अब आसान होगा कीटनाशक लाइसेंस और उर्वरक मंजूरी!

पीएम मोदी की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को कृषि मंत्रालय ने दी रफ्तार, किसानों और कारोबारियों के लिए प्रक्रियाएं होंगी आसान!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में सुधारों की रफ्तार तेज करते हुए किसानों, खुदरा कारोबारियों और कृषि उद्योग से जुड़े हितधारकों के लिए कई अहम प्रक्रियाओं को सरल बनाने का फैसला किया है। कृषि भवन में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि मंत्रालय अब “कम कागज, ज्यादा सुविधा” के मॉडल पर काम करेगा, ताकि किसानों और कृषि कारोबार से जुड़े लोगों को अनावश्यक सरकारी प्रक्रियाओं से राहत मिल सके।

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बैठक में घरेलू उपयोग के कीटनाशकों की बिक्री एवं भंडारण के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आसान बनाने का बड़ा निर्णय लिया गया। अब मच्छर भगाने वाली मैट, कॉइल, लिक्विड वेपोराइजर और कॉकरोच स्प्रे जैसे उत्पादों की बिक्री करने वाले दुकानदारों को लाइसेंस के लिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। आवेदन पत्र को तीन पन्नों से घटाकर एक पन्ने तक सीमित कर दिया गया है। साथ ही उत्पादों के साथ दिए जाने वाले फिजिकल लीफलेट की व्यवस्था समाप्त कर QR Code आधारित डिजिटल जानकारी की सुविधा लागू की गई है।

सरकार का दावा है कि इस फैसले से देशभर के 40 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं और किराना दुकानदारों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे छोटे कारोबारियों के समय और लागत दोनों में कमी आएगी।

नए उर्वरकों की मंजूरी होगी तेज

बैठक में उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO), 1985 के तहत नए उर्वरकों के पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया को भी सरल बनाने की घोषणा की गई। पहले नए उर्वरकों को मंजूरी देने के लिए तकनीकी समिति और केंद्रीय उर्वरक समिति दोनों की स्वीकृति जरूरी होती थी, लेकिन अब दोहरी व्यवस्था समाप्त कर केवल केंद्रीय उर्वरक समिति को अधिकृत किया गया है।

मंत्रालय के अनुसार इस नई व्यवस्था से अब तक 19 निर्माताओं और आवेदकों को लाभ मिल चुका है। सरकार का मानना है कि इससे नई तकनीक वाले उर्वरक तेजी से बाजार में पहुंच सकेंगे और किसानों को आधुनिक कृषि समाधान जल्द उपलब्ध होंगे।

649 कस्टम पोर्ट्स हुए डिजिटल इंटीग्रेट

कृषि जिंसों के आयात को आसान बनाने के लिए सरकार ने देश के सभी 649 कस्टम पोर्ट्स को डिजिटल रूप से एकीकृत कर दिया है। Plant Quarantine Management System (PQMS) और ICEGATE के बीच एंड-टू-एंड डिजिटल इंटीग्रेशन लागू किया गया है।

अब आयातकों को अलग-अलग विभागों में आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। केवल ICEGATE पर एक आवेदन करने के बाद Import Release Order सीधे लॉगिन पर उपलब्ध हो जाएगा। इससे कृषि आयात प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने के साथ समय की बचत भी होगी।

बीज आयात-निर्यात में खत्म हुई पुरानी बाधाएं

सरकार ने बीज एवं रोपण सामग्री के आयात-निर्यात की प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया है। EXIM Committee को समाप्त कर दिया गया है और “Prior Recommendation” की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है। इससे कृषि क्षेत्र से जुड़े निर्यातकों और आयातकों को तेज मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि अनुसंधान, बीज तकनीक और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

AI आधारित Bharat-VISTAAR प्लेटफॉर्म पर 44 लाख सवाल

बैठक में “भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) – AI in Agriculture” प्लेटफॉर्म की भी समीक्षा की गई। यह केंद्र सरकार का AI आधारित कृषि सूचना मंच है, जहां किसान खेती से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर प्राप्त कर सकते हैं।

17 फरवरी 2026 को लॉन्च किए गए इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 44 लाख से अधिक प्रश्न प्राप्त हो चुके हैं। पहले किसानों को अलग-अलग योजनाओं और सेवाओं की जानकारी के लिए कई पोर्टलों पर जाना पड़ता था, लेकिन अब एकीकृत डिजिटल मंच पर 24 घंटे जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

फील्ड ट्रायल से छूट पर विचार

सरकार नए सुधार के तहत ऐसे अकार्बनिक उर्वरकों को अनिवार्य फील्ड ट्रायल से छूट देने पर भी विचार कर रही है, जो पहले से तय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा करते हों। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो नई तकनीक वाले उर्वरकों की बाजार में एंट्री काफी तेज हो जाएगी।

इस प्रस्ताव पर फिलहाल ICAR, राज्य सरकारों और कृषि उद्योग से व्यापक चर्चा की जा रही है। मंत्रालय का मानना है कि इससे “Ease of Doing Business” को नई मजबूती मिलेगी।

पारदर्शिता और तकनीक पर जोर

बैठक के अंत में कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और सुशासन को बढ़ाने वाले सुधारों को तेजी से लागू किया जाए। सरकार का फोकस किसानों, व्यापारियों, उद्यमियों और कृषि उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों के लिए प्रक्रियाओं को तेज, सरल और प्रभावी बनाना है।