आदिवासी किसानों को मिला पोषणयुक्त धान का बीज, DRR धान 48 की खेती से बढ़ेगी आय और पोषण
महबूबाबाद (तेलंगाना),– पोषण सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIRR) के सीआरपी-बायोफोर्टिफिकेशन परियोजना के तहत अनुसूचित जनजाति उपयोजना (TSP) के अंतर्गत “राइस बायोफोर्टिफिकेशन जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा बीज वितरण” का आयोजन तेलंगाना के महबूबाबाद जिले के थल्लापूसापल्ली गांव में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन एस. वी. साई प्रसाद और डॉ. ज्योति बद्री द्वारा केसमुद्रम किसान उत्पादक संगठन (FPO) के सहयोग से किया गया।
पोषणयुक्त धान की खेती पर दिया गया विशेष जोर
कार्यक्रम का समन्वय तेलंगाना राज्य एफपीओ के अध्यक्ष एवं केसमुद्रम एफपीओ के चेयरपर्सन जयपाल रेड्डी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में किसानों को बायोफोर्टिफाइड धान किस्म DRR धान 48 की विशेषताओं से अवगत कराया और बताया कि यह किस्म बेहतर पोषण के साथ-साथ किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ भी प्रदान कर सकती है।
क्या है राइस बायोफोर्टिफिकेशन?
तकनीकी सत्र में डॉ. ज्योति बद्री ने किसानों को धान बायोफोर्टिफिकेशन की अवधारणा समझाते हुए बताया कि इस तकनीक के माध्यम से धान के दानों में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाई जाती है। इससे कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद मिलती है और उपभोक्ताओं को अधिक पौष्टिक भोजन उपलब्ध होता है।
उन्होंने DRR धान 48 की प्रमुख विशेषताओं, इसकी खेती की तकनीक, स्वास्थ्य लाभ तथा बाजार में इसकी संभावित मांग पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों के अनुसार बायोफोर्टिफाइड फसलों का महत्व आने वाले वर्षों में और बढ़ेगा क्योंकि उपभोक्ता अब पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
102 आदिवासी किसानों को वितरित किया गया बीज
कार्यक्रम के दौरान 102 आदिवासी किसानों को DRR धान 48 का बीज वितरित किया गया, ताकि वे आगामी सीजन में इस उन्नत एवं पोषणयुक्त किस्म की खेती कर सकें। इस पहल से आदिवासी क्षेत्रों में पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रगतिशील किसान ने साझा किए अनुभव
निजामाबाद के प्रगतिशील किसान विनय कुमार, जो पहले से DRR धान 48 की खेती कर रहे हैं, ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस किस्म ने उन्हें बेहतर उत्पादन और आर्थिक लाभ दिया है। उन्होंने किसानों को इस किस्म को अपनाने के लिए प्रेरित किया और इसके व्यावहारिक लाभों पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने दी वैज्ञानिक जानकारी
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. पामिडी वेंकटेश्वरलु तथा कृषि विभाग के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक उपेंद्र रेड्डी भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीजों के उपयोग और पोषण आधारित खेती के महत्व पर जानकारी दी।
पोषण और समृद्धि की ओर बढ़ता कदम
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने बायोफोर्टिफाइड धान की खेती में रुचि दिखाई और इसे अपनाने का संकल्प लिया। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहलें न केवल किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में सहायक हैं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पोषण संबंधी चुनौतियों से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। DRR धान 48 जैसी पोषणयुक्त किस्में भविष्य की टिकाऊ और स्वास्थ्य-केंद्रित कृषि का मजबूत आधार बन सकती हैं।
Source: ICAR-IIRR


























