCL और RSGSM को आरक्षित की गई है।
सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—किसानों को उपज के सुरक्षित भण्डारण के माध्यम से सशक्त बनाना और कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देना।