आंध्र प्रदेश के आम किसानों के संकट पर केंद्र की बड़ी पहल!

तोतापुरी आम की गिरती कीमतों पर केंद्र गंभीर, किसानों को राहत दिलाने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित

नई दिल्ली/आंध्र प्रदेश। आंध्र प्रदेश में तोतापुरी आम की कीमतों में आई भारी गिरावट से जूझ रहे किसानों को राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्यम से एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह समिति तोतापुरी आम की पूरी वैल्यू चेन का अध्ययन कर किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने तथा क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए ठोस सुझाव देगी।

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कीमतों में गिरावट से बढ़ा किसानों का संकट

हाल ही में आंध्र प्रदेश दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने तोतापुरी आम उत्पादक किसानों से सीधा संवाद किया। किसानों ने बताया कि प्रसंस्करण उद्योग में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाली तोतापुरी किस्म के आम की बाजार कीमतों में इस वर्ष उल्लेखनीय गिरावट आई है। इसके कारण हजारों किसानों की आय प्रभावित हुई है और उन्हें आर्थिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन में वृद्धि, मांग में कमी, प्रसंस्करण उद्योग की सीमित खरीद क्षमता तथा निर्यात बाजार में उतार-चढ़ाव जैसी परिस्थितियां कीमतों पर दबाव बना सकती हैं। इन्हीं कारणों की गहराई से पड़ताल करने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।

आईसीएआर ने बनाई उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति

आईसीएआर–केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), लखनऊ द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. टी. दमोदरन करेंगे। समिति में बागवानी, फल विज्ञान, कृषि अर्थशास्त्र और राज्य उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

समिति में आईसीएआर–आईआईएचआर, बेंगलुरु के वैज्ञानिक, सीआईएसएच लखनऊ के विशेषज्ञ, वाईएसआर हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, आंध्र प्रदेश के प्रोफेसर तथा राज्य उद्यानिकी विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह बहु-विषयक टीम खेती से लेकर प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात तक की पूरी श्रृंखला का अध्ययन करेगी।

10 दिनों के भीतर होगा क्षेत्रीय दौरा

विशेषज्ञ समिति को अगले 10 दिनों के भीतर आंध्र प्रदेश के प्रमुख तोतापुरी आम उत्पादक जिलों का दौरा करने का निर्देश दिया गया है। समिति किसानों, प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), उद्यानिकी अधिकारियों और अन्य हितधारकों से सीधे संवाद करेगी।

इस दौरान समिति निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं का अध्ययन करेगी—

  • तोतापुरी आम की खेती की वर्तमान स्थिति और उत्पादन लागत
  • किसानों की आय और लाभप्रदता
  • प्रसंस्करण उद्योग की क्षमता एवं उपयोग स्तर
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग-आपूर्ति की स्थिति
  • कीमतों में गिरावट के वास्तविक कारण
  • वैल्यू चेन में मौजूद बाधाएं और सुधार की संभावनाएं

मूल्य स्थिरीकरण और वैल्यू एडिशन पर रहेगा जोर

समिति क्षेत्रीय अध्ययन और प्राप्त आंकड़ों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट में मूल्य स्थिरीकरण तंत्र विकसित करने, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने, निर्यात बाजारों का विस्तार करने, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) को प्रोत्साहित करने के उपाय सुझाए जाएंगे।

इसके अलावा एफपीओ, प्रोसेसर और निर्यातकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित करने के लिए भी सुझाव दिए जाएंगे।

तोतापुरी आम का आर्थिक महत्व

तोतापुरी आम दक्षिण भारत की प्रमुख व्यावसायिक किस्मों में शामिल है। इसका उपयोग मुख्य रूप से आम पल्प, जूस, प्यूरी और अन्य प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। देश के आम प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात बाजार में इस किस्म की महत्वपूर्ण भूमिका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाए तो तोतापुरी आम किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

किसानों की आय सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की आय और आजीविका की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर ऐसे व्यावहारिक कदम उठाए जाएंगे, जिनसे किसानों को स्थायी राहत मिले, उनकी आय बढ़े और आम आधारित उद्योगों के विकास को नई गति मिले।

कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी विशेष फसल की कीमतों में गिरावट पर तत्काल वैज्ञानिक और आर्थिक अध्ययन कराने का निर्णय किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल वर्तमान संकट का समाधान खोजने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए भी एक मजबूत नीति ढांचा तैयार हो सकेगा।