अल नीनो की आशंका पर केंद्र सरकार सतर्क, किसानों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च : शिवराज सिंह
मानसून और खरीफ सीजन की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा
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नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026, संभावित अल नीनो प्रभाव, जल उपलब्धता, बीज भंडारण, फसल रणनीति और राज्यों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग सहित विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और मौसम से जुड़ी किसी भी चुनौती का प्रभाव खेत और किसान पर न्यूनतम रहे, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें समन्वित रूप से कार्य करें।
सामान्य से कम मानसून का अनुमान, अल नीनो पर बढ़ी निगरानी
बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमानों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रहने की संभावना है तथा देशभर में वर्षा दीर्घकालीन औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मानसून अवधि के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना भी जताई गई है।
इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौसम पूर्वानुमानों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को पहले से सतर्क कर दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वैज्ञानिक कृषि प्रबंधन, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और समयबद्ध सलाह के माध्यम से संभावित जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
जलाशयों में पर्याप्त पानी, खरीफ फसलों को मिलेगी मजबूती
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार देश के प्रमुख जलाशयों में वर्तमान जल भंडारण सामान्य से बेहतर स्थिति में है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जलाशयों का जलस्तर इस अवधि के औसत भंडारण का 127.01 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से खरीफ सीजन के दौरान सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी और वर्षा की कमी का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
कम वर्षा वाले जिलों पर विशेष नजर रखने के निर्देश
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन राज्यों और जिलों में कम वर्षा, लंबे ड्राई स्पेल या अल नीनो का अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है, वहां विशेष निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए। उन्होंने जिला स्तर पर नियमित समीक्षा और त्वरित निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन, कृषि वैज्ञानिकों और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा ताकि किसानों को समय पर सहायता मिल सके।
कागजों से बाहर निकले कंटिन्जेंसी प्लान
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कंटिन्जेंसी प्लान केवल दस्तावेज बनकर न रह जाएं, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले की परिस्थितियों, जल उपलब्धता, फसल पैटर्न, बुवाई की स्थिति और संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर कार्ययोजनाओं को लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों को व्यवहारिक समाधान और समय पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराना ही इन योजनाओं की वास्तविक सफलता होगी।
वैकल्पिक फसल और सूखा-सहनशील किस्मों पर जोर
सरकार ने क्षेत्र-विशिष्ट और फसल-विशिष्ट रणनीति अपनाने का निर्णय लिया है। कृषि मंत्री ने कहा कि जहां आवश्यकता हो वहां किसानों को वैकल्पिक फसलें, कम अवधि में तैयार होने वाली किस्में तथा सूखा-सहनशील बीज उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि देरी से बुवाई की स्थिति के लिए भी अलग रणनीति तैयार रखी जाए ताकि उत्पादन पर प्रतिकूल असर न पड़े।
बीज भंडारण पर्याप्त, गुणवत्ता पर विशेष फोकस
बैठक में बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए बीजों की उपलब्धता आवश्यकता से अधिक है तथा आपात परिस्थितियों के लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व भी तैयार रखा गया है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल बीजों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि किसानों तक प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले बीज पहुंचें तथा पुनर्बुवाई की आवश्यकता होने पर वैकल्पिक बीज तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।
नमी संरक्षण और जल-संरक्षण बनेगा बड़ा हथियार
केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीण विकास विभाग और अन्य एजेंसियों को खेतों में नमी बनाए रखने, वर्षा जल संचयन, खेत-तालाब निर्माण, जल संरक्षण संरचनाओं के विकास तथा उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि यदि वर्षा सामान्य से कम भी होती है, तब भी प्रभावी नमी संरक्षण और जल प्रबंधन तकनीकों के माध्यम से फसलों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
नहरों के अंतिम छोर तक पहुंचे पानी
जल संसाधनों के उपयोग की समीक्षा करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उपलब्ध पानी का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से यह देखने के निर्देश दिए कि नहर प्रणाली के अंतिम छोर तक पानी पहुंच रहा है या नहीं।
उन्होंने कहा कि सीमित जल संसाधनों का उपयोग इस प्रकार किया जाए कि अधिकतम किसानों और अधिकतम कृषि क्षेत्र को लाभ मिल सके।
रोग और कीट प्रबंधन के लिए एडवाइजरी होगी मजबूत
मंत्री ने कहा कि मौसम में बदलाव, नमी असंतुलन और वर्षा अंतराल के कारण कई प्रकार के रोग एवं कीट प्रकोप बढ़ सकते हैं। इसलिए अग्रिम निगरानी, पूर्व चेतावनी और उपचार संबंधी सलाह पहले से तैयार की जाए।
उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि कृषि वैज्ञानिकों की मदद से रोग एवं कीट प्रबंधन की रणनीति तैयार कर किसानों तक समय पर पहुंचाई जाए।
मोबाइल संदेशों से सीधे किसानों तक पहुंचेगी सलाह
शिवराज सिंह चौहान ने डिजिटल कृषि सेवाओं को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों तक मोबाइल संदेश, फसल सलाह, मौसम चेतावनी और रोग-कीट संबंधी जानकारी सीधे पहुंचाने की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए।
इसके लिए राज्य सरकारों, कॉल सेंटरों, कृषि विभागों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों का आत्मविश्वास बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता
बैठक के समापन पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य केवल संभावित जोखिमों का आकलन करना नहीं, बल्कि समय रहते ऐसे कदम उठाना है जिससे किसानों का आत्मविश्वास बना रहे और खेती की निरंतरता प्रभावित न हो।
Google.com उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बेहतर जल प्रबंधन, उन्नत कृषि तकनीकों, पर्याप्त बीज उपलब्धता, वैकल्पिक फसल रणनीतियों और केंद्र-राज्य समन्वय के माध्यम से खरीफ सीजन को सफल बनाया जा सकेगा तथा किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
