धान की खेती में AI क्रांति: RAISE ऐप किसानों को देगा तुरंत रोग और कीट प्रबंधन सलाह!
हैदराबाद -Indian Council of Agricultural Research के अंतर्गत ICAR-Indian Institute of Rice Research द्वारा विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित “Rice AI Stress Evaluator (RAISE)” परियोजना अब किसानों तक वैज्ञानिक सलाह को तेज और आसान तरीके से पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है। आधुनिक कृषि में AI तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और विशेष रूप से फसलों में रोग, कीट और पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याओं की पहचान में यह तकनीक अहम भूमिका निभा रही है।
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इसी कड़ी में 19 मई 2026 को हैदराबाद स्थित ICAR-भारतीय धान अनुसंधान संस्थान में RAISE परियोजना से जुड़े हितधारकों की कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. आर.एम. सुंदरम ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय की पूर्व विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. सुधारानी मौजूद रहीं।
किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाने में AI बनेगा बड़ा माध्यम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. आर.एम. सुंदरम ने कहा कि बदलते कृषि परिदृश्य में डिजिटल तकनीकों का उपयोग अब अनिवार्य हो गया है। उन्होंने बताया कि RAISE मोबाइल एप्लीकेशन धान की फसल में आने वाली समस्याओं की पहचान कर किसानों को तुरंत प्रबंधन संबंधी सलाह देने में सक्षम होगा।
उन्होंने कहा कि यदि किसान खेत से प्रभावित पौधों की तस्वीर ऐप पर अपलोड करते हैं, तो AI मॉडल उन तस्वीरों का विश्लेषण कर रोग या कीट की पहचान करेगा और उसके अनुरूप समाधान सुझाएगा। इससे किसानों को कृषि विशेषज्ञों तक पहुंचने में लगने वाला समय बचेगा और शुरुआती अवस्था में ही फसल प्रबंधन संभव हो सकेगा।
जियो-टैगिंग से मिलेगी रोग और कीट प्रकोप की सटीक जानकारी
डॉ. सुंदरम ने ऐप में जियो-टैगिंग सुविधा को शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, किसानों द्वारा अपलोड की जाने वाली तस्वीरों के साथ लोकेशन डेटा जुड़ने से यह पता लगाया जा सकेगा कि किस क्षेत्र में कौन-सा रोग या कीट तेजी से फैल रहा है।
उन्होंने कहा कि इस डेटा के आधार पर भविष्य में प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को पहले से चेतावनी और प्रबंधन सलाह जारी की जा सकेगी। इससे फसल नुकसान कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि AI और डेटा एनालिटिक्स का यह मॉडल भविष्य में “प्रिसिजन एग्रीकल्चर” को नई दिशा दे सकता है।
स्थानीय भाषा और आसान तकनीक पर जोर
मुख्य अतिथि डॉ. सुधारानी ने कहा कि कृषि विस्तार सेवाओं में स्मार्ट तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में ऐसे एप्लीकेशन किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को दी जाने वाली अंतिम सलाह उनकी स्थानीय भाषा में उपलब्ध होनी चाहिए ताकि तकनीक का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके।
उन्होंने ऐप में फोटो अपलोड प्रक्रिया को और सरल बनाने, सभी प्रकार के मोबाइल फोन के साथ इसकी संगतता सुनिश्चित करने तथा इसे किसान-हितैषी इंटरफेस के साथ विकसित करने पर भी बल दिया।
इसके अलावा उन्होंने विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में ऐप के प्रदर्शन का परीक्षण करने और किसानों के सवालों के अधिक सटीक जवाब देने के लिए एंकर-आधारित चैटबॉट प्रणाली विकसित करने का सुझाव भी दिया।
RAISE परियोजना पुस्तिका का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने RAISE परियोजना की पुस्तिका का विमोचन भी किया। इस पुस्तिका में परियोजना के उद्देश्य, एप्लीकेशन की प्रमुख विशेषताएं और किसानों को मिलने वाली सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी गई है।
RAISE परियोजना से जुड़ी वैज्ञानिक डॉ. सैलजा और उनकी टीम ने एप्लीकेशन की कार्यप्रणाली, उपयोग विधि और प्रमुख फीचर्स की जानकारी प्रस्तुत की। कार्यक्रम में ऐप का लाइव प्रदर्शन, उपयोगकर्ताओं से फीडबैक संग्रह और इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किए गए।
डिजिटल कृषि की ओर बढ़ता भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित कृषि समाधान देश में कृषि सलाह सेवाओं को नई गति दे सकते हैं। धान जैसी प्रमुख फसल में रोग और कीट प्रबंधन के लिए यदि किसानों को समय रहते सही सलाह मिलती है, तो उत्पादन लागत कम होने के साथ उपज में भी सुधार संभव है।
कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों का बढ़ता उपयोग इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में भारत की खेती अधिक डेटा-आधारित, सटीक और तकनीक-संचालित बनने जा रही है।
Source: IIRR-ICAR

