सरकार का संयम मिशन: अब अधिकारी नहीं खरीदेंगे सोना !!

एक साल तक सोना नहीं खरीदेंगे अधिकारी, कार-पूलिंग से लेकर वर्चुअल कॉन्फ्रेंस तक बड़े फैसले ‘खेत बचाओ अभियान’ के जरिए गांव-गांव पहुंचेंगे वैज्ञानिक, संतुलित खाद उपयोग पर होगा जोर !!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अब मितव्ययिता, संसाधन-संरक्षण और आत्मनिर्भरता को केवल नीतिगत संदेश तक सीमित न रखकर उसे प्रशासनिक व्यवहार का हिस्सा बनाना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समय-समय पर दिए गए “कम संसाधनों में अधिक परिणाम” और “राष्ट्रहित में संयम” के संदेश को अमल में लाने की दिशा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई बड़े और प्रतीकात्मक फैसले लिए हैं।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सरकारी खर्च कम करने, ऊर्जा और ईंधन बचाने, डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने और कृषि क्षेत्र में संतुलित संसाधन उपयोग सुनिश्चित करने को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की गई। बैठक में कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि शिक्षा विभाग और भूमि संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

इस बैठक की सबसे चर्चित और असाधारण घोषणा वह रही, जिसमें मंत्रालय के अधिकारियों ने अगले एक वर्ष तक स्वैच्छिक रूप से सोना नहीं खरीदने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने कहा कि केवल बेटी की शादी या किसी अत्यंत विशेष पारिवारिक परिस्थिति में ही इस संकल्प से छूट होगी। इसे किसी सरकारी आदेश के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्रहित में व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामाजिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

बैठक में मौजूद अधिकारियों के अनुसार, यह कदम केवल आर्थिक बचत का प्रतीक नहीं बल्कि उपभोग आधारित जीवनशैली के बजाय जिम्मेदार नागरिकता की दिशा में एक संदेश है। मंत्रालय का मानना है कि यदि समाज का प्रभावशाली वर्ग संयम अपनाएगा तो आम जनता के बीच भी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की सोच मजबूत होगी।

सरकार खुद से शुरू करेगी बचत अभियान !!

बैठक में स्पष्ट संकेत दिए गए कि सरकार अब बचत और मितव्ययिता की शुरुआत खुद से करना चाहती है। यही कारण है कि सरकारी बैठकों, दौरों, ऊर्जा उपयोग और प्रशासनिक खर्चों की समीक्षा कर कई व्यवहारिक फैसले लिए गए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी तंत्र खुद अनुशासन अपनाएगा तो समाज में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।

अब वर्चुअल मोड में होंगी जोनल कॉन्फ्रेंस !!

सरकारी खर्चों में कटौती की दिशा में सबसे पहला निर्णय आगामी दो जोनल कॉन्फ्रेंस को लेकर लिया गया। गुवाहाटी और विशाखापट्टनम में प्रस्तावित ये बैठकें अब फिजिकल मोड के बजाय वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जाएंगी। मंत्रालय का मानना है कि इससे यात्रा, होटल, लॉजिस्टिक्स, भोजन, सभागार और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाला भारी खर्च बचेगा। साथ ही राज्यों के अधिकारियों और हितधारकों के साथ संवाद प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होगी।अधिकारियों का कहना है कि कोविड काल के दौरान विकसित हुई डिजिटल प्रशासनिक व्यवस्था अब स्थायी सरकारी संस्कृति का हिस्सा बनती जा रही है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकें समय, संसाधन और ऊर्जा — तीनों की बचत करती हैं।

बिजली बचत के लिए सख्त निर्देश !!

ऊर्जा संरक्षण को लेकर भी मंत्रालय ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी विभागों में निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यकता न होने पर लाइट, पंखे, एयर कंडीशनर, कंप्यूटर और अन्य विद्युत उपकरण तुरंत बंद किए जाएं। मंत्रालय ने यह भी तय किया है कि एयर कंडीशनर के उपयोग को नियंत्रित और व्यवस्थित किया जाएगा ताकि अनावश्यक बिजली खपत रोकी जा सके। अधिकारियों का मानना है कि यदि बड़े सरकारी कार्यालय ऊर्जा अनुशासन का पालन करें तो राष्ट्रीय स्तर पर बिजली बचत का बड़ा प्रभाव दिखाई दे सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग वाले देश में सरकारी संस्थानों द्वारा अपनाए गए ऐसे कदम भविष्य में ऊर्जा प्रबंधन की नई संस्कृति बना सकते हैं।

20 प्रतिशत कर्मचारियों को मिलेगा वर्क फ्रॉम होम !!

बैठक में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक लचीला और कम खर्चीला बनाने के लिए लगभग 20 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए रोटेशन आधारित वर्क फ्रॉम होम लागू करने का निर्णय लिया गया। हालांकि मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इससे फाइल निस्तारण, समन्वय, बैठकों और राज्य सरकारों से जुड़े काम प्रभावित नहीं होने चाहिए। घर से काम कर…