जल, जमीन और पशुधन पर विशेष कार्यशाला

पोकरण में जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और वैज्ञानिक पशुपालन पर मंथन

वन्दे गंगा जल संरक्षण अभियान’, ‘खेत बचाओ अभियान’ और विश्व दुग्ध दिवस पर आयोजित हुई जागरूकता कार्यशाला

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पोकरण (जैसलमेर)। कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), पोकरण में कृषि विभाग के तत्वावधान में “वन्दे गंगा जल संरक्षण अभियान”, “खेत बचाओ अभियान” तथा “विश्व दुग्ध दिवस” के अवसर पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों, महिला कृषकों, पशुपालकों और ग्रामीण युवाओं ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार, पर्यावरण संरक्षण तथा वैज्ञानिक पशुपालन के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। विशेषज्ञों ने किसानों को बदलते जलवायु परिदृश्य में टिकाऊ कृषि एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बिना कृषि का भविष्य सुरक्षित नहीं

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बी.आर. बाकोलिया, उप निदेशक एवं पदेन परियोजना निदेशक (आत्मा), जैसलमेर ने अपने संबोधन में कहा कि जल और भूमि जैसे प्राकृतिक संसाधन कृषि की आधारशिला हैं। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले समय में कृषि क्षेत्र गंभीर चुनौतियों का सामना कर सकता है। उन्होंने किसानों से वर्षा जल संचयन, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों और जल बचत उपायों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में प्रत्येक किसान की जिम्मेदारी है कि वह जल संरक्षण को अपनी खेती का अभिन्न हिस्सा बनाए।

वन्दे गंगा’ और ‘खेत बचाओ’ अभियान का उद्देश्य संसाधनों का संरक्षण

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने “वन्दे गंगा जल संरक्षण अभियान” तथा “खेत बचाओ अभियान” की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन अभियानों का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि किसानों को ऐसे व्यवहारिक उपायों से जोड़ना है जिनसे भूमि और जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने किसानों को नियमित मृदा परीक्षण कराने, जैविक खादों एवं फसल अवशेषों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और कृषि की स्थिरता का आधार है।

पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य का है सीधा संबंध

विशिष्ट अतिथि निकिता मेहरा, पर्यवेक्षक, सीएमओ कार्यालय जयपुर ने स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित जल और बेहतर जनस्वास्थ्य के बीच संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रदूषित जल और अस्वच्छ वातावरण न केवल कृषि उत्पादकता को प्रभावित करते हैं बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने, प्लास्टिक प्रदूषण कम करने और सामुदायिक स्तर पर स्वच्छता गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

विश्व दुग्ध दिवस पर वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी

विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. राम निवास ने पशुपालकों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक पशुपालन प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पशुओं को संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वच्छ आवास उपलब्ध कराने से दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आज पशुपालन केवल सहायक व्यवसाय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

मृदा संरक्षण और संतुलित पोषण पर दिया गया विशेष जोर

सस्य वैज्ञानिक डॉ. के.जी. व्यास ने “खेत बचाओ अभियान” के तहत मृदा संरक्षण और उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। उन्होंने किसानों को सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व, जैव उर्वरकों के उपयोग और जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मिट्टी की सेहत बनाए रखना उतना ही जरूरी है जितना अधिक उत्पादन प्राप्त करना।

किसानों और विशेषज्ञों के बीच हुआ सीधा संवाद

कार्यशाला के दौरान किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण युवाओं ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं को साझा किया। किसानों ने जल संरक्षण, फसल प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत किया। इस संवादात्मक सत्र ने प्रतिभागियों को नई तकनीकों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समझने का अवसर प्रदान किया।

पर्यावरण संरक्षण और आय वृद्धि के लिए नवीन तकनीकों को अपनाने का आह्वान

कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, मृदा स्वास्थ्य सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने से संबंधित जागरूकता संदेश भी दिए गए। विशेषज्ञों ने किसानों से कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार, संसाधनों का संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन ही भविष्य की कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना सकते हैं।

प्रतिभागियों का आभार व्यक्त कर हुआ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने सभी अतिथियों, किसानों, महिला कृषकों, पशुपालकों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं किसानों को नई जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें बदलती कृषि परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम का समापन किसानों द्वारा जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने के संकल्प के साथ हुआ।