किसानों को किफायती दर पर खाद देने की पहल

डीएपी कंपनियों के लिए स्पेशल पैकेज

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नए साल की पहली कैबिनेट बैठक में किसानों के हित में अहम फैसले लिए गए हैं। इनमें डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) खाद बनाने वाली कंपनियों के लिए विशेष पैकेज को मंजूरी दी गई है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य किसानों को सस्ते और किफायती दरों पर डीएपी खाद उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।

डीएपी कंपनियों के लिए स्पेशल पैकेज

सरकार ने डीएपी बनाने वाली कंपनियों को सब्सिडी के साथ-साथ अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने का फैसला किया है। यह सहायता 31 दिसंबर 2025 तक लागू रहेगी। इसके तहत कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से राहत दी जाएगी। चूंकि भारत डीएपी की कुल मांग का एक बड़ा हिस्सा चीन, सऊदी अरब और मोरक्को जैसे देशों से आयात करता है, इसलिए इस योजना के जरिए लागत को नियंत्रित करने की कोशिश की गई है।

किसानों को सीधा फायदा

डीएपी की कीमतों पर नियंत्रण: इस योजना से डीएपी की कीमतों को स्थिर रखा जाएगा, जिससे किसानों को बाजार की उथल-पुथल का सामना नहीं करना पड़ेगा।

खाद पर ज्यादा सब्सिडी: किसानों को अधिक सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जिससे वे उच्च गुणवत्ता वाले फर्टिलाइजर्स का उपयोग कर सकें।

किफायती बीमा: सरकार ने फसल बीमा योजना को भी सरल और किसान-हितैषी बनाने का निर्णय लिया है। सस्ते बीमा दरों और आसान प्रक्रियाओं के जरिए किसानों को व्यापक सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

डीएपी का महत्व

डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) एक प्रमुख फर्टिलाइजर है, जिसमें फास्फोरस और नाइट्रोजन का उच्च स्तर होता है। यह तेजी से पानी में घुलने वाला खाद है, जो फसल और पौधों के विकास में सहायक है। इसे अमोनिया और फॉस्फोरिक एसिड की रिएक्शन से तैयार किया जाता है। डीएपी न केवल कृषि क्षेत्र बल्कि अन्य उद्योगों के लिए भी उपयोगी है।

कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन

सरकार का यह कदम किसानों की आय बढ़ाने, उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और कृषि उत्पादकता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक अहम पहल है। डीएपी की सस्ती उपलब्धता से खेती-किसानी के प्रति नए उत्साह का संचार होगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारत की रणनीति

भारत डीएपी की मांग का बड़ा हिस्सा आयात करता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के कारण डीएपी की लागत में वृद्धि होती है। इस चुनौती का सामना करने के लिए सरकार ने यह सब्सिडी और सहायता योजना लागू की है, जो किसानों और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।

सरकार के इस निर्णय से किसानों को न केवल राहत मिलेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा और आत्मनिर्भरता का माहौल भी तैयार होगा। यह कदम भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।