यूरिया क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी!

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम: नई यूरिया निवेश नीति-2026 को मंजूरी, घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने देश में यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ाने और उर्वरक क्षेत्र में नए निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “आत्मनिर्भर भारत के लिए यूरिया-2026 (एनआईपीयू-2026)” राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दे दी है। यह नीति गैस आधारित नई यूरिया विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत की आयात निर्भरता कम करने और उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता घटेगी

नई नीति का मुख्य उद्देश्य देश में आधुनिक और ऊर्जा दक्ष यूरिया संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करना है, जिससे घरेलू उत्पादन में वृद्धि होगी। वर्तमान में देश में यूरिया की मांग और घरेलू उत्पादन के बीच अंतर बना हुआ है, जिसे आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है। एनआईपीयू-2026 के लागू होने से इस अंतर को कम करने में मदद मिलेगी तथा किसानों को उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

निवेशकों के लिए अधिक पारदर्शी और आकर्षक व्यवस्था

एनआईपीयू-2026 में निवेशकों के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत फिक्स्ड और वेरिएबल लागत को अलग-अलग निर्धारित किया जाएगा, जिससे परियोजनाओं की लागत संरचना अधिक पारदर्शी बनेगी। इसके अलावा, निवेशकों के लिए 12 प्रतिशत न्यूनतम और 16 प्रतिशत अधिकतम रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) का प्रावधान किया गया है, जिससे परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित होगी।

विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से होने वाले जोखिम को कम करने के लिए चार वर्षों के बाद फिक्स्ड कॉस्ट को भारतीय रुपये में परिवर्तित करने की व्यवस्था भी की गई है। सरकार का अनुमान है कि इन सुधारों से एनआईपी-2012 की तुलना में एनआईपीयू-2026 के तहत स्थापित प्रत्येक संयंत्र पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत संभव होगी।

नई यूरिया इकाइयों की स्थापना को मिलेगा बढ़ावा

उर्वरक विभाग के अनुसार, नई गैस आधारित यूरिया विनिर्माण इकाइयों की स्थापना इस नीति के तहत कवर की जाएगी। इससे निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा देश में उर्वरक उत्पादन क्षमता का विस्तार होगा। नीति के माध्यम से अत्याधुनिक तकनीक और ऊर्जा दक्ष उत्पादन प्रणालियों को अपनाने पर भी जोर दिया जाएगा।

एनआईपी-2012 से मिली थी नई दिशा

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में उर्वरक विभाग ने यूरिया क्षेत्र में पुनरुद्धार, विस्तार, ब्राउनफील्ड और ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए नई निवेश नीति (एनआईपी-2012) लागू की थी। इस नीति के तहत देश में कुल छह नई यूरिया इकाइयों की स्थापना हुई, जिनमें चार सार्वजनिक क्षेत्र की संयुक्त उद्यम कंपनियों और दो निजी कंपनियों द्वारा स्थापित की गई थीं। हालांकि, एनआईपी-2012 के तहत निवेश की अवधि अक्टूबर 2019 में समाप्त हो गई थी।

वर्तमान क्षमता और भविष्य की जरूरत

देश में इस समय 33 यूरिया विनिर्माण इकाइयां संचालित हैं, जिनकी कुल पुनर्मूल्यांकित/स्थापित क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) है। कृषि क्षेत्र में बढ़ती उर्वरक मांग को देखते हुए घरेलू उत्पादन क्षमता में और विस्तार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उर्वरक विभाग को नई यूरिया इकाइयों की स्थापना के लिए कई प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिसके मद्देनजर नई निवेश नीति की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

कृषि और खाद्य सुरक्षा को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि एनआईपीयू-2026 न केवल उर्वरक क्षेत्र में निवेश को गति देगा, बल्कि कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और किसानों को उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, यह पहल “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियानों को मजबूत आधार प्रदान करेगी।