ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन: कृषि सहयोग के नए युग की शुरुआत!

ब्रिक्स इंदौर घोषणा-पत्र 2026: भारत की अध्यक्षता में ग्लोबल कृषि सहयोग का नया अध्याय, छोटे किसानों से डिजिटल खेती तक बना साझा रोडमैप

इंदौर/नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक का समापन ऐतिहासिक ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के साथ हुआ। इस घोषणा-पत्र में खाद्य सुरक्षा, जलवायु-सहनीय कृषि, कृषि व्यापार, डिजिटल एग्रीकल्चर, प्राकृतिक खेती और किसानों की आय बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सदस्य देशों ने साझा प्रतिबद्धता जताई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह घोषणा-पत्र केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि किसानों को केंद्र में रखकर टिकाऊ और समृद्ध कृषि भविष्य की वैश्विक रूपरेखा है।

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दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है ब्रिक्स

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ब्रिक्स देशों के पास दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि है और वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन में भी इनकी हिस्सेदारी करीब 42 प्रतिशत है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा, पोषण और कृषि विकास से जुड़े मुद्दों पर इन देशों की सामूहिक सहमति वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।

उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक वैश्विक अनिश्चितताओं और जलवायु संकट के दौर में सहयोग, विश्वास और साझा जिम्मेदारी का मजबूत संदेश लेकर आई है।

चार प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रही चर्चा

बैठक के दौरान सदस्य देशों ने चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर गहन विचार-विमर्श किया—

  • खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करना
  • कृषि व्यापार और सहयोग बढ़ाना
  • जलवायु परिवर्तन के अनुरूप टिकाऊ एवं पुनर्योजी (Regenerative) खेती को बढ़ावा देना
  • कृषि में नवाचार, तकनीक और साझेदारी को मजबूत करना

विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों, महिला किसानों तथा कृषि क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

‘इंदौर डिक्लेरेशन’ बना किसान-केंद्रित ग्लोबल घोषणापत्र

बैठक में सर्वसम्मति से स्वीकार किए गए ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ में किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा, कृषि निवेश, जलवायु-अनुकूल खेती, कृषि व्यापार और तकनीकी नवाचार को केंद्र में रखा गया है।

चौहान ने कहा कि यह घोषणापत्र किसानों और ग्रामीण समुदायों तक वास्तविक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है और सभी सदस्य देश इसके क्रियान्वयन के लिए मिलकर काम करेंगे।

कृषि क्षेत्र में चार नई वैश्विक पहलें

1. प्राकृतिक एवं पुनर्योजी कृषि के लिए उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क

ब्रिक्स देशों ने BRICS Network of Centres of Excellence on Agro-Ecology and Regenerative Agriculture स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर शोध, प्रशिक्षण और अनुभवों का आदान-प्रदान करना होगा।

भारत की ओर से मोदीपुरम स्थित Indian Institute of Farming Systems Research इस नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

2. डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क

कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भू-स्थानिक तकनीक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा आधारित समाधानों को बढ़ावा देने के लिए BRICS Network on Digital Agriculture स्थापित किया जाएगा।

इस नेटवर्क का समन्वय Indian Institute of Technology Delhi करेगा।

3. बीज अधिकारों की सुरक्षा के लिए वैश्विक मंच

किसानों के बीज संबंधी अधिकारों और पारंपरिक बीजों के संरक्षण के लिए Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems गठित किया जाएगा।

यह मंच देशी बीजों, जैव विविधता और पारंपरिक कृषि ज्ञान को संरक्षित करने की दिशा में काम करेगा।

4. BRICS AgriN नेटवर्क

BRICS AgriN (Agro Inputs, Genetic Resources and Information Network) के माध्यम से सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों, बीजों, आनुवंशिक संसाधनों और तकनीकी जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा।

लैब से खेत तक पहुंचेगा नवाचार

बैठक में पहले से संचालित BRICS Agricultural Research Platform को और मजबूत बनाने पर सहमति बनी। इसे ‘Knowledge to Action Hub’ के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि कृषि अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंच सके।

केंद्रीय मंत्री ने इसे ‘Lab to Land’ मॉडल की दिशा में बड़ा कदम बताया।

कृषि व्यापार और खाद्य सुरक्षा पर साझा प्रतिबद्धता

ब्रिक्स देशों ने निष्पक्ष, समावेशी और पारदर्शी वैश्विक कृषि व्यापार व्यवस्था के समर्थन का संकल्प दोहराया। बैठक में BRICS Grain Exchange जैसी पहलों पर भी चर्चा हुई, जिससे सदस्य देशों के बीच खाद्यान्न व्यापार और सहयोग को नई गति मिल सकती है।

जलवायु संकट से निपटने के लिए साझा रणनीति

बैठक में जलवायु परिवर्तन, एल-नीनो, खाद्य हानि (Food Loss) और कार्बन उत्सर्जन जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। सदस्य देशों ने पुनर्योजी खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि और संसाधन संरक्षण को भविष्य की कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर सहमति व्यक्त की।

कार्बन क्रेडिट व्यवस्था को किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बनाने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता

उर्वरकों की बढ़ती वैश्विक कीमतों के बीच चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को राहत देने के लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ स्वयं वहन कर रही है।

उन्होंने बताया कि किसानों को यूरिया की बोरी 266 रुपये और डीएपी (DAP) की बोरी 1350 रुपये की दर पर उपलब्ध कराई जा रही है तथा सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि उर्वरकों की आपूर्ति और उपलब्धता बनी रहे।

महिलाओं और युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर

बैठक में कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। कृषि स्टार्टअप, एग्री-बिजनेस, एग्री-प्रेन्योरशिप और तकनीक आधारित सेवाओं के माध्यम से युवाओं को कृषि से जोड़ने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

इंदौर बना ग्लोबल कृषि कूटनीति का केंद्र

ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने इंदौर की मेजबानी, सांस्कृतिक विरासत और आतिथ्य की सराहना की। प्रधानमंत्री Narendra Modi के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रतिनिधियों ने वृक्षारोपण कर ‘ब्रिक्स वाटिका’ की स्थापना भी की।

प्रमुख बिंदु

  • इंदौर डिक्लेरेशन’ को सभी ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से अपनाया।
  • प्राकृतिक खेती, डिजिटल एग्रीकल्चर और देशी बीज संरक्षण पर वैश्विक सहमति बनी।
  • छोटे किसानों, महिलाओं और युवाओं को कृषि विकास के केंद्र में रखा गया।
  • कृषि अनुसंधान को खेत तक पहुंचाने के लिए ‘Knowledge to Action Hub’ विकसित होगा।
  • जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यापार पर साझा रणनीति तैयार की गई।
  • किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

यह घोषणा-पत्र आने वाले वर्षों में वैश्विक कृषि सहयोग, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ खेती के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में देखा जा रहा है।