हर मिश्रण सुरक्षित नहीं, किसानों को वैज्ञानिक सलाह!

फल-सब्जियों में रसायनों का मिश्रण करने से पहले समझें विज्ञान, नहीं तो फसल को हो सकता है भारी नुकसान: डॉ. एस.के. सिंह

पूसा (समस्तीपुर)। फल एवं सब्जी उत्पादन में बढ़ते रोग, कीट और माइट्स के प्रकोप के बीच किसान अक्सर लागत और समय बचाने के लिए विभिन्न कृषि रसायनों को एक साथ मिलाकर छिड़काव करते हैं। लेकिन बिना वैज्ञानिक जानकारी के किया गया यह प्रयोग फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। यह चेतावनी ने किसानों को दी है।

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प्रोफेसर (डॉ) एस.के. सिंह, जो पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी के विभागाध्यक्ष तथा अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना के पूर्व प्रधान अन्वेषक रह चुके हैं, का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, बढ़ती आर्द्रता और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण एक ही समय में कई प्रकार के रोग एवं कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है। ऐसे में किसान कीटनाशकों, फफूंदनाशकों, सूक्ष्म पोषक तत्वों और जैव उत्पादों को मिलाकर छिड़काव करने लगे हैं, जबकि सभी रसायन आपस में संगत नहीं होते।

“हर मिश्रण लाभकारी नहीं होता”

प्रोफेसर. सिंह के अनुसार आधुनिक कृषि रसायन विज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है कि “हर मिश्रण लाभकारी नहीं होता।” गलत मिश्रण से दवाओं की प्रभावशीलता घट सकती है, पत्तियां झुलस सकती हैं, फूल गिर सकते हैं और उत्पादन में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

उन्होंने बताया कि आम, लीची, केला, टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी, गोभी और कद्दूवर्गीय सब्जियों में टैंक-मिक्सिंग का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन किसी भी मिश्रण को तैयार करने से पहले उसकी रासायनिक और जैविक संगतता की जांच करना आवश्यक है।

कौन-से रसायन सामान्यतः संगत हैं?

डॉ. सिंह ने बताया कि इमिडाक्लोप्रिड, थायमेथोक्साम, डायनोटेफ्यूरान, फ्लोनिकामिड, स्पाइरोटेट्रामेट, सायनट्रानिलिप्रोल और क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल जैसे आधुनिक कीटनाशक अधिकांश ट्रायजोल और स्ट्रोबिल्यूरिन समूह के फफूंदनाशकों के साथ सुरक्षित रूप से उपयोग किए जा सकते हैं।

इसी प्रकार एजोक्सीस्ट्रोबिन, डिफेनोकोनाजोल, टेबुकोनाजोल, ट्राइफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन, पायराक्लोस्ट्रोबिन और मैन्डीप्रोपामिड जैसे फफूंदनाशकों का भी कई कीटनाशकों के साथ सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। कई कंपनियां इनका प्रीमिक्स फॉर्मूलेशन भी बाजार में उपलब्ध करा रही हैं।

नए अणुओं के साथ अनुमान नहीं, वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी

डॉ. सिंह ने कहा कि 2025-26 में सायनट्रानिलिप्रोल, टेट्रानिलिप्रोल, फ्लुपाइराडीफ्यूरोन, ब्रॉमोप्रोपाइलेट, स्पिनेटोराम और स्पाइरोटेट्रामेट जैसे नए अणुओं का उपयोग तेजी से बढ़ा है। हालांकि ये अधिकांश आधुनिक फफूंदनाशकों के साथ संगत पाए गए हैं, लेकिन कॉपर आधारित उत्पादों, अत्यधिक क्षारीय घोलों और कुछ विशेष पोषक तत्वों के साथ इनके मिश्रण से पहले परीक्षण अनिवार्य है।

उनका सुझाव है कि किसान अनुमान के आधार पर मिश्रण करने के बजाय निर्माता कंपनी द्वारा जारी संगतता सूची का अवश्य अध्ययन करें।

किन रसायनों को साथ मिलाने से बचें?

डॉ. सिंह के अनुसार कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, कॉपर हाइड्रॉक्साइड और बोर्डो मिश्रण जैसे कॉपर आधारित फफूंदनाशकों को क्षारीय उत्पादों के साथ नहीं मिलाना चाहिए। इससे रासायनिक प्रतिक्रिया होने के कारण दवा का असर कम हो सकता है।

इसी तरह सल्फर आधारित फफूंदनाशकों को मिनरल ऑयल, हॉर्टिकल्चरल ऑयल या अधिक सांद्रता वाले नीम तेल के साथ मिलाने से बचना चाहिए। गर्म मौसम में यह मिश्रण पत्तियों को झुलसा सकता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्राइकोडर्मा, बैसिलस सब्टिलिस और पेसिलोमाइसिस जैसे जैविक एजेंटों को रासायनिक फफूंदनाशकों के साथ नहीं मिलाना चाहिए, क्योंकि इससे लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं।

पोषक तत्वों के मिश्रण में भी बरतें सावधानी

डॉ. सिंह ने बताया कि जिंक, बोरॉन, मैग्नीशियम सल्फेट, कैल्शियम और अमीनो एसिड का कीटनाशकों के साथ मिश्रण करते समय विशेष सावधानी जरूरी है। कैल्शियम नाइट्रेट को सल्फेट या फॉस्फेट युक्त उर्वरकों के साथ मिलाने पर अवक्षेप बन सकता है, जिससे स्प्रे मशीन की नोजल जाम हो सकती है।

इसके अलावा फॉस्फाइट आधारित उत्पादों को कॉपर फफूंदनाशकों के साथ मिलाने से फाइटोटॉक्सिसिटी का खतरा बढ़ जाता है।

जार टेस्ट को बताया सबसे विश्वसनीय उपाय

किसानों को सलाह देते हुए डॉ. एस.के. सिंह ने कहा कि किसी भी नए मिश्रण को बड़े टैंक में तैयार करने से पहले “जार टेस्ट” अवश्य करें। इसके लिए एक पारदर्शी कांच के जार में सभी उत्पादों को निर्धारित अनुपात में मिलाकर 20 से 30 मिनट तक रखें।

यदि मिश्रण में तलछट, गांठ, दही जैसा जमाव, अत्यधिक झाग या परत बनती दिखाई दे तो उस मिश्रण का खेत में उपयोग नहीं करना चाहिए। यह परीक्षण टैंक-मिक्स संगतता जांचने का सबसे सरल और विश्वसनीय वैज्ञानिक तरीका माना जाता है।

दवाओं को टैंक में डालने का सही क्रम

डॉ. सिंह के अनुसार टैंक-मिक्सिंग में रसायनों को सही क्रम से डालना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले टैंक में आधा पानी भरें। इसके बाद वेटेबल पाउडर, ग्रेन्यूल, सस्पेंशन कंसन्ट्रेट, इमल्सीफायबल कंसन्ट्रेट, सॉल्युबल लिक्विड, सूक्ष्म पोषक तत्व और अंत में स्टिकर या स्प्रेडर मिलाएं। फिर शेष पानी भरकर घोल तैयार करें।

स्मार्ट टैंक-मिक्सिंग होगी भविष्य की तकनीक

डॉ. एस.के. सिंह का मानना है कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में “स्मार्ट टैंक-मिक्सिंग” तकनीक का महत्व बढ़ेगा। कई देशों में मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से किसानों को यह जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है कि कौन-सा रसायन किसके साथ सुरक्षित रूप से मिलाया जा सकता है। भारत में भी ऐसी डिजिटल संगतता प्रणाली के विस्तार की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।

किसानों के लिए संदेश

डॉ. एस.के. सिंह ने किसानों से अपील की कि वे बिना जानकारी के कृषि रसायनों का मिश्रण न करें। प्रत्येक नए मिश्रण से पहले जार टेस्ट करें, लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें और आवश्यकता पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों की सलाह अवश्य लें।

उन्होंने कहा, “सही मिश्रण फसल की सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है, जबकि गलत मिश्रण किसानों की पूरी मेहनत और निवेश को नुकसान पहुंचा सकता है।”