21 देशों के 34 विशेषज्ञों ने कृषि उद्यमिता और नवाचार प्रबंधन पर दो-सप्ताहीय प्रशिक्षण पूरा किया
ICRISAT–ITEC ने ग्लोबल साउथ में एग्री-उद्यमिता क्षमता बढ़ाने के लिए शुरू किया अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम
21 देशों के 34 विशेषज्ञों ने एग्री-इनोवेशन, स्टार्टअप मॉडल और वैल्यू चेन मैनेजमेंट पर हासिल की उन्नत प्रशिक्षण
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हैदराबाद। कृषि क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ICRISAT और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के तहत संचालित ITEC कार्यक्रम ने संयुक्त रूप से एक विशेष दो-सप्ताहीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। “फॉस्टरिंग इनोवेशन एंड आंत्रप्रिन्योरशिप इन एग्रीकल्चर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट” शीर्षक वाला यह कार्यक्रम 17 से 28 नवंबर 2025 तक आयोजित हुआ। इसमें एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और पैसिफिक क्षेत्र के 21 देशों से आए 34 विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में कृषि अनुसंधान, विस्तार सेवाओं, ग्रामीण विकास, नीति निर्माण और एग्रीबिजनेस से जुड़े अधिकारी और प्रोफेशनल शामिल थे।
ग्लोबल एग्रीफूड इनोवेशन का बढ़ता महत्व
ग्लोबल स्तर पर एग्रीफूड इनोवेशन निवेश वर्ष 2024 में 16 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है, जो खाद्य प्रणाली को आधुनिक और टिकाऊ बनाने की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाता है। लेकिन इसके बावजूद निम्न और मध्यम आय वाले देशों से केवल 5 प्रतिशत एग्री-स्टार्टअप ही उभरकर सामने आते हैं, जबकि विश्व का एक-तिहाई भोजन इन्हीं क्षेत्रों में उत्पादित होता है। यह अंतर दर्शाता है कि ग्लोबल साउथ में कृषि-उद्यमिता, नवाचार प्रबंधन और स्केलेबल बिजनेस मॉडल को बढ़ावा देने के लिए क्षमता निर्माण कितना आवश्यक है।
ICRISAT के महानिदेशक ने नवाचार को बताया कृषि का भविष्य
ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि टिकाऊ, पोषण-संवेदनशील और जलवायु-सहिष्णु कृषि प्रणालियाँ तभी विकसित हो सकती हैं जब कृषि विशेषज्ञों और उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर नवाचार और नेतृत्व की कौशल प्राप्त हों।
उन्होंने कहा, “ICRISAT का यह प्रयास एक ऐसे वैश्विक नेतृत्व समूह का निर्माण करेगा जो एग्रीफूड सिस्टम में परिवर्तन का नेतृत्व कर सके।”
इनोवेशन से मार्केट तक—उद्योग अग्रणियों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में 23 विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए, जिन्हें 16 उद्योग विशेषज्ञों और ICRISAT के 7 वैज्ञानिकों ने संबोधित किया। Zepto, ITC लिमिटेड, Yara International, AgHub, NutriHub–IIMR, DeHaat, MANAGE, World Vegetable Center, DCM Shriram, Heifer International, HarvestPlus, Inera Crop Science और Caspian Pvt. Ltd. जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने प्रतिभागियों को मेंटरशिप दी।
DeHaat के सह-संस्थापक श्याम सुंदर सिंह ने कहा कि कृषि-उद्यमिता तभी सफल हो सकती है जब स्टार्टअप किसान हितों को प्राथमिकता दें और उनके लिए बाज़ार तक पहुँच आसान बनाएं। उनका कहना था,
“व्यावहारिक प्रशिक्षण से सशक्त हुए पेशेवर एग्री-स्टार्टअप को अधिक प्रभावशाली और स्केलेबल समाधान प्रदान करने में सक्षम बनेंगे।”
Zepto के हेड–फ्रेश बिजनेस श्रीनिवास स्वैन ने स्टार्टअप्स के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवहारिक मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का बेहतर उपयोग, उपभोक्ता व्यवहार की समझ और कुशल आपूर्ति श्रृंखला ही किसी भी एग्रीटेक संस्था की सफलता तय करती है।
इनोवेशन हबों का दौरा—व्यावहारिक सीख पर जोर
प्रतिभागियों को MANAGE, NutriHub, AgHub, NAARM और Ni-MSME सहित देश के प्रमुख नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम केंद्रों का भ्रमण भी कराया गया। इससे उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि कैसे अनुसंधान, उद्योग और उद्यमिता के बीच तालमेल से बाजार-उन्मुख और प्रभावी एग्रीटेक समाधान विकसित होते हैं।
तेलंगाना सरकार की SERP की CEO दिव्या देवराजन (IAS) ने प्रतिभागियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा सीखे गए कौशल वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
कार्यक्रम के प्रमुख लाभ और परिणाम
ICRISAT के एग्रीबिजनेस इनोवेशन प्लेटफॉर्म (AIP) के CEO और कोर्स डायरेक्टर डॉ. दिनेश चौहान ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को—
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उद्यमिता संबंधी उन्नत कौशल,
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टिकाऊ वैल्यू चेन मॉडल की समझ,
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एग्रीबिजनेस प्रोजेक्ट डेवलपमेंट में दक्षता,
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देश-स्तरीय एक्शन प्लान की तैयारी,
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और वैश्विक सहयोग नेटवर्क को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण कौशल प्रदान किए।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल व्यक्तिगत क्षमता निर्माण का माध्यम है, बल्कि ग्लोबल साउथ में कृषि नवाचार और खाद्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक लंबी छलांग है।
इस प्रकार ICRISAT और ITEC का यह संयुक्त प्रयास उभरती अर्थव्यवस्थाओं में कृषि उद्यमिता को गति देने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।