बीज से पशुधन तक बढ़ेगा अंतरराष्ट्रीय सहयोग!

ICAR ने बढ़ाया ग्लोबल सहयोग का दायरा, ताजिकिस्तान और ILRI के साथ कृषि व पशुधन विकास पर बनी सहमति

नई दिल्ली, 23 जुलाई। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि अनुसंधान, नवाचार और पशुधन विकास के क्षेत्र में अपने ग्लोबल सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। गुरुवार को नई दिल्ली में आईसीएआर मुख्यालय में ताजिकिस्तान और केन्या के प्रतिनिधिमंडलों के साथ अलग-अलग उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें कृषि, खाद्य सुरक्षा, पशुधन विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान सहयोग को विस्तार देने पर चर्चा हुई।

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भारत-ताजिकिस्तान कृषि सहयोग को मिलेगा नया आयाम

ताजिकिस्तान गणराज्य के भारत में राजदूत एच.ई. लुकमोन बोबोकालोनजोदा ने कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट से मुलाकात कर कृषि अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

बैठक में बीज उत्पादन, पर्वतीय कृषि (हिल एग्रीकल्चर), कृषि-खाद्य प्रणालियां (Agri-Food Systems), कृषि गहनता (Intensification) तथा फसल विविधीकरण (Diversification) जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्राथमिकता दी गई। दोनों पक्षों ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए संयुक्त प्रयासों पर सहमति व्यक्त की।

विज्ञान आधारित तकनीकों से मिलेगा सहयोग

डॉ. एम.एल. जाट ने ताजिकिस्तान को आश्वस्त किया कि आईसीएआर विज्ञान-आधारित आधुनिक तकनीकों, विशेषज्ञ ज्ञान और अनुसंधान सहयोग के माध्यम से इन प्राथमिकताओं को पूरा करने में हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों के बीच चल रही कार्ययोजना (Work Plan) को संशोधित कर नई प्राथमिकताओं को शामिल किया जाए, ताकि द्विपक्षीय सहयोग को और प्रभावी बनाया जा सके।

पर्वतीय कृषि और खाद्य सुरक्षा पर विशेष फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ताजिकिस्तान दोनों देशों में पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन, सीमित कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए साझा अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग दोनों देशों के किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

आईसीएआर-आईएलआरआई साझेदारी को भी मिली मजबूती

इसी दिन अंतरराष्ट्रीय पशुधन अनुसंधान संस्थान (आईएलआरआई), केन्या के महानिदेशक डॉ. अपोलिनायर जिकेंग ने भी डॉ. एम.एल. जाट से मुलाकात की। बैठक में आईसीएआर और आईएलआरआई के बीच चल रहे सहयोग को और मजबूत बनाने तथा वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के लिए पशुधन आधारित समाधान विकसित करने पर चर्चा हुई।

दोनों संस्थानों ने पशुधन प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य, जलवायु-स्मार्ट पशुपालन, आनुवंशिक सुधार और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए नई कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति जताई।

छोटे किसानों और पशुपालकों को होगा लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार, कृषि और पशुधन क्षेत्र में बढ़ता अंतरराष्ट्रीय सहयोग विकासशील देशों के छोटे किसानों और पशुपालकों के लिए नई संभावनाएं लेकर आएगा। उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और जलवायु-अनुकूल कृषि मॉडल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि करने में मदद करेंगे।

भारत बन रहा वैश्विक कृषि सहयोग का केंद्र

हाल के वर्षों में आईसीएआर ने एशिया, अफ्रीका और अन्य विकासशील देशों के साथ कृषि अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग का दायरा तेजी से बढ़ाया है। ताजिकिस्तान और आईएलआरआई के साथ हुई ये बैठकें भारत की उस रणनीति को मजबूत करती हैं, जिसके तहत वैज्ञानिक नवाचार, तकनीकी साझेदारी और ज्ञान हस्तांतरण के माध्यम से वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी

ताजिकिस्तान के राजदूत के साथ नई दिल्ली स्थित दूतावास के द्वितीय सचिव डेलर हबीबोव मौजूद रहे। वहीं आईसीएआर की ओर से सहायक महानिदेशक (अंतरराष्ट्रीय संबंध) डॉ. नवीन पी. सिंह तथा अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रभाग के अधिकारी उपस्थित थे। आईएलआरआई बैठक में क्षेत्रीय निदेशक डॉ. हुंग न्गुयेन, भारत प्रतिनिधि डॉ. राम प्रतिम डेका, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. राघवेंद्र भट्टा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए

Source: ICAR