अखी मुठी अनुकूला’ से शुरू होता है खेती का नया चक्र !!
भुवनेश्वर, ओडिशा: -देशभर में मनाया जाने वाला पवित्र पर्व अक्षय तृतीया ओडिशा में किसानों के जीवन का एक अहम हिस्सा है। यहां यह त्योहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि कृषि कार्यों की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक भी है। इस दिन को शुभ मानते हुए किसान नई फसल के लिए खेतों में पहला बीज बोते हैं और समृद्धि की कामना करते हैं।
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‘अखी मुठी अनुकूला’ की परंपरा !!
ओडिशा में अक्षय तृतीया के दिन ‘अखी मुठी अनुकूला’ नामक विशेष परंपरा निभाई जाती है। इस रस्म में किसान अपने खेत में धान के बीज की पहली मुट्ठी बोते हैं। यह प्रक्रिया आमतौर पर गांव के परिवार के मुखिया द्वारा पूजा-अर्चना के बाद संपन्न की जाती है। मान्यता है कि इस दिन किया गया कार्य कभी खत्म नहीं होता और निरंतर फल देता है।
कृषि चक्र की शुरुआत!!
अक्षय तृतीया के साथ ही ओडिशा में खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। किसान इस दिन अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और बेहतर पैदावार के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं। यह पर्व किसानों के लिए नई उम्मीद, नई ऊर्जा और बेहतर फसल की शुरुआत का संकेत देता है।
भगवान जगन्नाथ से जुड़ा विशेष महत्व !!
ओडिशा में अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व भी काफी गहरा है। पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में इसी दिन रथ यात्रा के लिए रथ निर्माण कार्य की शुरुआत होती है। यह परंपरा राज्य की सांस्कृतिक विरासत और कृषि जीवन के बीच गहरे संबंध को दर्शाती है।
किसानों के लिए आस्था और विश्वास का पर्व !!
ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व सामूहिक रूप से मनाया जाता है। किसान एक-दूसरे के साथ मिलकर पूजा करते हैं और अच्छी बारिश व समृद्ध फसल की कामना करते हैं। बदलते समय के साथ आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ा है, लेकिन अक्षय तृतीया की परंपराएं आज भी किसानों के जीवन में उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।
सरकार की पहल !!
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अक्षय तृतीया व ‘राज्य किसान दिवस’ पर CM-KISAN योजना के तहत 41.68 लाख किसानों को 838.48 करोड़ रुपये की सहायता दी।
उन्होंने कहा कि ओडिशा की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है, इसलिए उन्नत बीज, सिंचाई और बाजार से जुड़ाव पर जोर दिया जा रहा है। ‘बलभद्र जैविक कृषि मिशन’ से जैविक खेती को बढ़ावा और ‘श्री अन्न’ अभियान के तहत मांडिया (रागी) को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल जारी है।
साथ ही ‘आम बिहान रथ’ (बीज आपके द्वार) योजना शुरू की गई, जिसके तहत पहले चरण में 10 जिलों के 31 ब्लॉकों में किसानों को घर के पास उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।
सारांश !!
अक्षय तृतीया ओडिशा के किसानों के लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि कृषि जीवन की आधारशिला है। यह दिन उनके लिए नई उम्मीद, परंपरा और समृद्धि का प्रतीक बनकर हर साल नई शुरुआत का संदेश देता है।