कृषि मूल्य शृंखलाओं और एफपीओ को मिलेगा मजबूत वित्तीय समर्थन, राजस्थान में संस्थागत ऋण विस्तार पर जोर
जयपुर, 17 जुलाई। किसानों की आय बढ़ाने, कृषि अवसंरचना को सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के उद्देश्य से राजस्थान सरकार के राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन (रीति) ने योजना भवन में “कृषि मूल्य शृंखलाओं एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए बैंकिंग सहायता” विषय पर राज्य स्तरीय वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में कृषि क्षेत्र में संस्थागत वित्त की पहुंच बढ़ाने, कृषि मूल्य शृंखलाओं को मजबूत करने और एफपीओ को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई।
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कृषि अवसंरचना में निवेश बढ़ाने पर जोर
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कटाई उपरांत अवसंरचना (Post-Harvest Infrastructure) को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। इस दिशा में वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड चेन, ग्रेडिंग, छंटाई एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में निवेश को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई। इससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने के साथ कृषि उत्पादों की बर्बादी भी कम होगी।
जिला-विशिष्ट ऋण योजनाओं की तैयारी का सुझाव
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि प्रत्येक जिले की कृषि क्षमता, फसल पैटर्न और बाजार की मांग के अनुसार जिला-विशिष्ट ऋण योजनाएं तैयार की जाएं। इससे स्थानीय कृषि मूल्य शृंखलाओं को मजबूती मिलेगी और किसानों तथा कृषि उद्यमियों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप वित्तीय सहायता उपलब्ध हो सकेगी।
ओडीओपी और क्लस्टर आधारित मॉडल को बढ़ावा
कार्यशाला में एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) तथा क्लस्टर आधारित कृषि विकास मॉडल के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर बल दिया गया। माना गया कि इससे स्थानीय कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग, प्रसंस्करण और निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
जलवायु अनुकूल कृषि वित्तपोषण पर फोकस
बदलते जलवायु परिदृश्य को देखते हुए जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, नवीकरणीय ऊर्जा आधारित कृषि प्रणालियों और जलवायु-स्मार्ट कृषि अवसंरचना के लिए वित्तपोषण बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम कृषि क्षेत्र को जलवायु जोखिमों से सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डिजिटल ऋण प्रणाली से आसान होगा वित्त तक पहुंच
कार्यशाला में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), नाबार्ड और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) ने किसानों और एफपीओ के लिए उपलब्ध विभिन्न ऋण-संबद्ध योजनाओं की जानकारी साझा की। इस दौरान यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (PMFME), कृषि अवसंरचना निधि (AIF) तथा नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद (NWR) वित्तपोषण की प्रगति और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने बताया कि यूएलआई के माध्यम से डिजिटल ऋण वितरण प्रणाली को नई गति मिलेगी, जिससे ऋण स्वीकृति और वितरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बन सकेगी।
एफपीओ की क्षमता निर्माण पर विशेष बल
कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि किसान उत्पादक संगठनों को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं, बल्कि तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता, व्यवसाय विकास सेवाएं और हैंडहोल्डिंग समर्थन भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे एफपीओ अधिक प्रभावी व्यावसायिक इकाइयों के रूप में विकसित हो सकेंगे और किसानों को बाजार से बेहतर लाभ मिल सकेगा।
विकसित राजस्थान-2047 के लक्ष्य की दिशा में कदम
कार्यशाला के समापन पर विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और एफपीओ प्रतिनिधियों ने कृषि अवसंरचना में निवेश बढ़ाने, संस्थागत ऋण प्रवाह का विस्तार करने तथा कृषि मूल्य शृंखलाओं को मजबूत बनाने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने का संकल्प लिया। प्रतिभागियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से किसानों की आय में वृद्धि होगी और ‘विकसित राजस्थान-2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा।
कार्यशाला में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, आरबीआई, नाबार्ड, एसएलबीसी, वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा अन्य प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
