लू से बचाव के लिए यूपी सरकार की एडवाइजरी जारी, किसानों और पशुपालकों को विशेष सतर्कता के निर्देश!
लखनऊ –प्रदेश में लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जिलों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने लगा है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग द्वारा हीटवेव की चेतावनी जारी किए जाने के बाद राहत आयुक्त कार्यालय ने आम नागरिकों, किसानों, खेतिहर मजदूरों और पशुपालकों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।
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सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे लापरवाही न बरतें और गर्मी के इस दौर में स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दें। विशेष रूप से खेतों में काम करने वाले किसानों और खुले में रहने वाले पशुओं को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए विशेष सतर्कता
जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि किसान भाई तेज धूप के समय खेतों में काम करने से बचें। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक तापमान सबसे अधिक रहता है, ऐसे में इस समय खेतों में लंबे समय तक रहने से लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।
किसानों को सलाह दी गई है कि खेतों में काम करते समय अपने साथ पानी की बोतल अवश्य रखें और नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। शरीर में पानी की कमी होने पर थकान, चक्कर और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए नींबू पानी, छाछ, शरबत और ओआरएस जैसे पेय पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार पसीना निकलने से शरीर में आवश्यक लवणों की कमी हो जाती है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में केवल पानी ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय पदार्थों का सेवन भी जरूरी है।
हल्के कपड़े पहनने और सिर ढकने की सलाह
एडवाइजरी में लोगों से हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की अपील की गई है। घर से बाहर निकलते समय सिर पर गमछा, टोपी या कपड़ा रखने तथा धूप से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करने को कहा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार गहरे रंग के कपड़े अधिक गर्मी सोखते हैं, जबकि हल्के रंग के कपड़े शरीर को अपेक्षाकृत ठंडा बनाए रखते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि इन वर्गों पर गर्मी का असर तेजी से होता है।
लू लगने के लक्षणों को पहचानना जरूरी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार लू लगने पर शरीर में कई गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें तेज सिरदर्द, अत्यधिक प्यास लगना, चक्कर आना, उल्टी होना, तेज बुखार, कमजोरी और बेहोशी शामिल हैं।
एडवाइजरी में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत छायादार स्थान पर ले जाएं। शरीर पर ठंडा पानी डालें या गीले कपड़े से शरीर को ठंडक पहुंचाएं। जरूरत पड़ने पर तुरंत अस्पताल या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर उपचार न मिलने पर हीट स्ट्रोक जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पशुपालकों के लिए भी जारी हुए दिशा-निर्देश
भीषण गर्मी का असर पशुओं और पक्षियों पर भी पड़ रहा है। पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से कहा है कि वे पशुओं को खुले मैदान या तेज धूप में न बांधें। पशुओं के लिए छायादार और हवादार स्थान की व्यवस्था करना जरूरी है।
पशुओं को दिन में कई बार साफ और ठंडा पानी पिलाने की सलाह दी गई है। पशु शेड के आसपास पानी का छिड़काव करने और गर्मी कम करने के लिए टीन शेड पर सफेद पेंट कराने या गीले बोरे डालने की सलाह दी गई है।
पशु चिकित्सकों के अनुसार गर्मी बढ़ने पर पशुओं में दूध उत्पादन कम होने, भूख कम लगने और बीमारी बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में पशुओं के खानपान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
आग लगने की घटनाओं को लेकर प्रशासन अलर्ट
गर्मी और तेज हवाओं के कारण खेतों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। एडवाइजरी में किसानों से कहा गया है कि वे खेतों के आसपास सूखी घास और ज्वलनशील पदार्थ जमा न होने दें। ट्रांसफॉर्मर और बिजली लाइनों के आसपास विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
इसके अलावा खेतों और खलिहानों के आसपास धूम्रपान न करने तथा आग लगने की स्थिति में तुरंत अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सूचना देने की अपील की गई है।
क्या करें और क्या न करें
राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, संतुलित भोजन करने और धूप में निकलने से बचने की सलाह दी गई है। वहीं चाय, कॉफी, शराब और अत्यधिक तैलीय भोजन से दूरी बनाने को कहा गया है क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक गर्मी और बढ़ सकती है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें।
गांवों में बढ़ाई जा रही जागरूकता
ग्राम पंचायतों, कृषि विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने का अभियान भी चलाया जा रहा है। किसानों को खेतों में सुरक्षित तरीके से काम करने और पशुओं की देखभाल को लेकर जानकारी दी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल गर्मी का असर अधिक गंभीर होता जा रहा है। ऐसे में लोगों को मौसम के बदलते स्वरूप के अनुसार अपनी दिनचर्या और कार्यशैली में बदलाव लाने की जरूरत है।

