मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग से बढ़ेगा उत्पादन और सुरक्षित रहेगी भूमि की उर्वरता: डॉ. दशरथ प्रसाद
पोकरण। कृषि विज्ञान केंद्र पोकरण द्वारा जैसलमेर जिले के गोमट गांव में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक दिवसीय विस्तृत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों ने भाग लिया और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
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मृदा परीक्षण पर आधारित खेती पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं केंद्र अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में खेती को लाभकारी बनाने के लिए मृदा परीक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे बिना जांच के उर्वरकों का उपयोग न करें, बल्कि मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरक डालें। इससे जहां फसल उत्पादन में वृद्धि होती है, वहीं भूमि की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे मुख्य पोषक तत्वों के साथ-साथ जिंक, सल्फर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग भी बेहद जरूरी है। असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता घटती है, उत्पादन कम होता है और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
जैविक एवं समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैविक खाद, हरी खाद और जैव उर्वरकों का उपयोग करने से मिट्टी की सेहत बेहतर बनी रहती है और खेती की लागत भी कम होती है। इसके अलावा, फसल अवशेषों के पुनर्चक्रण और जैव द्रव्यों के उपयोग को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
व्यावहारिक प्रशिक्षण और प्रदर्शन
कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी का नमूना लेने की सही विधि, उर्वरकों की उचित मात्रा तय करने और उनके वैज्ञानिक उपयोग के तरीकों का लाइव प्रदर्शन कर बताया गया। इससे किसानों को व्यवहारिक ज्ञान मिला, जिससे वे अपने खेतों में इन तकनीकों को आसानी से अपना सकेंगे। साथ ही, किसानों की व्यक्तिगत समस्याओं को सुनकर विशेषज्ञों ने मौके पर ही समाधान भी सुझाए।
पशुपालन से आय बढ़ाने के सुझाव
पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. राम निवास ढाका ने किसानों, विशेषकर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि के साथ पशुपालन को अपनाकर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने भेड़ और बकरी पालन से संबंधित केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी दी और युवाओं को प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि खेजड़ी की नर्सरी तैयार करना भी किसानों के लिए आय का एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसके अलावा, गर्मी के मौसम में बकरियों की देखभाल, संतुलित आहार प्रबंधन और बीमारियों से बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
कार्यक्रम के अंत में डॉ. दशरथ प्रसाद ने सभी अतिथियों और किसानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि प्रणाली को भी मजबूत बना सकते हैं।
कार्यक्रम का समापन किसानों के साथ संवाद और सुझाव सत्र के साथ हुआ, जिसमें किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य में इस प्रकार के और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।