PPP और CSR से पंचायतों को मिलेगा विकास का नया आधार!

आत्मनिर्भर पंचायत अभियान को मिली नई गति, कोच्चि में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में वित्तीय सशक्तिकरण पर जोर!

पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम

कोच्चि। ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने और पंचायतों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने केरल सरकार के स्थानीय स्वशासन विभाग के सहयोग से कोच्चि में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पर तीसरी राष्ट्रीय आउटरीच कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में पंचायतों की आय बढ़ाने, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और सतत आर्थिक विकास के मॉडल पर व्यापक चर्चा हुई।

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2047 के विकसित भारत के लक्ष्य में पंचायतों की अहम भूमिका

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम केवल एक योजना नहीं बल्कि पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की परिवर्तनकारी पहल है। उन्होंने कहा कि पंचायतें जमीनी स्तर पर बदलाव की सबसे प्रभावी इकाई हैं और स्थानीय समुदायों को संगठित कर विकास को नई दिशा दे सकती हैं।

उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों से भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी विकास योजनाएं तैयार करने का आह्वान किया, जो वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

आर्थिक आत्मनिर्भरता के बिना मजबूत स्थानीय शासन संभव नहीं

केरल सरकार के स्थानीय स्वशासन विभाग के मंत्री के.एम. शाजी ने कहा कि पंचायतों को लगातार अधिक जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। ऐसे में उनकी दीर्घकालिक स्थिरता के लिए राजस्व के अपने स्रोतों को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त पंचायतें ही प्रभावी और जवाबदेह स्थानीय शासन की आधारशिला बन सकती हैं।

केरल मॉडल की सराहना, क्षमता विकास पर विशेष जोर

स्थानीय स्वशासन विभाग की प्रधान सचिव टिंकू बिस्वाल ने केरल में स्थानीय शासन को मजबूत बनाने के लिए विकसित संस्थागत ढांचे और प्रशिक्षण तंत्र की जानकारी दी।

वहीं, केरल स्थानीय प्रशासन संस्थान (KILA) के महानिदेशक डॉ. एन. देवीदास ने बताया कि निरंतर प्रशिक्षण, योग्यता आधारित शिक्षा और संस्थागत सहयोग ने राज्य में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

दीर्घकालिक विकास योजनाओं पर काम करने की सलाह

स्थानीय स्वशासन विभाग की प्रधान निदेशक डॉ. दिव्या एस. अय्यर ने पंचायतों से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पंचायतें स्थानीय प्राथमिकताओं की पहचान कर पेशेवर परियोजना प्रस्ताव तैयार करें और उन्हें ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) से जोड़ें, जिससे भविष्य की विकास जरूरतों को पूरा किया जा सके।

नाबार्ड और हुडको ने बताई वित्तीय सहायता की संभावनाएं

कार्यशाला में नाबार्ड और हुडको के प्रतिनिधियों ने पंचायतों को उपलब्ध वित्तीय एवं तकनीकी सहायता की जानकारी दी। उन्होंने पंचायतों को ऐसे परियोजना प्रस्ताव तैयार करने के लिए प्रेरित किया जो तकनीकी रूप से मजबूत, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और स्थायी राजस्व सृजन में सक्षम हों।

प्रतिनिधियों ने परियोजना मूल्यांकन, तकनीकी परामर्श, वित्तीय सहयोग और पात्र परियोजनाओं के लिए उपलब्ध संस्थागत सहायता की विस्तृत जानकारी भी साझा की।

प्रश्नोत्तर सत्र में पंचायत प्रतिनिधियों की जिज्ञासाओं का समाधान

कार्यशाला के दौरान संवाद आधारित प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम के क्रियान्वयन, वित्तपोषण और परियोजना स्वीकृति से जुड़े प्रश्न पूछे। अधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी देकर प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया।

डीपीआर, वित्तपोषण और चैलेंज मोड प्रक्रिया पर तकनीकी सत्र

कार्यशाला में विस्तृत तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम की कार्यप्रणाली, पात्रता मानदंड, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया, परियोजना वित्तपोषण, सरकारी योजनाओं के अभिसरण तथा राजस्व सृजन आधारित नवाचार परियोजनाओं की प्रस्तुति और मूल्यांकन पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।

स्थानीय संसाधनों से राजस्व सृजन पर केंद्रित है योजना

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत संचालित आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को स्थानीय संसाधनों, सार्वजनिक परिसंपत्तियों और सामुदायिक संपदाओं की आर्थिक क्षमता का उपयोग कर वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

इस योजना के तहत चयनित पंचायतों को ऋण योग्य परियोजनाओं के विकास के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। इन परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP), कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR), संस्थागत ऋण और विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण का उपयोग किया जाएगा।

810 से अधिक पंचायतों की भागीदारी

हाइब्रिड मोड में आयोजित इस कार्यशाला में केरल की 210 से अधिक पंचायतों के प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि लगभग 600 पंचायतें ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं। कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्रालय, केरल सरकार, नाबार्ड, हुडको और पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायतें स्थानीय संसाधनों, पर्यटन, सामुदायिक परिसंपत्तियों, कृषि आधारित उद्योगों और ग्रामीण उद्यमिता को राजस्व स्रोत के रूप में विकसित करती हैं, तो वे सरकारी अनुदानों पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर वित्तीय मॉडल स्थापित कर सकती हैं। आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम इसी सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।