दिल्ली मेट्रो येलो लाइन पर बनेगा देश का पहला वैज्ञानिक ग्रीन बेल्ट !!
नई दिल्ली, 21 अप्रैल : राजधानी दिल्ली में शहरी हरियाली को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल के तहत ICAR-Indian Agricultural Research Institute और Delhi Metro Rail Corporation के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया गया है। इस समझौते के तहत दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन पर देश का पहला वैज्ञानिक रूप से विकसित ग्रीन बेल्ट तैयार किया जाएगा, जो शहरी प्रदूषण और तापमान जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा।
वैज्ञानिक तकनीकों से बदलेगा कंक्रीट का परिदृश्य !!
इस परियोजना के अंतर्गत आदर्श नगर से जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशनों के बीच लगभग 1.5 किलोमीटर लंबे हिस्से को हरित कॉरिडोर में विकसित किया जाएगा। वर्तमान में यह क्षेत्र कंक्रीट संरचनाओं, भारी ट्रैफिक, प्रदूषण और अत्यधिक गर्मी से प्रभावित है। परियोजना का उद्देश्य इस कठिन भूभाग को वैज्ञानिक तरीकों से एक ऐसे ग्रीन इकोसिस्टम में बदलना है, जो न केवल पर्यावरण को बेहतर बनाए बल्कि शहरी जीवन की गुणवत्ता भी सुधारे।
ICAR-IARI देगा वैज्ञानिक सहयोग और नवाचार !!
परियोजना में ICAR-Indian Agricultural Research Institute प्रमुख भूमिका निभाएगा और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। पौधों का चयन Air Pollution Tolerance Index (APTI) के आधार पर किया जाएगा, ताकि वे प्रदूषण को सहन करते हुए वातावरण को शुद्ध कर सकें। इसके अलावा बायोचार आधारित मृदा सुधार, माइकोराइजा तकनीक और IoT आधारित स्मार्ट सिंचाई प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे पौधों की बेहतर वृद्धि और निरंतर निगरानी सुनिश्चित होगी।
अधिकारियों ने बताया—भविष्य के शहरों के लिए मॉडल !!
इस मौके पर संस्थान के निदेशक च. श्रीनिवास राव ने इसे कृषि विज्ञान को शहरी विकास से जोड़ने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल वायु गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ शहरों को अधिक रहने योग्य बनाएगी। वहीं DMRC के निदेशक मनुज सिंघल ने कहा कि यदि यह पायलट परियोजना सफल होती है, तो इसे पूरे मेट्रो नेटवर्क में लागू किया जा सकता है, जिससे एशिया का सबसे लंबा वैज्ञानिक ग्रीन कॉरिडोर विकसित किया जा सकेगा।
पायलट प्रोजेक्ट से खुलेगा सतत विकास का नया रास्ता !!
करीब ₹20.29 लाख की लागत वाली यह एक वर्षीय पायलट परियोजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। इसमें साइट आकलन, बायोफिलिक डिजाइन और सतत निगरानी जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल होंगे। स्वच्छ वायु, जलवायु अनुकूलन और सतत शहरी विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप यह पहल न केवल दिल्ली बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल के रूप में उभर सकती है।


























