किसानों की आय बढ़ाएगा अमूल का मेगा डेयरी प्रोजेक्ट!

कोलकाता में अमूल बंगाल डेयरी परियोजना की बड़ी शुरुआत: विश्व के सबसे बड़े दही उत्पादन संयंत्र का भूमि पूजन

कोलकाता, 19 जुलाई। पश्चिम बंगाल के डेयरी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में अमूल बंगाल डेयरी परियोजना के तहत विश्व के सबसे बड़े दही उत्पादन संयंत्र का भूमि पूजन किया। लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाली यह परियोजना राज्य के लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ और ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में यह परियोजना एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि समृद्ध, सुरक्षित, शिक्षित और संस्कारित ‘सोनार बांग्ला’ के निर्माण का संकल्प अब विकास परियोजनाओं के माध्यम से वास्तविकता में बदल रहा है।

10 लाख लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता से होगी शुरुआत

अमूल बंगाल डेयरी परियोजना के पहले चरण में प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध का प्रसंस्करण किया जाएगा। इस परियोजना से सीधे तौर पर लगभग 1.20 लाख छोटे दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों को लाभ मिलने की संभावना है।

परियोजना के पूर्ण रूप से संचालित होने पर इसकी कुल प्रसंस्करण क्षमता 30 लाख लीटर दूध प्रतिदिन तक पहुंच जाएगी। संयंत्र में प्रतिदिन 10 लाख किलोग्राम दही और अन्य कल्चर्ड डेयरी उत्पादों का उत्पादन किया जा सकेगा, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा दही उत्पादन केंद्र बन जाएगा।

पशुपालकों को मिलेगा बेहतर मूल्य और स्थायी बाजार

अमित शाह ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अमूल को 30 एकड़ भूमि उपलब्ध कराए जाने से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को गति मिली है। इससे दुग्ध उत्पादकों को अपने दूध का बेहतर मूल्य मिलेगा और विपणन की नई संभावनाएं खुलेंगी।

उन्होंने कहा कि अमूल का सहकारी मॉडल किसानों के हितों पर आधारित है। अमूल के उत्पादों पर उपभोक्ता द्वारा खर्च किए गए प्रत्येक 100 रुपये में से लगभग 87 रुपये सीधे किसानों और पशुपालकों तक पहुंचते हैं। यही सहकारिता की सबसे बड़ी ताकत है।

‘मिष्टी दही’ को मिलेगा राष्ट्रीय बाजार

अमित शाह ने विश्वास जताया कि अमूल बंगाल डेयरी परियोजना में बनने वाली पारंपरिक बंगाली ‘मिष्टी दही’ को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से बंगाल तक यह उत्पाद घर-घर पहुंचेगा और पश्चिम बंगाल की डेयरी पहचान को देशव्यापी बाजार मिलेगा।

नस्ल सुधार और आधुनिक डेयरी विकास पर जोर

कार्यक्रम में पशुधन विकास को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में पशुओं की नस्ल सुधार के लिए विशेष केंद्र स्थापित करेगी। यहां सेक्स-सॉर्टेड सीमन जैसी आधुनिक तकनीकों की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे अधिक दूध देने वाली दुधारू नस्लों का विस्तार हो सकेगा।

सरकार का लक्ष्य अगले 15 वर्षों में राज्य के पशुपालकों को ऐसी नस्लों के पशु उपलब्ध कराना है, जिनसे वर्तमान की तुलना में कम से कम 25 प्रतिशत अधिक दूध उत्पादन हो।

छह महीने में किसानों तक पहुंचेंगी 70 से अधिक योजनाएं

अमित शाह ने बताया कि सहकारिता मंत्रालय के माध्यम से संचालित 70 से अधिक किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अगले छह महीनों में पश्चिम बंगाल के किसानों तक पहुंचाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके लिए राज्य सरकार और केंद्र के बीच समन्वय व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

सहकारी क्षेत्र में डिजिटलीकरण को बढ़ावा

कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय के पूर्ण कंप्यूटरीकरण की भी जानकारी दी गई। इससे सहकारी संस्थाओं को ऑनलाइन सेवाएं, पारदर्शिता और त्वरित प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध होगी।

इसके अलावा 10 सहकारी गोदामों का शिलान्यास और 1,400 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदामों का उद्घाटन भी किया गया, जिससे किसानों को भंडारण सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

‘सारथी’ और भारत टैक्सी के बीच समझौता

कार्यक्रम में टैक्सी चालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ‘सारथी’ अवधारणा के तहत भारत टैक्सी के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस मॉडल में चालक केवल वाहन संचालक नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म का हिस्सेदार भी होगा और लाभ का हिस्सा सीधे उसके खाते में पहुंचेगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार

विशेषज्ञों का मानना है कि अमूल बंगाल डेयरी परियोजना राज्य में डेयरी सहकारिता, मूल्य संवर्धन, शीत शृंखला, खाद्य प्रसंस्करण और ग्रामीण रोजगार को नई गति देगी। परियोजना से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है।

कृषि-डेयरी अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

डेयरी क्षेत्र के जानकारों के अनुसार यह परियोजना पश्चिम बंगाल में ‘श्वेत क्रांति 2.0’ की नींव रख सकती है। आधुनिक प्रसंस्करण, बेहतर बाजार व्यवस्था और सहकारी मॉडल के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार मिलेगा। अमूल बंगाल डेयरी परियोजना पूर्वी भारत को डेयरी उत्पादन और मूल्य संवर्धन का नया केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।