खरीफ बुवाई को लेकर कृषि मंत्रालय हाई अलर्ट पर!

खरीफ सीजन पर केंद्र की कड़ी नजर: 262 संवेदनशील जिलों की निगरानी, एल नीनो और बारिश की स्थिति की समीक्षा!

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कृषि भवन, नई दिल्ली में खरीफ फसलों की बुवाई, मानसून की प्रगति, एल नीनो के संभावित प्रभाव, वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों, उर्वरकों की उपलब्धता और खाद्यान्न भंडारण की स्थिति को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में देशभर में कृषि गतिविधियों और किसानों की जरूरतों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

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अगले कुछ दिनों में बढ़ सकती है बुवाई की रफ्तार

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि देश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की बुवाई की गति फिलहाल अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। हालांकि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले तीन दिनों में गुजरात, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में अच्छी वर्षा होने की संभावना है। इससे खेतों में नमी बढ़ेगी और किसानों को बुवाई कार्य में तेजी लाने में मदद मिलेगी।

एल नीनो के प्रभाव पर बनी हुई है चिंता

विशेषज्ञों ने बैठक में जानकारी दी कि नवीनतम जलवायु मॉडल के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून पर एल नीनो का प्रभाव बना रह सकता है। एल नीनो की स्थिति कई बार वर्षा के वितरण को प्रभावित करती है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होती है। इसी कारण कृषि मंत्रालय मौसम की बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

262 संवेदनशील जिलों की विशेष निगरानी

कृषि मंत्रालय ने देशभर में 262 संवेदनशील जिलों की पहचान की है, जहां वर्षा की स्थिति और कृषि गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। इन जिलों में राज्यवार बारिश के वितरण का विश्लेषण किया गया है। इसके अलावा 15 अतिरिक्त जिलों को भी चिन्हित किया गया है, जहां अभी भी वर्षा की कमी बनी हुई है और फसलों पर असर पड़ने की आशंका है।

कॉन्टिंजेंसी प्लान को लेकर राज्यों के साथ समन्वय

बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (क्रिडा) द्वारा तैयार की गई रणनीतियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कई राज्यों के साथ जिला स्तर पर आकस्मिक कृषि योजनाओं (कॉन्टिंजेंसी प्लान) की समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जबकि कुछ राज्यों के साथ बैठकें जल्द आयोजित की जाएंगी।

कृषि विज्ञान केंद्रों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश

कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को निर्देश दिए गए हैं कि वे संभावित सूखा या कम वर्षा की स्थिति में किसानों को तत्काल तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएं। किसानों को कम अवधि वाली फसल किस्मों, नमी संरक्षण तकनीकों और वैकल्पिक खेती के उपायों की जानकारी देने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त बीज उपलब्ध

बैठक में बताया गया कि खरीफ सीजन के लिए बीजों की उपलब्धता पर्याप्त है। राष्ट्रीय बीज निगम द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप बीज भंडार की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी राज्य में बीज की कमी न होने पाए। सरकार का प्रयास है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराए जाएं।

जलाशयों में जल भंडारण पिछले वर्ष से कम

जल संसाधनों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में कम है। हालांकि अधिकांश क्षेत्रों में भूजल की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है, जो कृषि क्षेत्र के लिए राहत की बात मानी जा रही है।

उर्वरकों की उपलब्धता और मंडी भावों पर भी चर्चा

बैठक में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और प्रमुख कृषि मंडियों के साप्ताहिक भावों की भी समीक्षा की गई। केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ समन्वय बनाकर किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने तथा आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया है।

किसानों को राहत देने की तैयारी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मानसून सक्रिय होता है तो खरीफ फसलों की बुवाई में उल्लेखनीय तेजी आएगी। वहीं सरकार संभावित जोखिमों को देखते हुए आकस्मिक योजनाओं और वैज्ञानिक सलाह के माध्यम से किसानों को राहत पहुंचाने की तैयारी में जुटी हुई है।