भारत के कृषि निर्यात ने रचा नया कीर्तिमान, 11 वर्षों में 37% से अधिक की वृद्धि !!
नई दिल्ली। भारत का कृषि निर्यात देश की व्यापार-आधारित आर्थिक वृद्धि (Trade-Led Growth) का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2014-15 में 38.6 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर मौजूद कृषि निर्यात बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 53.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि भारतीय कृषि क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता, बेहतर गुणवत्ता मानकों और निर्यातोन्मुखी नीतियों का परिणाम मानी जा रही है।
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रणनीतिक नीतियों और बुनियादी ढांचे का मिला लाभ !!
पिछले एक दशक में केंद्र सरकार द्वारा कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अनेक रणनीतिक कदम उठाए गए हैं। आधुनिक लॉजिस्टिक्स, कोल्ड चेन नेटवर्क, गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं, ट्रेसबिलिटी सिस्टम और निर्यात अनुकूल बुनियादी ढांचे के विकास ने भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत किया है। इसके साथ ही नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच, व्यापारिक बाधाओं को कम करने और निर्यातकों को प्रोत्साहन देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं।
किसानों की आय बढ़ाने में निर्यात की अहम भूमिका !!
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि निर्यात में वृद्धि का सीधा लाभ किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होने के रूप में मिला है। फलों, सब्जियों, अनाज, मसालों, बासमती चावल, जैविक उत्पादों तथा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती वैश्विक मांग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की है। निर्यातोन्मुख कृषि उत्पादन के कारण किसानों को गुणवत्ता सुधार, वैल्यू एडिशन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहन मिला है।
एपीडा निभा रहा अग्रणी भूमिका !!
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) भारतीय कृषि निर्यात को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एपीडा किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), निर्यातकों और कृषि उद्यमों को जोड़कर मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता आश्वासन, बाजार विस्तार और निर्यात संवर्धन के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहा है। संस्था भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग और नए बाजारों में पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भी सक्रिय है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ता कृषि क्षेत्र !!
भारत सरकार के “विकसित भारत 2047” विजन के अनुरूप कृषि निर्यात क्षेत्र को और अधिक सशक्त, टिकाऊ तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के प्रयास जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान गति बरकरार रही तो आने वाले वर्षों में भारत विश्व कृषि व्यापार में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।
कृषि निर्यात में यह निरंतर वृद्धि न केवल देश की विदेशी मुद्रा आय को बढ़ा रही है, बल्कि किसानों की समृद्धि, ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण को भी नई दिशा दे रही है। भारत अब वैश्विक बाजार में एक भरोसेमंद कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है।
चित्र: प्रतीकात्मक
