Policy Innovation Hub से बदलेगा खेती का भविष्य!

इंडिया पॉलिसी इनोवेशन हब’ लॉन्च: वैज्ञानिक शोध के आधार पर बनेंगी कृषि नीतियां

नई दिल्ली, – भारत में कृषि और खाद्य प्रणाली से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में एक अहम पहल के तहत इंडिया पॉलिसी इनोवेशन हब का शुभारंभ किया गया। यह हब CGIAR के वैश्विक ‘पॉलिसी इनोवेशंस’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शोध और नीतियों के बीच की दूरी को कम करना है।

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नई दिल्ली स्थित NASC Complex में आयोजित एक उच्चस्तरीय नीति संवाद कार्यक्रम के दौरान Dr Raka Saxena ने इस हब का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर देश-विदेश के वरिष्ठ वैज्ञानिक, नीति निर्माता और कृषि विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे।

विकसित भारत’ विजन से जुड़ी पहल

यह हब International Crops Research Institute for the Semi-Arid Tropics और Indian Council of Agricultural Research जैसे अग्रणी संस्थानों के शोध को नीति निर्माण से जोड़ने का कार्य करेगा। साथ ही, इसे NITI Aayog के सहयोग से “विकसित भारत” के विजन के अनुरूप आगे बढ़ाया जाएगा।

इस मंच के जरिए वैज्ञानिक आंकड़ों और शोध निष्कर्षों को सीधे नीति निर्माण में शामिल किया जाएगा, जिससे कृषि क्षेत्र में अधिक सटीक और प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।

नीति संवाद में जुटे देश-विदेश के दिग्गज

कार्यक्रम के दौरान “विकसित भारत के संदर्भ में साक्ष्य-आधारित खाद्य प्रणाली परिवर्तन” विषय पर गहन चर्चा हुई। इस संवाद में वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि, वैश्विक शोध संस्थानों के प्रमुख और नीति विशेषज्ञों ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में Prof Ashok Gulati, Dr Madhura Swaminathan, Dr Raghavendra Bhatta और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

साक्ष्य-आधारित नीतियों पर जोर

Prof Ramesh Chand ने अपने संबोधन में कहा कि भारत जैसे विविध और जटिल देश में नीतियों को केवल धारणाओं पर नहीं, बल्कि ठोस साक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह हब नीति निर्माण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देगा और गलत धारणाओं को दूर करने में मदद करेगा।

वहीं, Dr Clemens Breisinger ने कहा कि यह पहल वैश्विक और स्थानीय स्तर पर ज्ञान के आदान-प्रदान को तेज करेगी और नीति निर्माण को अधिक प्रभावी बनाएगी।

कृषि सुधार के अहम मुद्दों पर चर्चा

तकनीकी सत्रों में कृषि और खाद्य प्रणाली से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—

  • मिलेट्स और दलहन फसलों को बढ़ावा देने की रणनीतियां
  • चावल और अन्य अनाज आधारित कृषि प्रणाली में सुधार
  • कृषि में विविधीकरण को बढ़ावा
  • सब्सिडी संरचना में सुधार और संसाधनों का बेहतर उपयोग
  • वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का विश्लेषण
  • राजनीतिक अर्थव्यवस्था (Political Economy) के पहलुओं पर ध्यान

इन चर्चाओं का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, लचीला और लाभकारी बनाना था।

ग्लोबल संस्थानों की भागीदारी

कार्यक्रम में International Food Policy Research Institute सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने भाग लिया। Dr Himanshu Pathak ने कहा कि यह हब साझेदारी को मजबूत करेगा और समावेशी नीतियों के निर्माण में मदद करेगा।

वहीं, Dr Shahidur Rashid ने इसे एक ऐसा मंच बताया, जो वैश्विक अनुभवों को स्थानीय जरूरतों के साथ जोड़ने में सक्षम होगा।

राज्यों में ‘पॉलिसी लैब’ स्थापित करने की योजना

हब के सह-नेतृत्वकर्ता Dr Shalander Kumar ने बताया कि आगे चलकर विभिन्न राज्यों में ‘पॉलिसी लैब’ स्थापित की जाएंगी। इन लैब्स के माध्यम से—

  • नीतिगत प्रयोग किए जाएंगे
  • साक्ष्य आधारित समाधान तैयार किए जाएंगे
  • राज्यों की जरूरतों के अनुसार नीतियों का परीक्षण होगा

इससे नीति निर्माण की प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनेगी।

नीतियों को व्यवहारिक बनाने पर जोर

समापन सत्र में Sanjay Agarwal ने कहा कि किसी भी नीति को सफल बनाने के लिए उसका आर्थिक रूप से व्यवहार्य, प्रशासनिक रूप से लागू करने योग्य और सामाजिक रूप से स्वीकार्य होना जरूरी है।

कृषि क्षेत्र में बदलाव की नई दिशा

इंडिया पॉलिसी इनोवेशन हब का शुभारंभ भारत में कृषि नीति निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यह पहल न केवल वैज्ञानिक शोध को नीति में बदलने की प्रक्रिया को तेज करेगी, बल्कि देश को “विकसित भारत” के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ाने में भी सहायक साबित होगी।