राजस्थान में एग्रो प्रोसेसिंग उद्योगों को 1.5 करोड़ तक अनुदान!

राजस्थान कैबिनेट का बड़ा फैसला: कृषि प्रसंस्करण, फूड पार्क और मिलेट्स पर फोकस, किसानों की आय बढ़ाने की नई रणनीति

जयपुर, 7 अगस्त। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित राजस्थान मंत्रिमंडल एवं मंत्रिपरिषद की बैठक में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, ग्रामीण रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026, राजस्थान फूड पार्क विकास नीति-2026, श्रीअन्न (मिलेट्स) प्रोत्साहन, कृषि वानिकी को बढ़ावा देने वाली ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट पॉलिसी तथा किसानों को कृषि आदानों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे फैसले शामिल हैं।

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राज्य सरकार का दावा है कि इन नीतियों से किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उपज का मूल्य संवर्धन करने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित करने और कृषि आधारित उद्योगों में निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 को मंजूरी

मंत्रिमंडल ने राज्य में कृषि और बागवानी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 को मंजूरी दी है। नई नीति का मुख्य उद्देश्य किसानों की उपज को सीधे बाजार और प्रसंस्करण इकाइयों से जोड़कर बेहतर मूल्य दिलाना है।

नीति के तहत फल, सब्जी, मसाला, अनाज, तिलहन, दलहन, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, लघु वन उपज, शहद, दुग्ध उत्पाद तथा पशु आहार उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। साथ ही कोल्ड स्टोरेज, साइलो, वेयरहाउस और अन्य कृषि अवसंरचना परियोजनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान में उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और किसानों को बेहतर कीमत दिलाने में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कृषि उद्यमों को मिलेगा 1.50 करोड़ रुपये तक अनुदान

नई नीति के तहत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, मिलेट्स आधारित उद्योगों और प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों को पूंजीगत सहायता प्रदान की जाएगी।

  • 50 लाख रुपये तक के ऋण पर 60 प्रतिशत अनुदान
  • 50 से 100 लाख रुपये तक के ऋण पर 50 प्रतिशत अनुदान
  • 1 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण पर 40 प्रतिशत अनुदान
  • अधिकतम अनुदान सीमा 1.50 करोड़ रुपये

एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन), अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, टीएसपी क्षेत्रों तथा महिला उद्यमियों को अतिरिक्त 5 प्रतिशत अनुदान का लाभ मिलेगा।

मिलेट्स मिशन को मिलेगी नई गति

राज्य सरकार ने श्रीअन्न (मिलेट्स) प्रमोशन एजेंसी स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह एजेंसी बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य मोटे अनाजों के उत्पादन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन को बढ़ावा देगी।

राजस्थान देश के प्रमुख बाजरा उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में मिलेट्स आधारित उद्योगों के विस्तार से किसानों को नई बाजार संभावनाएं और अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं।

हर जिले में विकसित होंगे फूड पार्क

कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने राजस्थान फूड पार्क विकास नीति-2026 को भी मंजूरी दी है।

नई नीति के तहत राज्य के प्रत्येक जिले में क्लस्टर आधारित मॉडल पर चरणबद्ध तरीके से फूड पार्क विकसित किए जाएंगे। इनमें भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, कोल्ड चेन और परिवहन जैसी एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

फूड पार्कों के माध्यम से किसानों, एफपीओ और उत्पादक समूहों को सीधे प्रसंस्करण इकाइयों और बाजारों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

कृषि वानिकी को बढ़ावा देगी ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट पॉलिसी

मंत्रिमंडल ने राज्य में ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट (TOF) पॉलिसी लागू करने को भी मंजूरी दी है।

यह नीति किसानों को खेतों की मेड़ों, बंजर एवं परती भूमि तथा सिंचित क्षेत्रों में पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे कृषि वानिकी (Agroforestry) को बढ़ावा मिलेगा, जो किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती है।

सरकार का मानना है कि इससे:

  • कार्बन अवशोषण बढ़ेगा
  • भू-क्षरण में कमी आएगी
  • जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा
  • गैर-काष्ठ वन उत्पादों का उत्पादन बढ़ेगा
  • कृषि आधारित उद्यमिता को नई दिशा मिलेगी

ग्रामीण रोजगार और आजीविका को मिलेगा सहारा

मंत्रिमंडल ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना को मंजूरी दी है।

योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। इसके साथ ही जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना निर्माण और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार यह योजना कृषि के ऑफ-सीजन में ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

किसानों को समय पर मिलेगा उर्वरक और बीज

मंत्रिपरिषद की बैठक में खरीफ और आगामी रबी सीजन को देखते हुए किसानों को उर्वरक, प्रमाणित बीज और अन्य कृषि आदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

निर्णय लिया गया कि सभी प्रभारी मंत्री जिलों के दौरे के दौरान कृषि आदानों की उपलब्धता की समीक्षा करेंगे ताकि किसानों को बुवाई से लेकर कटाई तक किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा

राजस्थान सरकार के इन फैसलों को कृषि उत्पादन से आगे बढ़कर मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, निर्यात और कृषि उद्यमिता पर केंद्रित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यदि नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो इससे किसानों की आय बढ़ाने, एफपीओ को मजबूत करने, ग्रामीण युवाओं को रोजगार देने और राजस्थान को कृषि-आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद मिल सकती है।