केंद्र ने मजबूत किया बफर स्टॉक, धान रोपाई से पहले किसानों को राहत !!
नई दिल्ली/चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने पंजाब के किसानों को आश्वस्त किया है कि चालू खरीफ 2026 सीजन में यूरिया की कोई कमी नहीं है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत उर्वरक विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में धान की रोपाई के लिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है और आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सुरक्षित बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की आपूर्ति को प्रभावित करने वाली चुनौतियों के बावजूद केंद्र सरकार ने पंजाब में रिकॉर्ड स्तर पर यूरिया उपलब्ध कराया है।
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मांग से अधिक उपलब्धता, किसानों को मिलेगी निर्बाध आपूर्ति !!
उर्वरक विभाग के अनुसार खरीफ 2026 सीजन में पंजाब की कुल यूरिया आवश्यकता 14.50 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) आंकी गई है। 9 जून 2026 तक राज्य की आनुपातिक आवश्यकता 9.0 एलएमटी थी, जबकि केंद्र सरकार ने 10.71 एलएमटी यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी है। यह मांग के मुकाबले लगभग 19 प्रतिशत अधिक उपलब्धता को दर्शाता है। इस अवधि में राज्य में 6.25 एलएमटी यूरिया की बिक्री हुई है, जिसके बावजूद 4.46 एलएमटी का क्लोजिंग स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही 39,167 मीट्रिक टन यूरिया परिवहन के दौरान है, जिससे कुल उपलब्ध स्टॉक बढ़कर 4.85 एलएमटी तक पहुंच गया है।
अमृतसर में भी पर्याप्त भंडार !!
अमृतसर जिले में खरीफ सीजन के दौरान अब तक 64,720 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान में जिले के पास 32,956 मीट्रिक टन सुरक्षित स्टॉक मौजूद है, जो आगामी कृषि गतिविधियों के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
रबी सीजन में भी रहा रिकॉर्ड प्रदर्शन !!
उर्वरक विभाग के आंकड़ों के अनुसार रबी 2025-26 सीजन में पंजाब की अनुमानित मांग 15.00 एलएमटी थी, जबकि केंद्र सरकार ने 19.43 एलएमटी यूरिया उपलब्ध कराया। इस दौरान कुल बिक्री 15.45 एलएमटी दर्ज की गई, जो अनुमानित मांग से अधिक रही।
अग्रिम भंडारण रणनीति से मजबूत हुई आपूर्ति व्यवस्था !!
केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की तैयारी पहले ही शुरू कर दी थी। जनवरी से मार्च 2026 के बीच पंजाब की 3.50 एलएमटी आवश्यकता के मुकाबले 6.08 एलएमटी यूरिया की आपूर्ति कर दी गई थी। इससे सीजन शुरू होने से पहले ही 2.58 एलएमटी अतिरिक्त यूरिया का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति धान रोपाई के चरम समय में किसी भी संभावित कमी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
बढ़ी यूरिया खपत, फिर भी नियंत्रण में स्थिति !!
1 मार्च से 9 जून 2026 के बीच पंजाब में 7.86 एलएमटी यूरिया की बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 76 हजार मीट्रिक टन अधिक है। पिछले रबी सीजन में भी बिक्री अनुमान से 45 हजार मीट्रिक टन अधिक रही थी। बढ़ी हुई मांग के बावजूद केंद्र सरकार लगातार अतिरिक्त आपूर्ति के माध्यम से राज्य के बफर स्टॉक को मजबूत बनाए हुए है।
वैश्विक संकट के बीच भारत की उर्वरक रणनीति सफल !!
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्वरक बाजार इस समय कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान से जुड़े तनावों के कारण वैश्विक आपूर्ति एवं समुद्री परिवहन पर दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद भारत सरकार ने घरेलू कृषि क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई। उर्वरक विभाग ने प्राकृतिक गैस की स्पॉट खरीद के लिए ईपीएमसी तंत्र को सक्रिय किया, जिससे घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ा। साथ ही पूरे वर्ष रणनीतिक आयात नीति अपनाकर देशभर में उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता बनाए रखी गई।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती के निर्देश !!
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना उसकी जिम्मेदारी है, जबकि जिलों और क्षेत्रों के बीच समान वितरण सुनिश्चित करना राज्य सरकारों का दायित्व है। यूरिया की कालाबाजारी, जमाखोरी और गैर-कृषि उपयोग में डायवर्जन रोकने के लिए राज्यों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। केंद्र और राज्यों के अधिकारियों के बीच नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्थिति की समीक्षा की जा रही है। प्रमुख निर्देश रियायती यूरिया को औद्योगिक या गैर-कृषि उपयोग में भेजने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई। जमाखोरी और कालाबाजारी में शामिल तत्वों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई। किसानों तक समय पर और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना। वास्तविक मांग के अनुसार उपलब्धता प्रबंधन पर विशेष निगरानी।
किसानों के हित सर्वोपरि !!
धान रोपाई के महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहे पंजाब के किसानों के लिए यह राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने कहा है कि राज्य में यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता है और किसानों को किसी भी प्रकार की चिंता करने की वश्यकता नहीं है। उर्वरक उत्पादक एवं आयातक कंपनियों को भी राज्य की वास्तविक मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि किसानों के हितों की रक्षा और खाद उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है।
चित्र: प्रतीकात्मक

