September 21, 2026 9:31 PM

Krishi Times

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रंगा रेड्डी में मृदा स्वास्थ्य और जैव उर्वरकों पर जागरूकता कार्यक्रम

तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले में ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम आयोजित, किसानों को टिकाऊ धान उत्पादन की दी जानकारी

रंगा रेड्डी (तेलंगाना), किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने, मिट्टी की सेहत सुधारने तथा खेती की लागत घटाकर आय बढ़ाने के उद्देश्य से तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के इब्राहिमपट्टनम मंडल के मंचल गांव में मंगलवार को ‘खेत बचाओ अभियान’ (केबीए) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिकों की टीम ने किया, जिसमें डॉ. पी.सी. लता, डॉ. के. श्रुति और डॉ. के. बसवराज शामिल रहे।

टिकाऊ खेती और मृदा स्वास्थ्य पर जोर

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को टिकाऊ धान उत्पादन तकनीकों की जानकारी देते हुए जैव उर्वरकों के महत्व, पोषक तत्वों के कुशल उपयोग वाली धान की किस्मों, समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) तथा हरी खाद वाली फसलों के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों को अपनाकर किसान मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ-साथ उत्पादन लागत में कमी ला सकते हैं।

रैपिड सॉयल टेस्ट किट का प्रदर्शन

किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए कार्यक्रम में रैपिड सॉयल टेस्ट किट का प्रदर्शन भी किया गया। इसके माध्यम से किसानों को खेत की मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन करने और क्षेत्र-विशिष्ट पोषक तत्व प्रबंधन (Site-Specific Nutrient Management) अपनाने का प्रशिक्षण दिया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ उर्वरकों के अनावश्यक उपयोग को भी रोका जा सकता है।

किसानों को वितरित किए गए जैव उर्वरक

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित किसानों को जैव उर्वरक एजोस्पिरिलम (Azospirillum) और पीएसबी (Phosphate Solubilizing Bacteria-PSB) का वितरण किया गया। वैज्ञानिकों ने इन जैव उर्वरकों के उपयोग की विधि और उनसे मिलने वाले लाभों की जानकारी भी दी।

किसानों ने पूछे तकनीकी सवाल

कार्यक्रम में लगभग 45 किसानों ने सक्रिय भागीदारी की। किसानों ने वैज्ञानिकों से फसल पोषण, कीट एवं रोग प्रबंधन, मिट्टी की गुणवत्ता सुधार और टिकाऊ कृषि तकनीकों से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। वैज्ञानिकों ने किसानों को व्यावहारिक सुझाव देते हुए उनकी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया।

जनप्रतिनिधियों और कृषि अधिकारियों की रही मौजूदगी

इस अवसर पर गांव की प्रतिनिधि मनासा, अन्य वार्ड सदस्य, मंचल गांव की कृषि विस्तार अधिकारी (एईओ) साई सिरी तथा अरुटला गांव की एईओ निकिता भी उपस्थित रहीं। सभी ने किसानों से टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘खेत बचाओ अभियान’ जैसे कार्यक्रम किसानों को वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल खेती की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे दीर्घकाल में कृषि उत्पादन, मृदा स्वास्थ्य और किसानों की आय में सकारात्मक सुधार संभव हो सकेगा।

चित्र सौजन्य IIRR-ICAR