August 30, 2026 10:42 AM

Krishi Times

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गोबर बनेगा गैस, यमुना होगी साफ: दिल्ली में CBG प्लांट परियोजना !!

यमुना स्वच्छता और जैव-ऊर्जा उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम, दिल्ली में स्थापित होंगे CBG प्लांट MCD और NDDB के बीच समझौता, गोबर से बनेगी बायो-गैस और जैविक खाद !!

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने, शहरी स्वच्छता को बढ़ावा देने और पशुपालकों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट्स की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुए इस समझौते को देश के बड़े शहरों में अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए एक मॉडल पहल माना जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, दिल्ली के उप-राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा केंद्र एवं दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

यमुना शुद्धिकरण अभियान को मिलेगी नई गति !!

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यमुना नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह समझौता एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यमुना में गिरने वाले गोबर और अन्य जैविक अपशिष्टों के वैज्ञानिक निस्तारण के बिना नदी को पूरी तरह स्वच्छ बनाना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित कर रही है जिससे भविष्य में गोबर का एक छोटा हिस्सा भी यमुना में न पहुंचे और उसका उपयोग ऊर्जा एवं जैविक खाद उत्पादन में किया जा सके।

दिसंबर 2028 तक यमुना में गंदा पानी रोकने का लक्ष्य !!

अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में सीवर और औद्योगिक अपशिष्ट के उपचार के लिए लगभग 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स पर कार्य शुरू हो चुका है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक यह सुनिश्चित करना है कि यमुना नदी में एक भी लीटर अनुपचारित गंदा पानी न पहुंचे। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो यमुना के जल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा और दिल्ली की पर्यावरणीय स्थिति बेहतर होगी।

गोबर से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा, बढ़ेगी किसानों और पशुपालकों की आय !!

नई पहल के तहत गोबर का वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) तैयार की जाएगी। इसके साथ ही जैविक खाद का उत्पादन भी होगा, जिससे प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। अमित शाह ने बताया कि इस परियोजना में पशुपालकों को गोबर उपलब्ध कराने के बदले प्रति किलोग्राम ₹1 का भुगतान किया जाएगा। इससे डेयरी और पशुपालन क्षेत्र से जुड़े परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत प्राप्त होगा।

तीन प्रमुख अपशिष्ट प्रबंधन केंद्रों पर होगा प्रसंस्करण !!

योजना के तहत नांगली, घोघा-गोयला और गाजीपुर में स्थापित अपशिष्ट निस्तारण केंद्रों पर गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट का प्रसंस्करण किया जाएगा। इन संयंत्रों के माध्यम से बड़ी मात्रा में गोबर का सुरक्षित निस्तारण संभव होगा और इसे ऊर्जा में परिवर्तित किया जाएगा।

स्वच्छ शहरों और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में मॉडल पहल !!

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना स्वच्छ भारत मिशन, गोबरधन योजना, जैव-ऊर्जा उत्पादन और सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को मजबूती देगी। इससे नगर निगमों को अपशिष्ट प्रबंधन में मदद मिलेगी, प्रदूषण कम होगा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि दिल्ली में सफल क्रियान्वयन के बाद यह मॉडल देश के अन्य महानगरों और बाद में ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है, जिससे करोड़ों पशुपालकों और किसानों को लाभ मिलेगा।