राष्ट्रीय उर्वरक जागरूकता अभियान, किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग की दी गई जानकारी
गाज़ीपुर/वाराणसी, 23 अप्रैल –किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भाकृअनुप–भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी द्वारा राष्ट्रीय उर्वरक जागरूकता अभियान के तहत जनपद गाज़ीपुर के हंसराजपुर एवं नियामताबाद ग्रामों में कृषक जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी देखने को मिली।
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किसानों की रही सक्रिय भागीदारी
हंसराजपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम में कुल 50 किसानों (20 पुरुष एवं 30 महिलाएं) ने हिस्सा लिया, जबकि नियामताबाद में 40 किसान (20 पुरुष एवं 20 महिलाएं) उपस्थित रहे। दोनों स्थानों पर किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति अपनी रुचि दिखाई।
जैव उर्वरक और संतुलित प्रबंधन पर जोर
कार्यक्रम के दौरान डॉ. डी. पी. सिंह ने किसानों को जैव उर्वरकों के महत्व, उनके उपयोग और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में उनकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं डॉ. इन्दीवर प्रसाद ने संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने पर बल देते हुए बताया कि इससे उत्पादन लागत में कमी के साथ फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
विशेषज्ञों का रहा योगदान
इस अवसर पर अनुराग चौरसिया, डॉ. वाई. एस. रेड्डी, डॉ. मंजुनाथ एवं डॉ. धनंजय होंगल ने भी किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों के बारे में मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम का आयोजन समुन्नति फाउंडेशन एवं उनके सहयोगी किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के सहयोग से किया गया, जबकि संचालन रामरतन सिंह द्वारा किया गया।
संवाद के जरिए समाधान
कार्यक्रम के अंत में किसानों और वैज्ञानिकों के बीच खुला संवाद हुआ, जिसमें किसानों ने अपनी समस्याएं साझा कीं और विशेषज्ञों से उनके समाधान प्राप्त किए। किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का संकल्प भी लिया।
बेहतर खेती की ओर कदम
विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया कि संतुलित उर्वरक उपयोग के साथ जैविक विकल्पों को अपनाने से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि लागत में कमी आएगी और मिट्टी का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर और कृषि को टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
Source: ICAR-INDIAN INSTITUTE OF VEGETABLE RESEARCH
