उत्तर प्रदेश में स्मार्ट खेती की दिशा में बड़ा कदम!

लखनऊ में बनेगी ड्रोन आधारित कृषि उत्कृष्टता प्रयोगशाला, किसानों और युवाओं को मिलेगी आधुनिक तकनीक की नई उड़ान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कृषि के आधुनिकीकरण और डिजिटल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी पहल के तहत राज्य कृषि प्रबंध संस्थान (SIMA), रहमानखेड़ा, लखनऊ में “एग्रीकल्चर ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लैब” की स्थापना का शिलान्यास किया गया। यह परियोजना UNISED संस्था द्वारा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत संचालित की जाएगी और इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना है।

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शिलान्यास कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक राजेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि यह प्रयोगशाला कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों की व्यावहारिक जरूरतों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगी। उन्होंने परियोजना को मूर्त रूप देने में उत्तर प्रदेश राज्य दिशा समिति के सलाहकार सदस्य अवनीश त्रिपाठी की भूमिका की सराहना करते हुए इसे प्रदेश में स्मार्ट कृषि को गति देने वाला कदम बताया।

किसानों के लिए तकनीक आधारित खेती का नया केंद्र

ड्रोन आधारित कृषि उत्कृष्टता प्रयोगशाला किसानों को कम लागत में अधिक दक्षता के साथ खेती करने में मदद करेगी। इसके माध्यम से फसलों पर उर्वरक और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव, फसल स्वास्थ्य की निगरानी, भूमि सर्वेक्षण तथा रोग एवं कीट प्रबंधन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे खेती की लागत कम होने के साथ-साथ उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होने की संभावना है।

विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन तकनीक के जरिए खेतों की निगरानी तेज और अधिक सटीक तरीके से की जा सकती है। इससे फसल में किसी समस्या का शुरुआती चरण में ही पता लगाकर समय पर समाधान किया जा सकेगा।

छात्रों और युवाओं को मिलेगा रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण

यह प्रयोगशाला कृषि छात्रों, शोधार्थियों और प्रशिक्षुओं को ड्रोन संचालन, ड्रोन मैपिंग, डेटा विश्लेषण तथा सटीक कृषि (Precision Farming) का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी। इससे युवाओं में तकनीकी दक्षता विकसित होगी और उन्हें ड्रोन पायलट, कृषि तकनीशियन तथा एग्री-टेक उद्यमी के रूप में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि आधुनिक कृषि में ड्रोन का महत्व लगातार बढ़ रहा है और भविष्य में कृषि सेवाओं का एक बड़ा हिस्सा ड्रोन आधारित होने की संभावना है। ऐसे में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की आवश्यकता है।

उच्च मूल्य वाली फसलों को होगा विशेष लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक कपास, गन्ना, धान, गेहूं, फल एवं सब्जी फसलों सहित उच्च मूल्य वाली कृषि प्रणालियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। इसके माध्यम से पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई निगरानी और रोग पहचान जैसे कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकते हैं।

ड्रोन सर्वेक्षण के जरिए खेतों का डिजिटल मानचित्र तैयार कर सटीक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा और पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होगा।

नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम होंगे आयोजित

परियोजना के तहत किसानों और विद्यार्थियों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, लाइव डेमो, तकनीकी कार्यशालाएं और परामर्श सत्र आयोजित किए जाएंगे। UNISED संस्था आधुनिक ड्रोन उपकरणों, तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण सहायता उपलब्ध कराएगी, ताकि लाभार्थियों को नवीनतम कृषि नवाचारों का सीधा लाभ मिल सके।

स्मार्ट फार्मिंग की दिशा में मॉडल सेंटर बनेगा SIMA

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषि के आधुनिकीकरण और स्मार्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच यह ड्रोन लैब राज्य के लिए एक मॉडल सेंटर के रूप में विकसित की जाएगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल डिजिटल एग्रीकल्चर, कौशल विकास, कृषि उत्पादकता वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को नई गति दे सकती है।

कार्यक्रम में संस्थान के शिक्षकों, तकनीकी अधिकारियों और UNISED संस्था के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे। आयोजकों ने विश्वास जताया कि यह परियोजना कृषि नवाचार, तकनीकी शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी।