भारत मंडपम में डेयरी सेक्टर का मंथन, ‘विकसित भारत 2027’ के लक्ष्य में किसानों की भागीदारी पर जोर!!
नई दिल्ली– राजधानी स्थित अनुगा फूडटेक इंडिया डेयरी 2026 के दौरान भारत मंडपम में आयोजित उच्चस्तरीय CEO राउंडटेबल में देश के डेयरी सेक्टर के शीर्ष विशेषज्ञों, उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लेकर डेयरी उद्योग के भविष्य, चुनौतियों और संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता डॉ. मीनश सी शाह ने की, जबकि संचालन निखिल चितले द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ. जीएस राजोरिया, डॉ. राकेश मोहन जोशी, राहुल कुमार सहित कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
ग्रामीण भारत को मुख्यधारा में लाए बिना संभव नहीं ‘विकसित भारत’ !!
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. शाह ने स्पष्ट कहा कि ‘विकसित भारत 2027’ का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब ग्रामीण भारत—विशेषकर डेयरी किसानों—को देश की आर्थिक मुख्यधारा में प्रभावी रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन आज भी लगभग 60–65 प्रतिशत ग्रामीण आबादी आर्थिक योगदान के स्तर पर पूरी तरह प्रतिनिधित्व नहीं कर पा रही है। ऐसे में डेयरी सेक्टर इस अंतर को पाटने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
डेयरी सेक्टर: समावेशी विकास का मजबूत आधार !!
डॉ. शाह ने डेयरी उद्योग को “समावेशी विकास का इंजन” बताते हुए कहा कि किसानों के लिए सुनिश्चित बाजार (Assured Market Access) सबसे महत्वपूर्ण कारक है। उन्होंने झारखंड और महाराष्ट्र के उदाहरण देते हुए बताया कि जहां मजबूत दुग्ध खरीद प्रणाली और उचित मूल्य उपलब्ध होता है, वहां किसान स्वतः ही डेयरी गतिविधियों में निवेश करने लगते हैं। इससे दूध उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में तेजी से सुधार होता है।
सरकारी योजनाओं से मिल रहा संबल !!
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाएं डेयरी क्षेत्र को नई दिशा दे रही हैं। विशेष रूप से Animal Husbandry Infrastructure Development Fund (AHIDF) का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह योजना डेयरी प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ावा देती है, जिससे पूरे सप्लाई चेन को मजबूती मिलती है। साथ ही White Revolution 2.0 पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह अभियान डेयरी सहकारी समितियों के विस्तार, दूध खरीद प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और अधिक किसानों को संगठित नेटवर्क से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
गांवों में अभी भी बड़ी संभावनाएं !!
NDDB चेयरमैन ने चिंता जताई कि देश के अनेक गांव आज भी संगठित दुग्ध खरीद प्रणाली से वंचित हैं। उन्होंने इसे एक बड़ी संभावना बताते हुए कहा कि यदि इन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए, तो डेयरी सेक्टर में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल विस्तार ही नहीं, बल्कि उत्पादकता बढ़ाने पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगा दूध उत्पादन !! 
डॉ. शाह ने वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF), बेहतर पशु स्वास्थ्य प्रबंधन और संतुलित पोषण जैसी पहलें दूध उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचारों के जरिए सीमित संसाधनों में भी अधिक उत्पादन संभव है।
देशी नस्लों के संरक्षण पर जोर !!
उन्होंने राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) का उल्लेख करते हुए बताया कि यह योजना देशी पशु नस्लों के संरक्षण, जेनेटिक सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे किसानों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध हो रहे हैं, जो अधिक उत्पादक और टिकाऊ हैं।
बदलती खानपान आदतों से बढ़ेगी मांग !!
डॉ. शाह ने कहा कि देश में बढ़ती आय के साथ लोगों की खानपान आदतों में बदलाव आ रहा है। अब कार्बोहाइड्रेट आधारित भोजन से प्रोटीन युक्त आहार की ओर रुझान बढ़ रहा है। भारत जैसे लैक्टो-शाकाहारी देश में दूध और डेयरी उत्पाद प्रोटीन का प्रमुख स्रोत बने रहेंगे, जिससे इस क्षेत्र की मांग में लगातार वृद्धि होगी।
डेयरी: सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का माध्यम !!
अपने संबोधन के अंत में डॉ. शाह ने कहा कि डेयरी केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि अधिक से अधिक किसानों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ा जाए और उत्पादकता बढ़ाई जाए, तो यह क्षेत्र ग्रामीण आय को दोगुना करने के साथ-साथ भारत को वैश्विक डेयरी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।

